नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका सीजफायर के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। इससे पेट्रोल, डीजल, गैस, राशन, फ्लाइट टिकट और रोजमर्रा की चीजों के सस्ते होने की उम्मीद बढ़ गई है। अगर सीजफायर का उल्लंघन नहीं होता है, तो इसका असर धीरे-धीरे आपकी जेब पर दिखने लगेगा। आइए इसको विस्तार से समझते हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच हुए सीजफायर ने न सिर्फ वैश्विक राजनीति में राहत दी है, बल्कि आम आदमी की जेब पर भी इसका असर पड़ने लगा है। जैसे ही दोनों देशों के बीच तनाव कम हुआ, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 13% से 17% तक की गिरावट देखी गई। इसका सीधा संबंध भारत जैसे देशों से है, जहां बड़ी मात्रा में तेल आयात किया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अब रोजमर्रा की चीजें सच में सस्ती होंगी? आइए जरा विस्तार से समझते हैं कि सीजफायर के इस फैसले से पेट्रोल-डीजल, गैस, फर्टिलाइजर, ट्रांसपोर्ट, हवाई सफर कितना सस्ता होगा?
आइए इस पूरे घटनाक्रम को शुरू से समझते हैं। आपको याद ही होगा कि जब ईरान-इजराइल-अमेरिका का संघर्ष शुरू हुआ तो धीरे-धीरे पेट्रोल-डीजल, गैस, ट्रांसपोर्ट और हवाई सफर समेत कुछ डेली इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं की कीमतें आसमान छूने लगीं। इस तनाव का सबसे बड़ा असर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मेज (Strait of Hormuz) पर पड़ा, ये वो जगह है, जहां से दुनिया का करीब 25% तेल गुजरता है। जब यहां तनाव बढ़ा था, तो सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा था और तेल महंगा हो गया था। अब सीजफायर के बाद सप्लाई फिर से सामान्य होने की उम्मीद है, जिससे कीमतों में गिरावट आई है।
क्या है स्ट्रेट ऑफ हॉर्मेज?
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण और संकरा समुद्री मार्ग है। यह ईरान और ओमान/यूएई के बीच स्थित है। लगभग 33 किलोमीटर चौड़े इस रास्ते से वैश्विक तेल का लगभग 20-25% हिस्सा गुजरता है, जिससे यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम है।
पेट्रोल-डीजल समेत किन चीजों पर पड़ेगा असर?
अब सीजफायर के भारत में इसका सबसे पहला असर पेट्रोल और डीजल पर देखने को मिल सकता है। हालांकि, कीमतें तुरंत नहीं घटतीं, लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में तेल कंपनियां राहत दे सकती हैं। इसका फायदा सिर्फ वाहन चलाने वालों को ही नहीं, बल्कि पूरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मिलेगा। जब डीजल सस्ता होता है, तो सामान ढुलाई का खर्च कम होता है, जिससे सब्जियां, दूध, राशन, फर्टिलाइजर, प्लास्टिक के सामान समेत अन्य जरूरी चीजों के दाम भी धीरे-धीरे नीचे आ सकते हैं।
LPG पर भी इसका असर
रसोई गैस यानी LPG पर भी इसका असर पड़ने की उम्मीद है। ईंधन सस्ता होने से सिलेंडर की लागत घट सकती है, जिससे घरेलू बजट पर दबाव कम होगा। इसके अलावा होटल-रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल सिलेंडर सस्ते होने से बाहर खाना भी थोड़ा किफायती हो सकता है, यानी ठेले या दुकान पर मिलने वाला ₹20 का समोसा फिर से ₹10 का हो सकता है।
हवाई सफर होगा सस्ता
हवाई यात्रा करने वालों के लिए भी यह अच्छी खबर है। एविएशन कंपनियों का बड़ा खर्च ईंधन पर होता है, इसलिए तेल सस्ता होने से हवाई टिकटों की कीमतों में भी कमी आ सकती है। साथ ही प्लास्टिक, पैकेजिंग, कपड़े और अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पादों की लागत भी घट सकती है, जिससे इनकी कीमतों में राहत मिल सकती है।
टायर, पेंट, कपड़े की कॉस्टिंग होगी कम
सीजफायर के बने रहने से FMCG सामान और ई-कॉमर्स कंपनियों की डिलीवरी सस्ती होगी। बाइक-कार समेत सभी गाड़ियों के टायर, पेंट, कपड़े और पैकेजिंग मटेरियल की कॉस्ट भी कम हो जाएगी।
किसानों का क्या फायदा?
कच्चे तेल के सस्ता होने से लगभग सभी उद्योगों की उत्पादन लागत कम हो जाएगी, जिसका फायदा धीरे-धीरे ग्राहकों तक पहुंचेगा। एलएनजी (LNG) की सप्लाई बढ़ने से गैस आधारित बिजली पैदा करने वाली कंपनियों को भी राहत मिलेगी, जिससे किसानों को खेतों की महंगी सिंचाई नहीं देनी पड़ेगी। इसका असर फर्टिलाइजर बनाने वाली कंपनियों और किसानों दोनों को मिलेगा।
सीजफायर रहा तो ही कम होंगी कीमतें?
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि यह असर तुरंत नहीं दिखेगा। बाजार में नई कीमतों को लागू होने में 1-3 हफ्ते का समय लग सकता है। साथ ही अगर यह सीजफायर स्थायी नहीं रहा, तो कीमतें फिर बढ़ सकती हैं। यह घटनाक्रम आम लोगों के लिए राहत भरी खबर है, लेकिन असली फायदा तभी मिलेगा, जब यह शांति लंबे समय तक बनी रहे और सरकार भी सही कदम उठाए।






