Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home धर्म

अक्षय तृतीया पर किस भगवान की होती है पूजा? जानें इस दिन का महत्व

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
April 16, 2026
in धर्म
A A
akshaya tritiya
21
SHARES
687
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि, जिसे हम अक्षय तृतीया या ‘आखा तीज’ के नाम से जानते हैं, हिंदू धर्म में सौभाग्य और अटूट फल देने वाली तिथि मानी जाती है। ‘अक्षय’ का अर्थ ही है जिसका कभी ‘क्षय’ यानी विनाश न हो। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए दान, पुण्य और पूजा का फल अनंत काल तक बना रहता है।

इस बार अक्षय तृतीया 19 अप्रैल 2026 को पड़ रही है। ये दिन सिर्फ सोना खरीदने के लिए खास दिन नहीं होता बल्कि इस दिन को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित है। क्या आप जानते हैं कि इस दिन कौन से भगवान की पूजा की जाती है और क्या है इसके पीछे की रोचक पौराणिक कथाएं? आइए आज जानते हैं 5 मुख्य कथाएं और इस दिन का महत्व।

इन्हें भी पढ़े

belpatra

एकादशी के दिन बेलपत्र तोड़ना चाहिए या नहीं? जानिए शास्त्रीय नियम

August 22, 2026
shivling

सावन के आखिरी सोमवार पर बन रहा महासंयोग! 5 दुर्लभ योगों में करें भोलेनाथ का जलाभिषेक

August 21, 2026
Rashifal

मंगलवार को चमकेगी इन 5 राशियों की किस्मत, बंपर धन लाभ के बन रहे योग!

August 17, 2026
Jhandewala Devi Temple

सावन के तीसरे सोमवार झण्डेवाला देवी मंदिर में उमड़ी भीड़, श्रद्धालुओं ने किया रुद्राभिषेक

August 17, 2026
Load More

अक्षय तृतीया पर कौन से भगवान की पूजा की जाती है?

अक्षय तृतीया का पावन पर्व मुख्य रूप से जगत के पालनहार भगवान विष्णु और धन की देवी माता लक्ष्मी की आराधना को समर्पित है। चूंकि ‘अक्षय’ का अर्थ कभी समाप्त न होने वाला सौभाग्य है, इसलिए इस दिन सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए लक्ष्मी-नारायण की संयुक्त पूजा का विधान है।

इनके अतिरिक्त, यह दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है, इसलिए उनकी भी विशेष पूजा की जाती है। साथ ही, धन के देवता कुबेर देव और अन्न की अधिष्ठात्री देवी मां अन्नपूर्णा का पूजन भी इस तिथि पर अत्यंत फलदायी माना जाता है, क्योंकि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन कुबेर को अक्षय कोष प्राप्त हुआ था और माँ अन्नपूर्णा का प्राकट्य हुआ था।

श्री कृष्ण और सुदामा के प्रेम की अनमोल कथा

अक्षय तृतीया की सबसे भावुक कथा भगवान कृष्ण और उनके बाल-सखा सुदामा की है। सुदामा अत्यंत दरिद्र थे और अपनी पत्नी के कहने पर कुछ मदद की उम्मीद में द्वारका पहुंचे। भेंट के रूप में उनके पास केवल एक मुट्ठी फटे हुए कपड़े में बंधे ‘तंदुल’ (कच्चे चावल) थे। जब सुदामा महल पहुंचे, तो द्वारकाधीश ने नंगे पैर दौड़कर उनका स्वागत किया। सुदामा अपनी पोटली छिपा रहे थे, लेकिन कृष्ण ने उसे छीन लिया और बड़े चाव से वह चावल खाए।

सुदामा ने संकोचवश कुछ नहीं मांगा और वापस लौट आए। लेकिन जब वे अपने गांव पहुंचे, तो देखा कि उनकी टूटी झोपड़ी की जगह एक भव्य महल खड़ा था और उनकी पत्नी राजसी ठाठ-बाट में थी। अक्षय तृतीया के दिन श्री कृष्ण द्वारा दिए गए उस फल का कभी क्षय नहीं हुआ, इसलिए इसे अटूट मित्रता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

द्रौपदी और अक्षय पात्र का वरदान

महाभारत काल में जब पांडव वनवास काट रहे थे, तब उनके पास भोजन का अभाव रहता था। वे अक्सर संतों और ऋषियों की सेवा करते थे, लेकिन उनके सत्कार के लिए पर्याप्त भोजन नहीं हो पाता था। द्रौपदी को इस बात का बहुत दुःख रहता था। द्रौपदी की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान सूर्य (कुछ कथाओं में श्री कृष्ण) ने उन्हें एक ‘अक्षय पात्र’ प्रदान किया।

