नई दिल्ली। जियो हॉटस्टार पर आई फिल्म संभवम अध्यायम ओन्नु के चर्चे हो रहे हैं। इस फिल्म को देखने वाले लोग बस हैरान हैं। कोई ऐसी कहानी कैसे सोच सकता है। जंगल में शूट हुई इस फिल्म का हर एक सीन असली लगता है। जानिए क्या है इसकी कहानी और कितनी मिली है IMDB पर रेटिंग।
टाइम लूप पर कई फिल्में बनी हैं। लेकिन हाल में जियो हॉटस्टार पर आई मलयालम फिल्म संभवम अध्यायम ओन्नु उन चुनिंदा फिल्मों में शामिल हो गई है जो अपनी अनोखी कहानी और कांसेप्ट की वजह से चर्चाओं में बनी है। ये एक ऐसी फिल्म है जिसके चर्चे सोशल मीडिया पर खूब हो रहे हैं। मलयालम सिनेमा नई सोच के मामले में दूसरी फिल्म इंडस्ट्री से काफी तेजी से आगे निकल रहा है। अब मलयालम सिनेमा में संभवन अध्यायम ओनू नाम की शानदार फिल्म दी है जो पलक तक झपकने का मौका नहीं देती। संस्पेंस, थ्रिलर से भरी फिल्म IMDb पर 7।4 की शानदार रेटिंग मिली हुई है। लेकिन आखिरी इस फिल्म की कहानी क्या है?
30 साल से टाइम लूप में फंसे हैं लोग
संभवम अध्यायम ओन्नु एक अनोखे जंगल की कहानी है। इस फिल्म फिल्म के जंगल में जाने वाले लोग अचानक गायब हो जाते हैं। वो वापस नहीं आते, लेकिन फिर कुछ पुलिस वालों को समझ आता है कि इस जगंल में फंसे कुछ लोग मदद मांग रहे हैं। हैरान तब होती है जब ये लोग टाइम लूप में फंस गए हैं और 30 साल पहले के समय में अटके हुए हैं। फिल्म की कहानी एक इंस्पेक्टर पर बेस्ड है जो एक केस सुलझाता है। इसी दौरान इसे एक सस्पेंस से भरे जंगल की जानकारी मिलती है। इंस्पेक्टर को पता चलता है कि जंगल में जाने वाले लोग लौट कर नहीं आए।
जंगल का रहस्य हैरान करता है
फिल्म में कई सीन अलग-अलग कहानी को बताते हैं। लेकिन कहानी आगे बढ़ते हुए समझ आएगा कि ये सभी सीन आपस में जुड़े हुए हैं। जैसे कहानी की शुरुआत में एक औरत को दो लाशों के साथ देखा जाता है। अगले सीन में एक जगल का सीन है। इस सीन में कीचड़ में से एक शख्स का हाथ बाहर आता है और उसे फिर गोली लग जाती है। इसके बाद एक सीन हॉस्पिटल का है। यहां एक आदमी गहरी सोच में डूबा अपनी प्रेग्नेंट पत्नी के टेस्ट के लिए आया हुआ है। इसके बाद इसका ट्रांसफर हो जाता है और इसी दौरान उसका बच्चा भी हो जाता है जो एक महीने बाद होना होता है।
30 साल पहले जंगल में फंसा था शख्स
इसी दौरान पीटर नाम का एक पुलिस वाला आनंद की गाड़ी के आगे मिलता है। इसी पीटर के पास वायरलेस हैंडसेट भी मिलता है। कहानी में कई किरदार लगातार नजर आते हैं। कहानी थोड़ी-थोड़ी देर में लूप में चली चली जाती है। वायरलेस हैंडसेट पर एक पुलिस वाला खुद को बचाने की बात कहता है। इस पुलिस वाले को बचाने के लिए आनंद अपने साथी पुलिस वालों के साथ जंगल के अंदर जाता है। उसी लोकेशन पर पहुंचा जाता है जहां पुलिस वाले ने बताया था।
बाद में पता चलता है जिस शख्स से बात हो रही थी वो 30 पहले इस जंगल में आया था। और वायरलेस पर खुद को बचाने के लिए मदद मांग रहा है। लेकिन उसी लोकेशन पर अब एक कंकाल है। तो ये कैसे मुमकिन है जो शख्स बात कर रहा है उसी का कंकाल जंगल में मौजूद है। इसके आलावा कीचड में फंसा वही शख्स होता है जिसकी बीवी के बच्चा हुआ था। हालांकि, ये गलती से मर जाता है।
खून की हर बूंद से होता है ये सब
कहानी में आगे पता चलता है कि इस जंगल में जैसे ही किसी का खून गिरता है तो सब कुछ पुराने टाइम में चला जाता है। इसी वजह से लोग 30 साल पहले से फंसे हुए हैं। जो शख्स वायरलेस पर मदद मांग रहा था वो कोई और नहीं बल्कि आनंद का पिता था जो 30 साल पहले गायब हो गया था। अंत में इस जंगल के रहस्य से पर्दा उठता है। ये एक पुर्तगाली शासक से जुड़ा हुआ है। आनंद और उसकी टीम इस टाइम लूप को रोकने के लिए जो कदम उठाते हैं वो देखना शानदार है।







