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Home राज्य

भारत की गर्दन पर थी दुश्मनों की नजर, सुवेंदु अध‍िकारी ने पलट द‍िया गेम

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
June 22, 2026
in राज्य, राष्ट्रीय
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suvendu adhikari
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नई दिल्ली। चिकन नेक यानी भारत की गर्दन, जिस पर वर्षों से दुश्मन नजर गड़ाए हुए हैं. लेकिन अब पश्च‍िम बंगाल की सरकार ने ऐसा फैसला ल‍िया है क‍ि इन दुश्मनों को क‍िसी भी हरकत पर करारा जवाब म‍िलेगा. सुवेंदु अध‍िकारी सरकार ने एयरफोर्स को और ताकतवर बनाने के ल‍िए हासीमारा एयर फोर्स स्टेशन के लिए 25 एकड़ और कलाईकुंडा एयर फोर्स स्टेशन के लिए 37 एकड़ जमीन आवंटित करने का फैसला किया है. यह स‍िर्फ छोटी सी जमीन नहीं है, यह राफेल- S400 को बूस्‍टर डोज है. क्‍योंक‍ि यहीं पर राफेल- S400 की तैनाती है, जो पूर्वी भारत के स‍िक्‍योर‍िटी गार्ड हैं.

हासीमारा एयर फोर्स स्टेशन और कलाईकुंडा एयर फोर्स स्टेशन पर तैनात राफेल ही सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक की सुरक्षा करते हैं. इनके रहते कोई भी इस इलाके पर नजर रखने की सोच भी नहीं सकता. सबसे खास बात, यह वही पतला रास्ता है जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी देश से जोड़ता है. अगर इस पर आंच आ गई तो भारत की सुरक्षा के ल‍िए खतरा पैदा हो जाएगा.

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कब बने थे ये दोनों एयरबेस

1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद जब हमें एहसास हुआ, तब 1963 में इस बेस को एक्‍ट‍िव किया गया था. चुम्बी घाटी त्रिजंक्शन के पास होने के कारण यह एयरबेस सिलीगुड़ी कॉरिडोर और पूर्वी हिमालय क्षेत्र की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है. इस अतिरिक्त जमीन के मिलने से अब यहां रनवे सुविधाएं, हैंगर, रखरखाव कार्यशालाएं और हमारे सैनिकों की आवास व्यवस्था और बेहतर होगी.

हासीमारा एयरबेस ड्रैगन का काल

अलीपुरद्वार जिले में भूटान सीमा के पास स्थित हासीमारा एयरबेस भारतीय वायुसेना का बेहद महत्वपूर्ण फॉरवर्ड बेस है. यह वो अड्डा है जहां से युद्ध की स्थिति में सबसे पहला और सबसे घातक प्रहार किया जा सकता है. यहीं पर आसमान का बाहुबली राफेल तैनात हैः हासीमारा में राफेल फाइटर एयरक्राफ्ट की दूसरी स्क्वाड्रन तैनात है, जो पूर्वी क्षेत्र और भारत-चीन सीमा पर भारत की लड़ाकू क्षमता को बहुत बढ़ाती है.

राफेल और S-400 का कांब‍िनेशन हासीमारा को दुश्मन के लिए बहुत खतरनाक बना देता है. S-400 सिस्टम 400 किलोमीटर दूर तक दुश्मन के विमान, मिसाइल और ड्रोन को नष्ट कर सकता है. वहीं दूसरी ओर, राफेल इस डिफेंस को एक आक्रामक ताकत देता है. यानी अगर दुश्मन ने उड़ने की कोशिश की तो S-400 उसे हवा में ही भून देगा, और अगर हमें घुसकर मारना पड़ा तो राफेल पलक झपकते तबाही मचा देगा.

कलाईकुंडा एयरबेस जहां तैयार होते हैं आसमान के सिकंदर

कलाईकुंडा हमारी वायुसेना की नसों में दौड़ती ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक्स का पावरहाउस है. पश्चिम मेदिनीपुर जिले में स्थित कलाईकुंडा एयरबेस पूर्वी एयर कमांड के तहत एक बड़ा फाइटर और ट्रेनिंग हब है. यहां आसमान का सीना चीरने वाले Su-30 MKI और हॉक ट्रेनर एयरक्राफ्ट तैनात रहते हैं. यह बेस अंतरराष्ट्रीय एयर एक्सरसाइज के लिए भी प्रसिद्ध है, खासकर सिंगापुर एयर फोर्स के साथ हुए कई द्विपक्षीय अभ्यास यहां हो चुके हैं.

कलाईकुंडा की हवाई पट्टी का जलवा ऐसा है कि यह लगभग 10,000 फीट लंबी है, जो फाइटर और भारी ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट दोनों को संभाल सकती है. राज्य सरकार से मिली 37 एकड़ जमीन से यहां लॉजिस्टिक्स, आवास, रखरखाव और सपोर्ट सुविधाएं बढ़ेंगी. रक्षा जानकारों की मानें तो यह विकास गेम चेंजर साबित होगा क्योंकि शांति और युद्धकाल दोनों में यहां भारतीय वायुसेना की तैनाती बदलती रहती है.

क्‍यों ल‍िया गया ये फैसला

आज के दौर में युद्ध सिर्फ तोप और गोलों से नहीं लड़े जाते. विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में एयरबेस सिर्फ विमान उड़ाने के स्थान नहीं रह गए हैं. ये अब कमांड सेंटर, ड्रोन बेस, लॉजिस्टिक हब और इंटेलिजेंस यूनिट का काम भी करते हैं. अतिरिक्त जमीन इन बहु-उद्देश्यीय क्षमताओं को विकसित करने में उपयोगी होगी.

भारतीय वायुसेना पूर्वी क्षेत्र में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रही है. हासीमारा और कलाईकुंडा के विस्तार के साथ-साथ नए रडार, कम्युनिकेशन सिस्टम और लॉजिस्टिक सपोर्ट को मजबूत किया जा रहा है. यह सिर्फ चीन नहीं, बल्कि समग्र क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार रहने में मदद करेगा. पूर्वी भारत की भौगोलिक स्थिति काफी संवेदनशील है. भूटान, नेपाल, बांग्लादेश और चीन की सीमाएं यहां करीब हैं. इन बेसों का मजबूत होना न सिर्फ हवाई श्रेष्ठता बल्कि थल सेना और नौसेना के साथ समन्वय में भी मदद करेगा.

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