इस पात्र की विशेषता यह थी कि जब तक द्रौपदी स्वयं भोजन नहीं कर लेती थीं, तब तक इसमें से भोजन कभी समाप्त नहीं होता था। इससे पांडव हजारों ऋषियों को भोजन कराने में समर्थ हुए। अक्षय तृतीया के दिन ही यह पात्र पांडवों को प्राप्त हुआ था, जो इस बात का प्रतीक है कि इस दिन किया गया दान कभी कम नहीं होता।

भगीरथ की तपस्या और गंगा का अवतरण

हिंदू धर्म में गंगा को मोक्षदायिनी माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा सगर के 60 हजार पुत्रों के उद्धार के लिए उनके वंशज भगीरथ ने कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने गंगा को धरती पर भेजने का वरदान दिया। लेकिन गंगा का वेग इतना तीव्र था कि वह पृथ्वी को रसातल में ले जा सकता था। तब भगवान शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को धारण किया। जिस दिन मां गंगा शिव की जटाओं से निकलकर धरती पर अवतरित हुईं, वह वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया (अक्षय तृतीया) का ही दिन था। इसीलिए इस दिन गंगा स्नान का महत्व अक्षय पुण्य देने वाला माना जाता है।

भगवान परशुराम का जन्मोत्सव

अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी का जन्म हुआ था। वे ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र थे। परशुराम जी को ‘चिरंजीवी’ माना जाता है, जिसका अर्थ है कि वे अमर हैं और आज भी पृथ्वी पर मौजूद हैं। उन्होंने पृथ्वी को अधर्मी और अत्याचारी राजाओं से मुक्त कराने के लिए शस्त्र उठाया था। अक्षय तृतीया पर उनके जन्म की कथा हमें यह सिखाती है कि शक्ति और ज्ञान का संगम ‘अक्षय’ होता है। इस दिन परशुराम जी की पूजा करने से साहस और बुद्धि की प्राप्ति होती है।

वेद व्यास और गणेश जी द्वारा महाभारत का लेखन

एक अन्य महत्वपूर्ण कथा के अनुसार, इसी पावन तिथि पर ज्ञान के भंडार महर्षि वेद व्यास ने ‘महाभारत’ महाकाव्य की रचना का विचार किया था। उन्होंने भगवान गणेश से इसे लिखने की प्रार्थना की।भगवान गणेश ने शर्त रखी कि लिखते समय व्यास जी की लेखनी रुकनी नहीं चाहिए। व्यास जी ने भी शर्त रखी कि गणेश जी हर श्लोक को समझकर ही लिखेंगे। ज्ञान और बुद्धि के इस अद्भुत संगम का आरंभ अक्षय तृतीया को हुआ था। इसीलिए इस दिन को विद्यारंभ, नए व्यापार की शुरुआत और किसी भी नए ज्ञान को सीखने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

अक्षय तृतीया से जुड़ी अन्य संक्षिप्त मान्यताएं

कुबेर को मिला खजाना: इसी दिन महादेव की तपस्या के बाद कुबेर को धन का स्वामी और देवताओं का कोषाध्यक्ष बनाया गया था।

बद्रीनाथ धाम: हिमालय की वादियों में स्थित भगवान बद्री विशाल के कपाट इसी दिन खुलते हैं और उनके विग्रह के चरणों के दर्शन केवल इसी दिन होते हैं।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
Allahabad High Court

सात फेरों के बिना हिन्दू विवाह वैध नहीं : इलाहबाद हाई कोर्ट

October 5, 2023
Missile

भारत-पाकिस्तान के पास ख़तरनाक मिसाइल पावर में कौन कितना पावरफुल?

April 25, 2025
CM Yogi

योगी सरकार ने पहले नक्सलवाद पर कसी नकेल, अब उद्योग धंधे से बन रही चंदौली की नई पहचान

February 28, 2024
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • दिल्लीवालों को सस्ती बिजली पाने को हर साल कराना होगा रजिस्ट्रेशन! चूके तो बंद होगी सुविधा
  • 19वीं सदी के बाद सबसे ताकतवर अल-नीनो, 2026-27 में टूटेंगे तापमान के रिकॉर्ड
  • FD जैसी पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में लगाएं पैसा, मिलेगा तगड़ा मुनाफा!

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.