नई दिल्ली। होली का त्योहार रंग, गुलाल, मस्ती और खुशियों का त्योहार है। बदलते समय के साथ होली मनाने का तरीका भी बदल रहा है। जहां पहले लोग पानी भरी पिचकारियां, गुब्बारों और रंगों से जमकर होली खेलते थे, वहीं अब नई पीढ़ी यानी जेन-जी सूखी होली को ज्यादा पसंद कर रही है। आखिर जेन-जी पानी वाली होली की जगह ड्राई होली को क्यों अपना रही हैं? आइए जानते हैं इसके पीछे के कुछ कारणों के बारे में।
पानी बचाने की सोच
होली पर पानी की बर्बादी हद से ज्यादा होती है। ऐसे में पानी बचाने की सोच भी सुखी होली खेलने की बड़ी वजह है। उनका मानना है कि त्योहार की खुशी के लिए पानी की बर्बादी सही नहीं है। सूखे गुलाल से होली मनाकर हम पर्यावरण और पानी दोनों को बचा सकते हैं।
स्किन और बालों की केयर
जेन-जी स्किन और हेयर केयर का काफी ध्यान रखते हैं। होली के गीले और केमिकल वाले रंग कई बार एलर्जी, रैशेज और बालों को नुकसान पहुंचा देते हैं। इसलिए जेन-जी ड्राई होली ज्यादा पसंद करते हैं और ऑर्गेनिक गुलाल का इस्तेमाल करना सुरक्षित मानते हैं। गुलाल का रंग चेहरे पर ज्यादा नहीं चढ़ता है और आसानी से निकल जाता है। वहीं, केमिकल वाले कलर्स से चेहरा भी डैमेज होने का खतरा बना रहता है।
साफ-सफाई की झंझट
जेन-जी सिंपल और क्लीन सेलिब्रेशन ज्यादा पसंद करती हैं। गीली होली तो हम खेल लेते हैं, लेकिन उसके बाद घर की दीवारों से लेकर कपड़ों तक हर जगह रंग ही रंग नजर आते हैं। जिसकी वजह से साफ-सफाई का काम बहुत बढ़ जाता है। ड्राई होली खेलने से गंदगी कम फैलती है और सफाई की झंझट भी कम होती है।
सोशल मीडिया का असर
जेन-जी के बीच ड्राई होली का ट्रेंड बढ़ने का एक बड़ा कारण है सोशल मीडिया। जेन-जी हर नए ट्रेंड को सबसे पहले अपनाते हैं। सफेद कपड़ों पर हल्का गुलाल, फूलों की होली या थीम पार्टी, ये सब ड्राई होली को और भी ट्रेंडी बना देते हैं। साथ ही, इनमें रील्स और फोटो का काफी क्रेज होता है, जो एस्थेटिक लुक के लिए बेहतरीन मानी जाती है।







