नई दिल्ली: 26 फरवरी को जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबला अब औपचारिक मैच नहीं, बल्कि ‘मैथमेटिकल सर्वाइवल टेस्ट’ बन चुका है.सुपर-8 में साउथ अफ्रीका से मिली हार ने भारत का नेट रन रेट गिराकर -3.800 कर दिया है, जिससे वह पॉइंट टेबल में पीछे खिसक गया.
वहीं वेस्टइंडीज (+5.350) और साउथ अफ्रीका (+3.800) बेहतर रन रेट के साथ आगे चल रहे हैं. ऐसे में अगर तीनों टीमें समान अंकों पर भी पहुंचती हैं, तो फैसला रन रेट से होगा, और फिलहाल भारत इस गणित में काफी पीछे है.
ऐसे में भारत जिम्बाब्वे के खिलाफ यदि पहले बल्लेबाजी करता है, या रनचेज करता है तो भारत को क्या करना होगा? तो समझ लीजिए….
भारत के लिए क्यों जरूरी है 100+ रन की जीत?
अगर भारत पहले बल्लेबाजी करते हुए 220 रन बनाता है, तो उसे विपक्ष को 120 या उससे कम पर रोकना होगा. यानी 100 रन या उससे ज्यादा का अंतर ही वह झटका देगा, जिससे भारत का रन रेट दोबारा मुकाबले में आ सके. साधारण जीत अब किसी काम की नहीं, बल्कि भारत को मैच ‘डॉमिनेट’ करना होगा.
अहमदाबाद में भारत की भारी हार ने समीकरण बदल दिए. अगर साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज और भारत सभी चार पॉइंट्स पर खत्म होते हैं. वही अगर भारत जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज को हरा देता है, जबकि साउथ अफ्रीका एक गेम हार जाता है, तो यह बहुत मुमकिन है, NRR तय करेगा कि कौन आगे बढ़ेगा. अभी, भारत बहुत पीछे चल रहा है.
अगर भारत जिम्बाब्वे के खिलाफ चेज करे तो…
यदि जिम्बाब्वे पहले बैटिंग करे और टारगेट दे), तो क्या करना होगा? अगर भारत चेज करता है, तो सेमीफाइनल की उम्मीदें बचाने के लिए बहुत तेज चेज करना होगा. NRR सुधारने के लिए जिम्बाब्वे अगर 150-160 रन बनाए, तो भारत को वो टारगेट 11-12 ओवर में चेज करना चाहिए, यानी 150 रन 11 ओवर में चेज करने पर NRR में बड़ा बूस्ट मिलेगा. वहीं सामान्य रूप से, 100+ रनों की जीत या इससे ज्यादा मार्जिन चाहिए.
उदाहरण: अगर जिम्बाब्वे 160 बनाए और भारत 161 को 10-12 ओवर में चेज करे, NRR में +4 से +5 तक का सुधार संभव. अगर जिम्बाब्वे 180+ बनाए, तो चेज 15 ओवर से पहले पूरा करना होगा ताकि रन रेट हाई रहे और NRR अच्छा बने.
ओपनिंग कॉम्बिनेशन पर उठ रहे सवाल
लगातार विफलताओं के बाद अभिषेक शर्मा की जगह संजू सैमसन को मौका देने की मांग तेज हो गई है. टीम मैनेजमेंट पावरप्ले में 70+ रन के आक्रामक लक्ष्य पर विचार कर रहा है, ताकि मैच शुरुआत से ही एकतरफा बनाया जा सके.
चेपॉक की पिच और स्पिन बनेगा भारत का हथियार मुकाबला एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला जाएगा, जहां पारंपरिक रूप से स्पिनरों को मदद मिलती है. ऐसे में भारत तीन-प्रमुख स्पिन विकल्पों के साथ उतर सकता है. इमें कुलदीप यादव, वरुण चक्रवर्ती और अक्षर पटेल शामिल हैं.
यानी भारत की रणनीति साफ है, पहले खेलकर बड़ा स्कोर बनाओ फिर स्पिन जाल में फंसाकर विपक्ष को जल्दी समेटना.डिफेंडिंग चैम्पियन के लिए यह टूर्नामेंट अब रफ्तार का नहीं, बल्कि साहस और फैसलों का इम्तिहान बन गया है. टी20 वर्ल्ड कप के के इस राउंड में भारत को 2024 वाली आक्रामक पहचान फिर से जगानी होगी. जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच जीतना लक्ष्य नहीं है, उसे इस तरह जीतना होगा कि सेमीफाइनल की उम्मीद दोबारा जिंदा हो जाए.
परिदृश्य 1 – भारत दोनों मैच जीतता है
अगर भारत अपने दोनों मुकाबले जीत लेता है तो उसके चार अंक हो जाएंगे, जो सामान्य परिस्थितियों में सेमीफाइनल के लिए काफी होने चाहिए. लेकिन अगर साउथ अफ्रीका एक ही मैच जीते और वेस्टइंडीज बनाम जिम्बाब्वे का विजेता भी उसे हरा दे, तो तीन टीमें चार अंकों पर पहुंच सकती हैं. ऐसे में फैसला नेट रन रेट (NRR) से होगा और यहीं भारत की हालिया हार का असर सामने आएगा. भारत के लिए सबसे सरल स्थिति तब होगी जब साउथ अफ्रीका अपने बाकी दोनों मैच जीत ले, जिससे गणित सीधा हो जाए.
परिदृश्य 2 – भारत एक मैच जीतता है
अगर भारत सिर्फ एक मैच जीतता है तो स्थिति मुश्किल हो जाएगी. उसे साउथ अफ्रीका के बाकी सभी मैच जीतने की उम्मीद करनी होगी. साथ ही उसकी एकमात्र जीत वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे के बीच होने वाले मुकाबले के विजेता के खिलाफ होनी चाहिए. ऐसी हालत में भारत, वेस्टइंडीज और जिम्बाब्वे बराबर अंकों पर आ सकते हैं और फिर फैसला नेट रन रेट से होगा.







