- फोकस स्टेट पार्टनर’ के रूप में बिहार का विशेष सत्र आयोजित।
- घाटे से मुनाफे तक पहुंचा बिजली क्षेत्र, सुधारों की झलक।
- अधिकतम मांग 8,700 मेगावाट से अधिक, आपूर्ति में उल्लेखनीय वृद्धि।
- 87 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर स्थापित।
- AT&C हानियां घटकर लगभग 15.5%।
- अगले पांच वर्षों में ₹81,000 करोड़ से अधिक निवेश का लक्ष्य।
- 2030 तक 24 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने की योजना।
मुरार सिंह कंडारी
नई दिल्ली। भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 के दौरान ‘फोकस स्टेट पार्टनर’ के रूप में बिहार ने अपने ऊर्जा क्षेत्र में हुए बदलाव और आगे की योजनाओं को एक सुव्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत किया। यशोभूमि (इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर) के गुलमोहर हॉल में आयोजित राज्य सत्र “Powering Bihar’s Growth: Innovation, Inclusion & Investment” में राज्य सरकार की प्राथमिकताओं और ऊर्जा क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की स्पष्ट झलक देखने को मिली।
सत्र में बिहार सरकार के ऊर्जा सचिव एवं बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री मनोज कुमार सिंह (भा.प्र.से.) के साथ राज्य की बिजली कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत के साथ हुई, जहां साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (SBPDCL) एवं बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड (BSPGCL) के प्रबंध निदेशक श्री महेंद्र कुमार (भा.प्र.से.) ने अतिथियों का स्वागत किया। इसके बाद एक लघु फिल्म के माध्यम से बिहार के ऊर्जा क्षेत्र में हुए बदलावों और प्रमुख पहलों को सरल तरीके से प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में ऊर्जा सचिव श्री मनोज कुमार सिंह ने राज्य के ऊर्जा क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और आगे की दिशा को विस्तार से रखा। उन्होंने बताया कि बीते वर्षों में बिजली क्षेत्र में वित्तीय और परिचालन दोनों स्तरों पर उल्लेखनीय सुधार हुआ है। जहां एक समय राज्य की ट्रांसमिशन यूटिलिटी को वित्त वर्ष 2014 में ₹342 करोड़ का घाटा होता था, वहीं अब यह वित्त वर्ष 2025 में ₹2,004 करोड़ के लाभ तक पहुंच चुकी है।
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में बिजली की उपलब्धता और मांग दोनों में लगातार वृद्धि हुई है। अधिकतम मांग की पूर्ति 8,700 मेगावाट से अधिक तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि राज्य में आर्थिक गतिविधियां बढ़ रही हैं और बिजली आपूर्ति में सुधार हुआ है। वितरण कंपनियों ने भी अपनी कार्यप्रणाली में सुधार किया है, जिससे AT&C हानियां घटकर लगभग 15.5 प्रतिशत रह गई हैं और बिलिंग व राजस्व संग्रह में बेहतर परिणाम देखने को मिले हैं।
डिजिटल पहल के रूप में बिहार स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। राज्य में 87 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और उपभोक्ताओं को भी अपने बिजली उपयोग पर बेहतर नियंत्रण मिला है।
भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए ऊर्जा सचिव ने बताया कि बिहार ने वर्ष 2030 तक 24 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही उत्पादन, संचारण और वितरण क्षेत्रों में अगले पांच वर्षों के दौरान ₹81,000 करोड़ से अधिक निवेश आकर्षित करने की योजना है, जिससे राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी।
सत्र के दौरान “Powering Bihar’s Growth: Innovation, Inclusion & Investment” विषय पर एक उच्च-स्तरीय पैनल चर्चा भी हुई, जिसमें एनटीपीसी लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री गुरदीप सिंह, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अध्यक्ष श्री घनश्याम प्रसाद, अडानी समूह के प्रेसिडेंट एवं एडवाइजर श्री दीपक अमिताभ, ACME Solar के सीईओ श्री निखिल ढींगरा, Secure Meters के सीईओ (APAC) श्री संजीव ढल, Greenko के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट श्री परवीन मित्तल नंदा तथा L&T के वीपी एवं हेड (रिन्यूएबल्स) श्री दीपक कुमार नायक सहित कई उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस चर्चा में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने बिहार की नीतियों और यहां उपलब्ध अवसरों पर अपने विचार रखे और राज्य में निवेश को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया। कार्यक्रम का संचालन PwC इंडिया के प्रबंध निदेशक श्री अभिजीत रे ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) एवं बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (BSPTCL) के प्रबंध निदेशक श्री राहुल कुमार (भा.प्र.से.) ने किया।
इस अवसर पर ऊर्जा सचिव श्री मनोज कुमार सिंह ने कहा कि राज्य में ऊर्जा क्षेत्र में हो रहा बदलाव मजबूत नीतियों और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि बिहार में प्रक्रियाएं समयबद्ध और सरल हैं, जिससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आई है। साथ ही उन्होंने बताया कि शेष लगभग 2.5 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर को भी जल्द लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
इस सत्र के माध्यम से बिहार ने यह स्पष्ट किया कि वह ऊर्जा क्षेत्र में सुधार, निवेश और तकनीकी विकास को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में इस क्षेत्र में और बेहतर परिणाम देने के लिए प्रतिबद्ध है।






