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Home राष्ट्रीय

भारत में कहां से आती है पीएनजी, युद्ध में भी जिस पर नहीं पड़ रहा कोई असर!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
March 29, 2026
in राष्ट्रीय
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नई दिल्ली। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले ने वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सप्लाई की चेन खराब कर दी है। तेल भंडार से भरे, गल्फ क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइलों की बारिश ने तबाही ला दी है। इसका असर भारत समेत दुनिया के कई अन्य देशों पर भी पड़ा है और सभी देश दशकों की सबसे बड़ी फ्यूल क्राइसिस से जूझ रहे हैं।

भारत में, सरकार लोगों को पीएनजी कनेक्शन के लिए उत्साहित कर रही है। लोगों से कहा जा रहा है कि अगर उनके घरों तक पीएनजी लाइन पहुंच गई है तो वह एलपीजी सिलिंडर सरेंडर करके पीएनजी में शिफ्ट हो जाएं। बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के चलते एलपीजी सप्लाई पर असर पड़ा है। आइए समझते हैं कि आखिर क्या है पीएनजी? साथ ही यह भी जानेंगे कि क्या इसकी सप्लाई, एलपीजी सप्लाई की तरह प्रभावित नहीं हुई है।

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क्या है पीएनजी
पीएनजी यानी पाइपलाइन गैस या पाइप्ड नैचुरल गैस, मुख्य रूप से नैचुरल गैस (अधिकतर मीथेन) है। इसे अंडरग्राउंड पाइपलाइनों के जरिए सीधे घरों तक पहुंचाया जाता है। भारत में पीएनजी को गैस वाले क्षेत्रों से प्राकृतिक ढंग से निकाला जाता है और तरल रूप में, लिक्विफाइड नैचुरल गैस (एलएनजी) के रूप में सप्लाई किया जाता है। वहीं, दूसरी तरफ एलपीजी रिफाइनरियों में तैयार की जाती है। वहां पर इसे क्रूड ऑयल से बनाया जाता है। पीएनजी लगातार फ्लो में रहती है और इसे रिफिलिंग की जरूरत नहीं होती। यह सिटी गैस नेटवर्क के जरिए लो प्रेशर में सप्लाई की जाती है।

पीएनजी आती कहां से है
भारत में घरेलू स्तर पर पीएनजी, गैस क्षेत्रों, जैसे-कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन, आसाम और त्रिपुरा से आती है। उत्तरी तट पर गहरे पानी में स्थित केजी बेसिन, सबसे बड़ा उत्पादक है। केजी बेसिन में तीन क्षेत्र, आर क्लस्टर, सैटेलाइट क्लस्टर और एमजे हैं। यह साल 2024 में भारत में पैदा हुई, कुल 36 बीसीएम पीएनजी का 25 फीसदी है। अनुमान है कि पूरे जीवन में यहां से 85 बीसीएम पीएनजी का उत्पादन होगा। असम और त्रिपुरा के बेसिन रिजर्व से देश के उत्पादन की 47 फीसदी पीएनजी आती है। वहीं, इंपोर्टेड नैचुरल गैस (एलएनजी) भारत में मध्य पूर्व, मुख्य रूप से कतर से आती है। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया भी भारत को एलएनजी सप्लाई करते हैं।

क्यों प्रभावित हो रही एलपीजी सप्लाई
एलपीजी प्रोपेन और ब्यूटेन का एक मिश्रण है, जिसे सिलेंडरों में दबाव के तहत तरल रूप में संग्रहित किया जाता है। यह क्रूड ऑयल को प्रोसेस करके निकाला जाता है। इसके लिए दुनिया, मुख्य रूप से मध्य पूर्व पर निर्भर करती है। भारत अपनी एलपीजी खपत का लगभग 60 फीसदी आयात करता है। इसमें से करीब 90 फीसदी होर्मुज से आता है। मिडिल ईस्ट से आयात पर निर्भर होने के चलते एलपीजी की सप्लाई पर असर पड़ रहा है। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर रखा है। वहां से गिने-चुने टैंकर ही पास हो पा रहे हैं। इसके लिए भी काफी ज्यादा कवायद करनी पड़ रही है। हाल ही में अलग-अलग शहरों में एलपीजी सिलिंडरों के लिए लगने वाली लाइन, इसी डिस्टर्बेंस का नतीजा है।

पीएनजी सप्लाई पर असर क्यों नहीं
भारत सरकार लगातार लोगों से अपील कर रही है कि विकल्प होने पर वह एलपीजी सिलिंडरों को छोड़ पाइप से सप्लाई होने वाली पीएनजी पर शिफ्ट हो जाएं। इसकी वजह यह है कि ईरान में चल रहे युद्ध के हालात में भी पीएनजी की सप्लाई प्रभावित नहीं होने वाली है। पीएनजी फिक्स पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए डिलिवर होती है। चूंकि इसके वितरण का तरीका जमीन के नीचे बिछी पाइपों से होता है, ऐसे में इसे सिलिंडरों में भरने की जरूरत नहीं होती। इसलिए अगर वैश्विक स्तर पर किसी तरह का डिस्टर्बेंस भी होता है तो इसकी सप्लाई पर असर नहीं पड़ने वाला है। लोगों को बिना किसी बाधा के गैस मिलनी जारी रहती है और घरों का चूल्हा जलता रहता है।

एलएनजी का आयात
भारत हर साल करीब 25-26 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी का आयात करता है। उदाहरण के लिए, एस एंड पी ग्लोबल के अनुसार, भारत ने 2025 में करीब 25.5 मिलियन टन एलएनजी आयात की थी। भविष्य में यह बढ़कर सालाना 28–29 मिलियन टन तक होने का अनुमान है। भारत का आधिकारिक सरकारी आंकड़ा, पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल द्वारा प्रकाशित किया जाता है।

यह एलएनजी आयात को ट्रैक करता है और पुष्टि करता है कि भारत की प्राकृतिक गैस की मांग का लगभग 50 फीसदी आयात से पूरा होता है, जो मुख्य रूप से एलएनजी के रूप में होता है। मिडिल ईस्ट युद्ध के चलते एलएनजी पूरी तरह अप्रभावित नहीं है। बता दें कि वित्त वर्ष 25 में कतर से 41 फीसदी आयात हुआ। वहीं, अमेरिका से भारत के एलएनजी आयात का 19 प्रतिशत रहा।

एलपीजी बनाम पीएनजी कनेक्शनों की संख्या
भारत के पास वर्तमान में 16.2 मिलियन घरेलू पीएनजी कनेक्शन हैं। इसके मुकाबले 332 मिलियन से अधिक एलपीजी उपभोक्ता हैं। साल 2014 में यह संख्या 140 मिलियन थी। इसमें 105.6 मिलियन बीपीएल परिवार भी हैं, जिनके पास पीएम उज्ज्वला योजना के अंतर्गत सब्सिडी वाले कनेक्शन हैं।

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