प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
काठमांडू: नेपाल में हाल ही में हुए आम चुनावों की मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों में रैपर से राजनेता बने बालेन शाह निर्णायक बढ़त बनाते हुए दिखाई दे रहे हैं। मौजूदा रुझानों के आधार पर यह संकेत मिल रहे हैं कि वे नेपाल के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह नेपाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जाएगा, क्योंकि लंबे समय से देश की राजनीति पर पारंपरिक दलों और पुराने नेताओं का वर्चस्व रहा है।
प्रमुख नेताओं से मुकाबला
राजधानी काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह का मुकाबला इस चुनाव में देश के कई बड़े और स्थापित नेताओं से रहा। इनमें नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, तथा नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गगन थापा शामिल हैं। हालांकि शुरुआती रुझानों में शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने अप्रत्याशित बढ़त हासिल कर सभी को चौंका दिया है।
दो-तिहाई से अधिक सीटों पर बढ़त
नेपाल चुनाव आयोग द्वारा जारी शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, शनिवार सुबह तक: राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) 24 सीटें जीत चुकी है और 93 सीटों पर आगे चल रही है। नेपाली कांग्रेस 1 सीट जीतकर 11 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) 1 सीट जीतकर 10 सीटों पर आगे है। नेपाल की संसद में 165 सीटें प्रत्यक्ष निर्वाचन के जरिए भरी जाती हैं। शुरुआती रुझानों में आरएसपी दो-तिहाई से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।
धीमी मतगणना की वजह
नेपाल में चुनाव परिणाम आने में आमतौर पर समय लगता है। इसका मुख्य कारण देश का पहाड़ी और दुर्गम भूगोल है। कई दूरदराज के इलाकों से मतपेटियां लाने के लिए हेलिकॉप्टर का सहारा लेना पड़ता है। इसी वजह से अंतिम नतीजे आने में कई दिन लग सकते हैं। उदाहरण के तौर पर 2022 के आम चुनाव में अंतिम परिणाम आने में दो सप्ताह से अधिक समय लगा था।
क्यों अहम है यह चुनाव ?
इस बार का चुनाव नेपाल की राजनीति में पुराने और नए नेतृत्व के बीच मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है। पिछले वर्ष हुए जन प्रदर्शनों के बाद जनता के बीच बदलाव की मांग तेज हुई थी। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने 2022 के आम चुनाव में चौथा स्थान हासिल किया था, लेकिन इस बार पार्टी ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए सत्ता की दौड़ में खुद को आगे कर लिया है।
युवाओं की बड़ी भूमिका
इस चुनाव में लगभग 8 लाख नए मतदाता पहली बार वोट डालने के पात्र बने। विश्लेषकों के अनुसार युवाओं ने चुनावी परिणामों को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राजनीतिक दलों ने युवाओं को आकर्षित करने के लिए रोजगार सृजन, भ्रष्टाचार पर कार्रवाई और बेहतर प्रशासन का वादा किया।
पिछले तीन दशकों से नेपाल में अस्थिर गठबंधन सरकारों का दौर रहा है। देश की राजनीति पर मुख्य रूप से तीन बड़े दलों का वर्चस्व रहा है, जिसके कारण सरकारें अक्सर बदलती रही हैं। इस बार चुनाव में कोई बड़ा राष्ट्रीय गठबंधन नहीं बना, जिससे अलग-अलग दलों और उम्मीदवारों की वास्तविक लोकप्रियता सामने आ रही है।
नए चेहरों का उभार
इस चुनाव में बड़ी संख्या में नए उम्मीदवार मैदान में उतरे हैं। लगभग एक-तिहाई उम्मीदवार निर्दलीय हैं। इससे स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि नेपाल की जनता पारंपरिक राजनीति से अलग नए विचार और नए नेतृत्व की तलाश कर रही है।
यदि बालेन शाह चुनाव में जीत हासिल कर सरकार बनाने में सफल रहते हैं, तो इसे नेपाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जाएगा। यह परिणाम इस बात का संकेत भी हो सकता है कि मतदाता अब पारंपरिक राजनीतिक दलों से हटकर वैकल्पिक नेतृत्व को मौका देना चाहते हैं। अंतिम परिणाम आने में अभी समय है, लेकिन शुरुआती रुझानों ने नेपाल की राजनीति में एक नई बहस और उत्साह जरूर पैदा कर दिया है।







