नई दिल्ली : अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ता को लेकर अभी-भी सस्पेंस बरकरार है, जहां एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप एक ओर ईरान के साथ परमाणु समझौते को लेकर बातचीत पर जोर दे रहे हैं तो दूसरी ओर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पोस्ट कर उसे स्ट्रेट ऑफ ट्रंप बता रहे हैं. साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ईरान को चेतावनी दी है.
उन्होंने कहा कि तूफान आने वाला है जो आने वाला है उसे कोई नहीं रोक सकता. ट्रंप के इस पोस्ट के बाद वैश्विक स्तर पर हलचल मच गई है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए 30 अप्रैल का दिन बेहद अहम होने वाला है. व्हाइट हाउस में आज ट्रंप अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के साथ उस फॉर्मूले पर मंथन करेंगे जो ईरान जंग के चैप्टर को क्लोज कर सकता है.
सेंटकॉम ने बनाया हमले का प्लान
सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान पर छोटे और घातक हमले का प्लान तैयार कर लिया है और उसे ट्रंप की मंजूरी का इंतजार है. इस प्लान में ईरान की बची-कुची सैन्य ताकत को खत्म करना, इस्फ़हान से संवर्धित यूरेनियम निकालना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पूरी तरह कब्जा कर आवाजाही सामान्य करना शामिल है. हालांकि, ट्रंप का दावा है कि उनकी ईरान से सीधी फोन पर बातचीत हो रही है, लेकिन परमाणु हथियार न बनाने की शर्त पर वो अब भी अडिग हैं.
नाकाबंदी जारी का ऐलान
उधर, ट्रंप के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी जारी रहने के ऐलान के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है. कच्चे तेल की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं. सीजफायर के बावजूद लेबनान और इजरायल के बीच भी तनाव बढ़ता दिख रहा है. हिज्बुल्लाह और इजरायली फोर्स के बीच हमले पहले ही शुरू हो गए हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज को ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ करार देते हुए वहां 100% अचूक नाकाबंदी का दावा किया है. अमेरिकी नौसेना ने वहां 2 वॉरशिप्स, 25 युद्धपोत और 200 से अधिक विमान तैनात किए हैं, जिन्होंने अब तक 42 जहाजों को रास्ता बदलने पर मजबूर कर दिया है. ट्रंप का कहना है कि उन्होंने ईरान की वायु सेना, नौसेना और रडार तंत्र का 80% हिस्सा तबाह कर दिया है. इस बीच खबर है कि 10 महीने से तैनात अमेरिकी युद्धपोत ‘USS Gerald R. Ford’ मरम्मत के लिए वापस लौट सकता है, जिससे खाड़ी में अमेरिकी सैन्य शक्ति पर असर पड़ सकता है.
ईरान ने भी दी चेतावनी
वहीं, अमेरिका लगातार ईरान को तबाह करने की धमकी दे रहा है. पर ईरान है कि मानता नहीं, इस्लामाबाद की टेबल पर मुनीर-शहबाज की जोड़ी ने न जाने ऐसी क्या दगाबाजी कर दी कि न तो ईरान इस्लामाबाद पहुंचा और न अब ट्रंप के दूत इस्लामाबाद का रुख करना चाहते हैं.
इधर, ईरान के विदेश मंत्री ने ओमान से लेकर पाकिस्तान और पाकिस्तान से लेकर पुतिन तक से मुलाकात कर ली, लेकिन अमेरिका से बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है, क्योंकि ट्रंप को ईरानी शर्तें मंजूर नहीं. ऊपर से ईरान इस मुगालते में है कि उसने अमेरिका को होर्मुज के जाल में फंसा लिया है.
ईरान ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए इसे एक ‘जाल’ बताया है. ईरान के सुप्रीम लीडर के सैन्य सलाहकार मोहसिन रेजई ने कहा कि ट्रंप और नेतन्याहू ने अमेरिकी सेना को फारस की खाड़ी के ‘बूचड़खाने’ में फंस गया है. ईरान अपनी सड़कों पर मिसाइलों और ‘शाहेद 136’ ड्रोन की झांकी निकालकर अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा है और किसी भी हमले का निर्णायक जवाब देने की चेतावनी दी है.
इजरायल-हिज्बुल्लाह भी आमने-सामने
ईरान संकट के बीच सीजफायर के बावजूद लेबनान और इजरायल सीमा पर भी हालात बिगड़ रहे हैं. हिज्बुल्लाह और इजरायली सेना के बीच ताजा हमले शुरू होने की खबरें हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में बड़े युद्ध का खतरा मंडरा रहा है.







