नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने चंबल अभयारण्य क्षेत्र में हो रहे अवैध रेत खनन और वन रक्षक हरकेश गुर्जर की हत्या पर सख्त नाराजगी जताई है। सर्वोच्च अदालत ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और यूपी की सरकारों को फटकार लगाते हुए चंबल क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन को पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बताया।
अदालत ने आदेश दिया है कि खनन क्षेत्रों में हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और वरिष्ठ अधिकारी इनकी सीधी निगरानी करें। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि खनन नहीं रुका तो वहां केंद्रीय बलों की तैनाती करा देंगे। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और यूपी सरकारों को 11 मई तक रिपोर्ट देने को कहा है।
हरकेश गुर्जर की हत्या के मामले में कड़ा रुख
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के मुरैना जिले स्थित राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध रेत खनन और वन रक्षक हरकेश गुर्जर की हत्या के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकारों को फटकार लगाई है।
हाई-रिजॉल्यूशन CCTV कैमरे लगाने के निर्देश
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने 17 अप्रैल को हुई सुनवाई में अवैध रेत खनन को पर्यावरण संकट बताते हुए इसे तत्काल रोकने के निर्देश दिए। सुप्रीम कोर्ट ने खनन मार्गों पर हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे लगाने और उनकी निगरानी जिला स्तर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं प्रभागीय वन अधिकारी की ओर से सुनिश्चित करने को कहा है।
…तो केंद्रीय बलों की करा देंगे तैनाती, SC की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि अवैध खनन पर रोक नहीं लगाई गई तो केंद्रीय बलों की तैनाती कराई जा सकती है। यही नहीं खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध जैसे कड़े आदेश जारी किए जा सकते हैं।
सर्वोच्च अदालत ने 8 अप्रैल को वन रक्षक हरकेश गुर्जर की कथित तौर पर रेत माफिया द्वारा चलकर हत्या को प्रशासनिक विफलता करार दिया। सर्वोच्च अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए।
SC के सख्त रुख के बीच, बढ़ी निगरानी
सुप्रीम कोर्ट की ओर से मामले में सुनवाई किए जाने और सख्त रुख अपनाने के बीच मुरैना जिला प्रशासन ने संयुक्त टास्क फोर्स गठित कर वन, खनिज और राजस्व विभाग के साथ चंबल क्षेत्र में अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर निगरानी बढ़ा दी है। रेत उत्खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया है।
मध्य प्रदेश, राजस्थान और यूपी सरकार से मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित मध्य प्रदेश, राजस्थान और यूपी सरकार को 11 मई तक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।







