नई दिल्ली। सुबह नींद से उठते ही अगर सिर घूमने लगे, आंखों के आगे अंधेरा छा जाए या कुछ सेकेंड के लिए शरीर हल्का महसूस हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। कई लोग इसे थकान, कम नींद या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन बार-बार ऐसा होना किसी अंदरूनी समस्या की ओर इशारा कर सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार, ज्यादातर मामलों में सुबह उठते ही चक्कर आना शरीर की अचानक पोजीशन बदलने से जुड़ा होता है। जब हम लेटी हुई अवस्था से सीधे खड़े होते हैं, तो कुछ पलों के लिए दिमाग तक खून की सप्लाई कम हो जाती है। इसी स्थिति को ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन कहा जाता है।
क्या है ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन?
जब शरीर लेटे हुए से खड़े होने की स्थिति में आता है, तो ब्लड प्रेशर अचानक गिर सकता है। अगर शरीर तुरंत इस बदलाव को संतुलित नहीं कर पाता, तो सिर घूमने, कमजोरी या आंखों के आगे अंधेरा छाने जैसा एहसास होता है। यह समस्या खासतौर पर बुजुर्गों, कम पानी पीने वालों और कुछ दवाइयों का सेवन करने वाले लोगों में अधिक देखी जाती है।
सुबह चक्कर आने के आम कारण
पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)
रात भर सोने के दौरान शरीर में पानी की मात्रा स्वाभाविक रूप से कम हो जाती है। अगर दिनभर पर्याप्त पानी न पिया गया हो, तो सुबह उठते समय ब्लड प्रेशर गिर सकता है, जिससे चक्कर या कमजोरी महसूस होती है। शराब या अधिक कैफीन का सेवन शरीर को और डिहाइड्रेट करता है, जिससे यह समस्या बढ़ सकती है और सुबह उठते ही सिर घूमने लगता है।
लो ब्लड शुगर
सुबह लंबे समय तक खाली पेट रहने से कुछ लोगों में ब्लड शुगर लेवल गिर सकता है। खासकर डायबिटीज के मरीज जो इंसुलिन या शुगर कम करने वाली दवाइयां लेते हैं, उनमें हाइपोग्लाइसीमिया की वजह से चक्कर आना, अचानक कमजोरी महसूस होना, पसीना आना और घबराहट जैसे लक्षण दिख सकते हैं। इसलिए सुबह समय पर नाश्ता करना और ब्लड शुगर को संतुलित रखना बहुत जरूरी है।
दवाइयों का साइड इफेक्ट
ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन, दिल की बीमारी या नींद से जुड़ी कुछ दवाइयां ब्लड प्रेशर और नसों के काम करने के तरीके को प्रभावित कर सकती हैं। इन दवाइयों के असर से सुबह उठते समय ब्लड प्रेशर अचानक गिर सकता है, जिससे चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना या आंखों के आगे अंधेरा छाने जैसी समस्या हो सकती है। अगर किसी दवा के बाद यह लक्षण बार-बार दिखें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
स्लीप एपनिया
अगर रात के समय नींद के दौरान सांस बार-बार रुकती है, तो शरीर और दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। ऑक्सीजन की कमी का असर सुबह उठते ही चक्कर आना, सिर भारी लगना या थकान महसूस होने के रूप में दिखाई दे सकता है। लंबे समय तक स्लीप एपनिया की समस्या रहने पर सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है, इसलिए इसके लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कान से जुड़ी दिक्कतें
कान का अंदरूनी हिस्सा शरीर का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। अगर इसमें सूजन, संक्रमण या कान के अंदर मौजूद क्रिस्टल में गड़बड़ी हो जाए, तो उठते समय या पोजीशन बदलते ही तेज चक्कर आ सकते हैं। इसके अलावा खून की कमी, माइग्रेन या कुछ न्यूरोलॉजिकल समस्याएं भी बार-बार चक्कर आने की वजह बन सकती हैं, इसलिए ऐसी स्थिति में जांच कराना जरूरी होता है।
सुबह चक्कर आने से बचने के आसान तरीके
- बिस्तर से अचानक न उठें पहले 1–2 मिनट बैठें, फिर धीरे-धीरे खड़े हों।
- दिनभर पर्याप्त पानी पिएं और सुबह उठते ही एक गिलास पानी जरूर लें।
- रात में शराब और ज्यादा कैफीन से बचें।
- ब्रेकफास्ट जरूर करें, ताकि ब्लड शुगर स्थिर रहे।
- अगर किसी दवा के बाद चक्कर बढ़ रहे हों, तो डॉक्टर से सलाह लें।
- समस्या बार-बार हो, बेहोशी, सीने में दर्द या नजर धुंधली हो तो तुरंत मेडिकल जांच कराएं।
सुबह उठते ही चक्कर आना सामान्य लग सकता है, लेकिन अगर यह बार-बार हो रहा है, तो कारण समझना और समय पर कदम उठाना जरूरी है। सही आदतें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह आपको इस समस्या से बचा सकती है।







