नई दिल्ली। भारत अब यूरोप में कई छोटे-छोटे दोस्त बना रहा है। ये दोस्त अलग तरह की खासियत रखते हैं। दरअसल, फिनलैंड के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर स्टब चार दिवसीय दौरे पर बुधवार को भारत पहुंचे। भारत और फिनलैंड के बीच ट्रेड, निवेश और क्रिटिकल टेक्नोलॉजी को लेकर बात होनी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्टब का स्वागत करते हुए कहा है कि भारत और फिनलैंड के संबंध नई ऊंचाइयों पर जाएंगे। वहीं, स्टब ने भी सोशल मीडिया पर कहा है कि यह दौरा फिनलैंड और भारत के बीच संबंधों को और मजबूत करने वाला बनने जा रहा है। फिनलैंड के राष्ट्रपति बृहस्पतिवार को रायसीना डायलॉग के प्रारंभिक सत्र के चीफ गेस्ट भी होंगे। स्टब का स्वागत भारतीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने किया।
2024 में EFTA देशों के साथ भारत ने किया समझौता
sciencebusiness.net के अनुसार, भारत ने इससे पहले 2024 में यूरोप के कई और छोटे-छोटे जैसे EFTA देशों ( स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टाइन) के साथ 2024 में एक समझौता किया था, जिसमें तकनीक को बढ़ावा देने, निवेश और आर्थिक भागीदारी को बढ़ाने की बात कही गई है।
भारत ने हाल ही में यूरोप के 28 देशों के साथ ट्रेड डील की
भारत ने इसी साल जनवरी के आखिर में यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता किया। इसमें भारत के साथ 28 यूरोपीय देशों के बीच ट्रेड डील को लेकर समझौता हुआ है। इसमें भी भारत को तकनीक देने की बात कही गई है।
क्रिटिकल तकनीक बेहद जरूरी और इनोवेटिव तकनीक है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के साथ-साथ क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक्नोलाम्जी का इस्तेमाल होता है। यह मिलिट्री ड्रोन, रोबोट और मेडिकल उपकरण समेत कई अहम चीजों में इस्तेमाल होती है।
अमेरिका-चीन का नहीं ताकना पड़ेगा मुंह
sciencebusiness.net के अनुसार, भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच इस डील का असर दिखने में तो वक्त लगेगा। मगर, इतना तय है कि यूरोपीय यूनियन और भारत रिसर्च और तकनीक पर मिलकर काम करेंगे। भारत इन दोनों ही मामलों में अब तक अमेरिका और चीन पर निर्भर रहा है।
तकनीकी रणनीतिक स्वायत्तता जरूरी है: एक्सपर्ट
- बंगलूरू में तक्षशिला इंस्टीट्यूट में डिप्टी डायरेक्टर प्रणय कोटास्थाने के अनुसार, तकनीकी रणनीतिक स्वायत्तता भारत और यूरोपीय यूनियन दोनों के लिए बहुत जरूरी है।
- फरवरी, 2022 में यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद से यूरोपीय यूनियन ने पहली बार भारत के साथ संबंधों को बढ़ाने की वकालत की। भारत रूस से बड़ी संख्या में हथियारों का आयात करता है। अब फ्रांस भी भारत को लड़ाकू विमान और हथियार बेचने लगा है।
भारत ने पुर्तगाल के साथ भी बढ़ा लिए संबंध
- इससे पहले बीते साल अप्रैल में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पुर्तगाल का दौरा किया था। उस भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत और पुर्तगाल अपने रिश्तों की 50वीं वर्षगांठ मना रहे हैं।
- दोनों ही देश ट्रेड, डिफेंस, अक्षय ऊर्जा और एजुकेशन के क्षेत्र में और मजबूती से काम करेंगे। साथ ही दोनों देश अपने कूटनीतिक रिश्तों को और बढ़ाएंगे।
फ्रांस ने दिया राफेल, पर सोर्स कोड पर अब भी पेच
- वैसे तो यूरोप में भारत का एक मजबूत दोस्त फ्रांस है, जो हर मौकों पर भारत का समर्थन करता रहता है। यहां तक फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पी-5 देशों में शामिल है, मगर सुरक्षा परिषद की जब भी विस्तार की बात आती है, तो फ्रांस आगे खड़ा नजर आता है।
- भारत का 114 राफेल लड़ाकू विमानों को खरीदने के लिए फ्रांस से समझौता अंतिम चरण में है। इस पर तकनीकी ट्रांसफर से लेकर कई घातक मिसाइलें देने पर बात चल रही है। हालांकि, राफेस का सोर्स कोड देने पर पेच फंसा हुआ है।
- हाल ही में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत आए। इस दौरान दोनों देशों के बीच ट्रेड के अलावा, राफेल, तकनीकी ट्रांसफर समेत कई मसलों पर सार्थक बातचीत हुई।







