नई दिल्ली। वैश्विक तनाव के केंद्र में खड़ा ईरान और अमेरिका का संघर्ष एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता को लेकर उम्मीदें और आशंकाएं दोनों बराबर हैं. युद्धविराम की मियाद खत्म होने के करीब है और ऐसे में दुनिया की निगाहें पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहां कूटनीति का अगला दौर शुरू होने जा रहा है. क्या इस बार शांति का रास्ता निकलेगा या टकराव फिर से बढ़ेगा? यह सब इस उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल की बैठकों पर निर्भर है. आइए जानें कि इस बार दोनों देश से शांति की वार्ता करने के लिए कौन-कौन आ रहा है.
अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल?
अमेरिका इस वार्ता को लेकर कितना गंभीर है, इसका अंदाजा उसके द्वारा भेजे जा रहे प्रतिनिधिमंडल से लगाया जा सकता है. व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि इस अमेरिकी दल का नेतृत्व खुद उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे. उनके साथ इस महत्वपूर्ण मिशन में मिडिल ईस्ट के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेयर्ड कुश्नर भी शामिल होंगे. इतना बड़ा और हाई-प्रोफाइल दल यह दर्शाता है कि वॉशिंगटन इस बातचीत से एक ठोस नतीजा चाहता है. इस्लामाबाद ने भी इन मेहमानों के स्वागत के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए हैं.
ईरान ओर से कौन-कौन होगा शामिल?
ईरान की ओर से अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है. हालांकि रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर कालिबाफ वार्ता का नेतृत्व कर सकते हैं, लेकिन उनकी उपस्थिति कुछ शर्तों पर टिकी है. ईरान लगातार यह रुख अपनाए हुए है कि वह धमकियों के साए में बातचीत नहीं करेगा. तेहरान ने साफ किया है कि जब तक डोनाल्ड ट्रंप का रुख नरम नहीं होता, तब तक कूटनीतिक जीत की राह कठिन है. ईरानी सरकार के सूत्रों का कहना है कि अभी तक कोई भी दल इस्लामाबाद नहीं भेजा गया है.
क्या ट्रम्प खुद राउंड 2 की बातचीत में जुड़ेंगे?
इस वार्ता का सबसे बड़ा सरप्राइज डोनाल्ड ट्रंप की भागीदारी हो सकती है. ऐसी खबरें हैं कि यदि इस्लामाबाद में शांति समझौते की स्थिति बनती है, तो ट्रंप खुद भी इस बातचीत का हिस्सा बन सकते हैं. यह अभी तय नहीं है कि वे व्यक्तिगत रूप से इस्लामाबाद आएंगे या ऑनलाइन माध्यम से जुड़ेंगे. अगर ट्रंप सीधे जुड़ते हैं, तो यह कूटनीति के लिहाज से एक बड़ा घटनाक्रम होगा. हालांकि, ईरान ने भी अब इस्लामाबाद आने के लिए संकेत दिए हैं, जिससे बुधवार को बातचीत की संभावना बढ़ गई है.
युद्धविराम की मियाद का भी दवाब
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा दो हफ्ते का युद्धविराम बुधवार को समाप्त होने जा रहा है. डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि इसे आगे बढ़ाया जाना बहुत मुश्किल है. यही कारण है कि बुधवार की वार्ता अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है. यदि इस दिन कोई ठोस सहमति नहीं बनती, तो क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में पड़ सकती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान लड़ाई से बचना चाहता है, लेकिन वह अपनी मजबूती को लेकर भी आश्वस्त है, जो बातचीत को पेचीदा बनाता है.
पिछली वार्ता की कड़वी यादें बरकरार
इस्लामाबाद में पहले भी वार्ता हुई थी, लेकिन वह विफल रही. दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर सीजफायर तोड़ने के गंभीर आरोप लगाए थे, जिससे विश्वास की खाई और गहरी हो गई. इस बार अमेरिकी सैन्य विमानों की पाकिस्तान में मौजूदगी और सुरक्षा घेरा यह दिखाता है कि दोनों देशों की सेनाएं कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहतीं हैं. फिर भी रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान के सरकारी टीवी IRIB का यह कहना कि अभी तक कोई तकनीकी दल नहीं भेजा गया है, कूटनीतिक शतरंज की एक चाल हो सकती है, जिससे दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है.







