नई दिल्ली। जब भी निवेश की बात आती है, सबसे पहले दिमाग में ‘सुरक्षा’ का ख्याल आता है। यही वजह है कि बहुत से लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे स्मॉल सेविंग स्कीम्स में पैसा लगा देते हैं। जैसे कि सुकन्या समृद्धि योजना, सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम और PPF। ये स्कीम्स आसान लगती हैं, भरोसेमंद लगती हैं और इनमें निवेश करना भी आसान होता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग इनमें पैसा लगाते हैं। क्योंकि इन स्कीमों के साथ सरकार की गारंटी भी रहती है।
लेकिन सवाल यह है कि जो चीज सुरक्षित दिखती है, क्या वह हमेशा आपके पैसे के लिए सबसे सही विकल्प भी होती है? सबसे पहले स्मॉल सेविंग स्कीम के फायदे जान लेते हैं। फिर इसकी दिक्कतों को भी समझेंगे।
स्मॉल सेविंग्स स्कीम के फायदे
पैसों की सेफ्टी : सरकार इन स्कीम्स की गारंटी लेती है। मतलब कि आपका पैसा डूबने का खतरा लगभग नहीं के बराबर होता है।
स्थिर और तय रिटर्न : आपको पहले से पता होता है कि कितना रिटर्न मिलेगा। इससे फाइनेंशियल प्लानिंग करना आसान हो जाता है।
बाजार के जोखिम से दूरी : इन स्कीम्स का शेयर बाजार से कोई नाता नहीं। बाजार गिरता भी है, तो आपके निवेश पर असर नहीं पड़ेगा।
टैक्स बेनिफिट : PPF और सुकन्या योजना में निवेश, ब्याज और मैच्योरिटी- तीनों पर टैक्स नहीं लगता। इससे असली कमाई बढ़ती है।
नियमित आय का विकल्प : SCSS जैसी योजनाएं नियमित ब्याज देती हैं, जो खासकर रिटायर लोगों के लिए फायदेमंद होती हैं।
आसान निवेश : इन स्कीम्स में निवेश करना काफी आसान होता है। यह उन लोगों के लिए अच्छा है जो जटिल फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स से दूर रहना चाहते हैं।
स्मॉल सेविंग स्कीम्स के साथ दिक्कत
स्मॉल सेविंग स्कीम्स सुरक्षित जरूर होती हैं, लेकिन इनकी सबसे बड़ी कमी है लंबा लॉक-इन, जिससे जरूरत के समय पैसा निकालना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा रिटर्न सीमित होता है, जो कई बार महंगाई के बराबर ही रह जाता है, यानी असली कमाई बहुत कम होती है।
कुछ स्कीम्स में ब्याज पर टैक्स भी लगता है, जिससे नेट रिटर्न और घट जाता है। साथ ही ये बाजार से जुड़ी नहीं होतीं, इसलिए ज्यादा ग्रोथ का फायदा नहीं मिलता और आप बेहतर अवसरों से चूक सकते हैं।
स्मॉल सेविंग स्कीम्स निवेशकों की गलती
सबसे बड़ी गलती तब होती है जब लोग सिर्फ ‘सुरक्षित’ शब्द देखकर अपना पैसा लंबे समय के लिए लॉक कर देते हैं। बिना यह सोचे कि उन्हें भविष्य में इस पैसे की जरूरत पड़ सकती है। यहां जोखिम पैसा खोने का नहीं है, बल्कि जरूरत के समय पैसा न मिल पाने का है।
कागज पर दिखने वाला रिटर्न और असली कमाई अलग हो सकती है। मान लीजिए किसी स्कीम पर 8% ब्याज मिल रहा है, लेकिन अगर आप 30% टैक्स ब्रैकेट में हैं, तो आपका वास्तविक रिटर्न करीब 5.6% रह जाएगा। अगर महंगाई भी 5-6% है, तो आपका पैसा असल में ज्यादा नहीं बढ़ रहा, बस अपनी वैल्यू बनाए रख रहा है।
लॉक-इन पीरियड भी एक बड़ा फैक्टर
कई स्मॉल सेविंग स्कीम्स में लंबा लॉक-इन होता है। जैसे PPF में 15 साल का लॉक-इन है। अगर बीच में बेहतर निवेश विकल्प मिल जाएं या आपकी जरूरत बदल जाए, तो आप आसानी से पैसा नहीं निकाल पाएंगे।
आज के समय में सिर्फ सुरक्षित रहना ही काफी नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर पैसा इस्तेमाल कर पाना भी उतना ही जरूरी है। कई बार सही मौके पर निवेश न कर पाना या पैसा फंसा रह जाना भी एक तरह का जोखिम बन जाता है।
सबसे ज्यादा लॉक-इन वाली स्कीम्स
- सबसे लंबा लॉक-इन Public Provident Fund (PPF) में होता है। इसमें पैसा 15 साल के लिए लॉक रहता है।
- सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) भी लंबी अवधि की स्कीम है। इसमें निवेश लड़की के 21 साल की उम्र तक या शादी तक लॉक रहता है।
- नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) में पैसा 5 साल के लिए लॉक रहता है। इसमें बीच में निकासी की सुविधा लगभग नहीं के बराबर होती है।
- सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) का लॉक-इन 5 साल का होता है। समय से पहले निकासी की सुविधा है, लेकिन पेनल्टी लगती है।
हालांकि, पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट (POTD) 1, 2, 3 और 5 साल के विकल्प के साथ आता है। इसमें 6 महीने के बाद प्रीमैच्योर निकासी की सुविधा होती है, लेकिन कुछ पेनल्टी के साथ। किसान विकास पत्र (KVP) में फिक्स लॉक-इन जैसा नहीं है, लेकिन यह करीब 115 महीने (लगभग 9.5 साल) में पैसा डबल करता है।
संतुलन बनाना ही सही तरीका
बेशक स्मॉल सेविंग स्कीम्स आज भी भरोसेमंद हैं, लेकिन इन्हें पूरे निवेश का आधार नहीं बनाना चाहिए। बेहतर तरीका यह है कि आप संतुलन बनाकर चलें। कुछ पैसा सुरक्षित विकल्पों में रखें और कुछ ऐसे निवेश में लगाएं, जहां ग्रोथ और लिक्विडिटी दोनों मिल सकें। जैसे कि म्यूचुअल फंड SIP, शेयर मार्केट या फिर गोल्ड।
क्योंकि निवेश सिर्फ रिटर्न कमाने के लिए नहीं होता, बल्कि सही समय पर सही फैसले लेने की आजादी भी उतनी ही अहम होती है।







