Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राजनीति

सिद्धांत नहीं, सुविधा की राजनीति! दल-बदल कानून और राजनीतिक नैतिकता फिर सवालों के घेरे में!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
April 28, 2026
in राजनीति, राष्ट्रीय
A A
21
SHARES
687
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर


नई दिल्ली: देश के राजनीतिक परिदृश्य में एक दल को छोड़ कर दूसरे में शामिल होने को लोकतांत्रिक अधिकार के तौर पर देखा जाता है। मगर सच यह भी है कि जब जनप्रतिनिधियों ने सिद्धांतों के बजाय सुविधा के मुताबिक पार्टी बदलने को एक आम चलन बनाना शुरू कर दिया, तब इस पर लगाम लगाने की जरूरत पड़ी और इसी क्रम में दल-बदल विरोधी कानून अस्तित्व में आया। विडंबना यह है कि इस कानून के लागू होने के बावजूद अलग-अलग कारणों का हवाला देकर विधायकों या सांसदों के पाला बदलने या दूसरी पार्टियों में शामिल होने के मामले आए दिन सामने आते रहे हैं।

इन्हें भी पढ़े

Hackers

ईरान संकट का सहारा ले रहे साइबर अपराधी, कैसे बचें?

April 28, 2026
Swati Maliwal

बीजेपी में शामिल होने के बाद आया स्वाति मालीवाल का पहला बयान!

April 28, 2026
gas cylinder

1 मई से बदलेंगे LPG सिलेंडर बुकिंग के नियम? जानिए क्या कुछ बदलेगा

April 28, 2026
fastag

टोल पर नो स्टॉप! बिना रुके कटेगा Toll, जानें सरकार का प्लान

April 27, 2026
Load More

सात सांसदों ने पार्टी छोड़ दी!

मगर इस बार आम आदमी पार्टी से जुड़े राज्यसभा के सात सांसदों ने जिस तरह अपने दल को छोड़ कर भारतीय जनता पार्टी से जुड़ने की घोषणा की है, उसने एक बार फिर राजनीति में नैतिकता और दल-बदल कानून की प्रासंगिकता पर बहस छेड़ दी है। गौरतलब है कि राज्यसभा में आप के दस सांसद थे। उनमें से राघव चड्डा सहित सात सांसदों ने पार्टी छोड़ दी। उनका मानना है कि चूंकि अलग होने वाले सांसदों की संख्या दो-तिहाई की कसौटी पर पूरी है, इसलिए दल-बदल विरोधी कानून के तहत यह गलत नहीं है।

नैतिकता की कसौटी पर भी उचित मान

संभव है कि आप छोड़ कर भाजपा में शामिल होने वाले इन नेताओं के लिए सिर्फ कानून के प्रावधानों पर खरा उतरना ही किसी कार्रवाई से बचने के लिए काफी है, लेकिन सवाल है कि क्या केवल तकनीकी तौर पर सही होकर ही खुद को नैतिकता की कसौटी पर भी उचित मान लिया जा सकता है। यों, आम आदमी पार्टी की ओर से संबंधित सातों सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग करने की बात कही गई है।

हवाला यह दिया गया है कि दल-बदल कानून में राज्यसभा और लोकसभा में किसी भी प्रकार का विभाजन या गुटबंदी करने पर स्पष्ट तौर पर मनाही की गई है, भले ही वहां दो-तिहाई बहुमत हो। जाहिर है, आप के नेता अब दल-बदल से संबंधित कानूनी बारीकियों के मुताबिक कार्रवाई की उम्मीदं कर रहे हैं। मगर यह देखने की बात होगी कि इस मसले पर मान्यता का मुद्दा उठने पर अंतिम फैसला क्या आता है। एक सवाल अपना दल छोड़ कर सांसदों के भाजपा में शामिल होने और पार्टी के रूप में विलय से जुड़े संदर्भ का भी उठेगा।

राघव चड्डा की राजनीतिक सक्रियता

हालांकि पिछले कुछ समय से राघव चड्डा की राजनीतिक सक्रियता जिस तरह उलझी हुई दिख रही थी, उसके मद्देनजर पहले से ही उनके पार्टी से बाहर होने की संभावना जताई जा रही थी। मगर उनके साथ जिस तरह छह अन्य नेताओं ने ++ पार्टी छोड़ी है, उसे लेकर राजनीतिक हलके में थोड़ी हैरानी जताई जा रही है। देश की राजनीति में बिना किसी सैद्धांतिक आधार के सुविधा के मुताबिक पार्टी बदलने की प्रवृत्ति और इसके सहारे सरकारों की स्थिरता के प्रभावित होने के हालात को रोकने के लिए दल-बदल कानून बनाया गया था।

दल-बदल कानून की प्रासंगिकता

मगर पिछले कुछ वर्षों से इस कानून के तहत मिली छूट का लाभ उठा कर कई राज्यों में जिस तरह सरकारें बदली गईं, उसमें कहीं भी सैद्धांतिक कसौटी का खयाल रखना जरूरी नहीं समझा गया। ऐसे अनेक मामले सामने आए, जिनमें सिर्फ परिस्थितियों का लाभ उठाने के लिए विचारधारात्मक प्रतिबद्धता के सवाल को दरकिनार कर दिया गया और ऐसे नेताओं के लिए दल-बदल कानून कोई बाधा नहीं बना। इसी क्रम में आप के सात सांसदों के भाजपा में शामिल होने पर फिर यह सवाल उठा है कि आखिर दल-बदल कानून की प्रासंगिकता क्या रह गई है।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
जंतर मंतर पहुंची शिक्षा शव यात्रा

एक देश एक शिक्षा को लेकर जंतर मंतर पहुंची शिक्षा शव यात्रा

September 21, 2023
Dhami

प्रकृति को जोड़ने का घोड़ा लाइब्रेरी का प्रयास अत्यंत सराहनीय : CM धामी

December 29, 2025
REC

आरईसी लिमिटेड ने अत्याधुनिक एक्सपीरियंस सेंटर का किया उद्घाटन

March 10, 2025
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • ‘द वायरल ओनर’ बनी युवाओं की आवाज, मेरठ में हुआ भव्य आयोजन!
  • सोशल मीडिया साइड इनकम बन सकती है मुसीबत! वकीलों की चेतावनी
  • सिद्धांत नहीं, सुविधा की राजनीति! दल-बदल कानून और राजनीतिक नैतिकता फिर सवालों के घेरे में!

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.