नई दिल्ली। दवाइयां हमें बीमारियों से उबरने में मदद करती हैं. जब किसी व्यक्ति को सेहत से जुड़ी समस्या होती है, तब उसका इलाज दवाओं से किया जाता है. दवाओं में कई तत्व होते हैं, जो जीवन रक्षक साबित होते हैं. दवाएं हमारे स्वास्थ्य की रक्षा करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. दवाएं लोगों का दर्द कम करती हैं और जीवन की क्वालिटी बेहतर बनाती हैं.
हालांकि हर दवा का असर केवल शरीर तक सीमित नहीं रहता है. अधिकतर दवाएं हमारे ब्रेन को भी प्रभावित करती हैं. कई लोग ओवर द काउंटर मिलने वाली कॉमन दवाओं को अपनी मर्जी से खूब इस्तेमाल करते हैं, लेकिन ऐसा करने से ब्रेन को गंभीर नुकसान हो सकता है. इससे ब्रेन से जुड़ी कई समस्याएं पैदा हो सकती हैं.
HT की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के मिशिगन न्यूरोसर्जरी इंस्टीट्यूट में मल्टीडिसिप्लिनरी न्यूरोसर्जन और पेन मैनेजमेंट स्पेशलिस्ट डॉ. जय जगन्नाथन ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है. इसमें उन्होंने लोगों को चेतावनी दी कि कुछ दवाओं का लंबे समय तक या बार-बार उपयोग करने से ब्रेन का कामकाज प्रभावित हो सकता है.
कुछ दवाओं के साथ याददाश्त में बदलाव, सोचने-समझने की गति में कमी और न्यूरोट्रांसमीटर संतुलन में परिवर्तन देखे गए हैं. इन दवाओं को खराब नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि ये कई समस्याओं से राहत दिलाती हैं. हालांकि इन दवाओं का इस्तेमाल हमेशा डॉक्टर की सलाह पर भी करना चाहिए. अगर किसी दवा का लंबे समय तक उपयोग किया जाए, तो उसका बुरा असर समय के साथ दिखाई दे सकता है.
बेंजोडायजेपाइन्स (Benzodiazepines) – बेंजोडायजेपाइन्स दवाएं जैसे- Alprazolam, Lorazepam, Diazepam का इस्तेमाल एंजायटी, पैनिक डिसऑर्डर, अनिद्रा और मिर्गी के दौरे के लिए किया जाता है. कभी-कभी मांसपेशियों के खिंचाव के लिए भी ये दवाएं दी जाती हैं. कम समय के लिए ये काफी असरदार होती हैं, लेकिन लंबे समय तक लेने पर याददाश्त कमजोर होना, सोचने की गति धीमी होना, एडिक्शन और बुजुर्गों में गिरने का खतरा बढ़ सकता है.
एंटीकॉलिनर्जिक दवाएं (Anticholinergic Drugs) – इन ड्रग्स में Diphenhydramine, Oxybutynin और कुछ एंटीडिप्रेसेंट्स दवाएं शामिल होती हैं. इनका उपयोग एलर्जी, सर्दी-जुकाम, ओवरएक्टिव ब्लैडर, यूरिनरी इंकंटीनेंस, पार्किंसन डिजीज और कभी-कभी डिप्रेशन में किया जाता है. ये दवाएं एसिटाइलकोलिन नामक रसायन को ब्लॉक करती हैं, जो याददाश्त और सीखने के लिए जरूरी है. ज्यादा या लंबे उपयोग से भ्रम, ध्यान में कमी और डिमेंशिया का जोखिम बढ़ सकता है.
ओपिओइड्स (Opioids) – इन दवाओं में Oxycodone, Hydrocodone, Morphine होती हैं. ये दवाएं तेज या असहनीय दर्द, सर्जरी के बाद का दर्द, कैंसर का दर्द या गंभीर चोट के मामलों में दी जाती हैं. ये बहुत असरदार पेनकिलर हैं, लेकिन लंबे समय तक उपयोग से एडिक्शन हो सकता है. इनके ज्यादा इस्तेमाल से मस्तिष्क की संरचना में बदलाव, ग्रे मैटर में कमी और निर्णय लेने की क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है.
कीमोथेरेपी एजेंट्स (Chemotherapy Drugs) – कैंसर के इलाज में कीमोथेरेपी ड्रग्स जैसे Methotrexate, Cisplatin का इस्तेमाल किया जाता है. ये लाइफ सेविंग दवाएं होती हैं, लेकिन कुछ मरीजों को इलाज के दौरान या बाद में कीमो ब्रेन का अनुभव हो सकता है. इसमें ध्यान लगाने में दिक्कत, याददाश्त में कमी और सोचने की रफ्तार धीमी होना शामिल है. यह असर अक्सर अस्थायी होता है, लेकिन कुछ मामलों में लंबे समय तक रह सकता है.
स्टिमुलेंट्स (Stimulants) – अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) में Amphetamines और अन्य कुछ दवाएं दी जाती हैं. ये दवाएं कभी-कभी नार्कोलेप्सी में भी दी जाती हैं. डॉक्टर की निगरानी में ये सुरक्षित और प्रभावी हो सकती हैं, लेकिन बिना प्रिस्क्रिप्शन या अधिक मात्रा में लेने से चिंता बढ़ना, नींद खराब होना, ब्लड प्रेशर बढ़ना और डोपामाइन सिस्टम में असंतुलन हो सकता है.







