नई दिल्ली। अमेरिका ने कहा है कि वो रूस और ईरान से तेल खरीदने पर दी गई छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा. मतलब जिन देशों को अब तक इस छूट की वजह से तेल खरीदने में राहत मिलती थी, वो अब ख़त्म हो गई है. भारत इस छूट का अहम लाभार्थी रहा है. पश्चिम एशिया में जंग के दौरान अमेरिका ने 30 दिन के लिए प्रतिबंधों में छूट दी थी, जो 11 अप्रैल को समाप्त हो चुकी है.
अमेरिका ने ईरानी तेल और यूक्रेन युद्ध की वजह से रूस के तेल पर प्रतिबंध लगाए थे. इन्हीं प्रतिबंधों में छूट देने की बात कही गई थी जिसकी डेडलाइन अब ख़त्म हो गई है. 15 अप्रैल को वहां के ट्रेज़री सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा,
अमेरिका ने भारत को भी दी थी छूट
ईरान जंग में स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज बंद होने के बाद तेल और गैस की सप्लाई में कमी आ गई थी. जिसकी वजह से ग्लोबल मार्केट में तेल और गैस के दाम बढ़ गए थे. तब अमेरिका ने ईरानी और रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों में राहत दी थी. ये छूट ग्लोबल एनर्जी मार्केट में बढ़ते दामों को कम करने के लिए दी गई थी. 11 मार्च को रूसी क्रूड ऑयल और 20 मार्च को ईरानी क्रूड ऑयल पर छूट का ऐलान किया गया था. रूसी तेल पर छूट की डेडलाइन ख़त्म हो गई है. वहीं ईरान को 140 मिलियन बैरल तेल बेचने पर राहत दी गई थी. इसकी डेडलाइन 19 अप्रैल को ख़त्म हो जाएगी.
ट्रंप प्रशासन ने इसे ‘इकोनॉमिक फ्यूरी’ (Economic Fury) बताया है. उनका कहना है कि ये ईरान पर प्रेशर बनाने के लिए किया जा रहा है, ताकि वो अमेरिका से डील कर ले. एक पोस्ट में बताया गया कि जो भी वित्तीय संस्थान ईरान की मदद करेंगे उनपर सेकेंडरी सैंक्शन भी लगाए जा सकते हैं. तेल पर तो पहले से ही सैंक्शन लगे हैं.
छूट से भारत को कितना फायदा हुआ?
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक़, इस दौरान भारत ने रूस से 30 मिलियन बैरल रूसी तेल का आर्डर प्लेस किया था. रिलायंस जैसी कंपनियों ने सैंक्शन लगने के बाद रूस से तेल खरीदना कम कर दिया था. लेकिन छूट मिलते ही उसने रूस से दोबारा तेल खरीदना शुरू कर दिया था. पिछले महीने ईरान के भी दो सुपरटैंकर भारत पहुंचे







