नई दिल्ली। रूस ने मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच ईरान को मध्यस्थता में मदद करने की पेशकश की है. इस संबंध में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बातचीत की और यह प्रस्ताव रखा. लावरोव ने बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में चल रही जंग को बढ़ने से रोकना बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि युद्ध विराम को बनाए रखना चाहिए, ताकि हालात और खराब न हों और पूरा क्षेत्र बड़े टकराव की ओर न बढ़े.
ईरान की तरफ से रूस को यह भरोसा दिया गया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले रूसी जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी. ईरान ने कहा कि रूसी जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया जाएगा और उनकी आवाजाही में कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी. रूस और ईरान के बीच ऐसे समय पर बातचीत हुई है, जब पश्चिम एशिया में जंग लगातार बढ़ रही है और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर दुनिया भर में चिंता बनी हुई है.
ईरान को कैसे मदद कर रहा है रूस?
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे 2026 के युद्ध में रूस सीधे तौर पर शामिल नहीं है, लेकिन वह पर्दे के पीछे से ईरान की मदद कर रहा है. रूस की भूमिका एक रणनीतिक सहयोगी की तरह सामने आ रही है, जहां वह खुफिया जानकारी, सामान की मदद और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन दे रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों और जहाजों की जानकारी दे रहा है.
इसमें सैटेलाइट के जरिए मिलने वाली ताजा जानकारी भी शामिल बताई जा रही है. इससे ईरान को अपनी रणनीति बनाने और जवाबी कार्रवाई करने में मदद मिल रही है. इसके अलावा रूस ईरान को ड्रोन और अन्य जरूरी सैन्य सामान भी उपलब्ध करा रहा है. राजनयिक स्तर पर भी रूस ईरान के साथ खड़ा दिख रहा है. उसने चीन के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका के खिलाफ माहौल बनाया है. रूस ने ईरान के खिलाफ किसी भी सख्त प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया और कई मामलों में दूरी बनाए रखी.







