नई दिल्ली: भारतीय बैंकिंग सेक्टर से एक बड़ी खबर सामने आई है. केंद्रीय बैंक RBI ने दुबई के एमिरेट्स नेशनल बैंक ऑफ दुबई (Emirates NBD) को प्राइवेट सेक्टर के बैंक RBL बैंक में 74% तक हिस्सेदारी हासिल करने की मंजूरी दे दी है. इस कदम के साथ ही RBL बैंक अब एक विदेशी बैंक(Foreign Lender) बनने की राह पर बढ़ चला है. RBL बैंक ने गुरुवार (2 अप्रैल 2026) को एक रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया कि रिजर्व बैंक की ओर से यह मंजूरी 1 अप्रैल 2026 को मिली है. यह अनुमति एक साल की अवधि के लिए वैध रहेगी.
UAE के दूसरे सबसे बड़े बैंक, एमिरेट्स NBD ने अक्टूबर 2025 में RBL बैंक में 26,853 करोड़ रुपये में 60% मेजॉरिटी हिस्सेदारी खरीदने की इच्छा जताई थी.
विदेशी बैंक की सहायक कंपनी के रूप में होगा काम
RBI के मंजूरी पत्र के अनुसार, एमिरेट्स NBD (ENBD) को RBL बैंक की चुकता शेयर पूंजी का कम से कम 51% हिस्सा खरीदना और बनाए रखना होगा. अधिग्रहण के बाद RBL बैंक को ‘विदेशी बैंक’ की श्रेणी में रखा जाएगा, जो कि एक सहायक मोड (Subsidiary Mode) में काम करेगा. इसका मूल विदेशी बैंक एमिरेट्स NBD होगा.
वोटिंग राइट्स और बोर्ड के नियम
हालांकि ENBD के पास 74% तक शेयर हो सकते हैं, लेकिन बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 की धारा 12(2) के अनुसार, उनके वोटिंग राइट्स (मतदान अधिकार) को 26% पर सीमित रखा जाएगा.
RBI ने ये भी स्पष्ट किया है कि बैंक को अपने ‘आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन’ (AoA) में आवश्यक संशोधन करने होंगे. साथ ही, SEBI के नियमों के अधीन ENBD को RBL बैंक के प्रवर्तक (Promoter) के रूप में वर्गीकृत करने पर RBI को कोई आपत्ति नहीं है.
सरकार से मंजूरी मिलना अभी बाकी
इस डील को पूरी तरह प्रभावी होने के लिए अभी कुछ और कदम उठाने होंगे. जैसे कि 49% से अधिक के निवेश के लिए भारत सरकार से आवश्यक मंजूरी लेना अनिवार्य होता है, तो बैंक को ये प्रक्रिया पूरी करनी होगी. ENBD को एक साल के भीतर या अपनी भारतीय शाखाओं के RBL बैंक में विलय होने तक ‘सिंगल मोड ऑफ प्रेजेंस’ की शर्त से छूट दी गई है. बता दें कि इससे पहले जनवरी में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने इस अधिग्रहण प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी थी.
बैंकिंग सेक्टर पर प्रभाव
जानकारों का मानना है कि इस निवेश से RBL बैंक की पूंजी संरचना बेहद मजबूत होगी और वैश्विक स्तर पर इसकी पहुंच बढ़ेगी. नवंबर 2025 में जारी RBI के नए गवर्नेंस निर्देशों के तहत यह अपनी तरह का एक बड़ा बदलाव है, जो भारतीय बैंकिंग में विदेशी निवेश के नए द्वार खोल रहा है.







