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72 साल पुराना कानून और नरवणे की किताब… आर्मी रूल-1954 में क्या है प्रावधान?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
February 13, 2026
in राष्ट्रीय, विशेष
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Naravane's book
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प्रकाश मेहरा 


नई दिल्ली(स्पेशल डेस्क) : पूर्व थलसेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब “Four Stars of Destiny” को रोके जाने के पीछे भारतीय सेना नियम, 1954 (Army Rules, 1954) का हवाला दिया जा रहा है। ये नियम भारतीय सेना अधिनियम, 1950 (Army Act, 1950) के तहत बनाए गए थे और 2026 में 72 वर्ष पुराने हो चुके हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, किताब में लद्दाख संकट, गलवान घाटी की घटनाएं, अग्निपथ योजना और सैन्य-राजनीतिक निर्णयों जैसे संवेदनशील विषयों का उल्लेख है, जिसके चलते रक्षा मंत्रालय से आवश्यक अनुमति (क्लीयरेंस) लंबित है।

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आर्मी रूल्स-1954 में क्या लिखा है ?

आर्मी रूल्स, 1954 के नियम 21 (Rule 21) में सेना से जुड़े व्यक्तियों द्वारा प्रकाशन और प्रेस से संवाद को लेकर स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। नियम के अनुसार “कोई भी व्यक्ति जो सेना अधिनियम के अधीन है, वह किसी राजनीतिक विषय, सेवा से जुड़े मामले, या सेवा संबंधी जानकारी से संबंधित कोई लेख, पुस्तक, दस्तावेज प्रकाशित नहीं कर सकता, और न ही प्रेस से संवाद कर सकता है, बिना केंद्र सरकार या उसके द्वारा अधिकृत अधिकारी की पूर्व अनुमति के। इसी प्रकार, ऐसे विषयों पर व्याख्यान या सार्वजनिक संबोधन देने के लिए भी पूर्व स्वीकृति आवश्यक है। ‘सेवा जानकारी’ या ‘सेवा विषय’ में संघ की सेनाओं, रक्षा या बाहरी संबंधों से संबंधित जानकारी शामिल मानी जाती है।

सेवानिवृत्त अधिकारियों पर क्या लागू होता है ?

हालांकि यह नियम मुख्य रूप से सेवारत अधिकारियों पर लागू होता है, लेकिन सेवानिवृत्त अधिकारियों पर भी प्रतिबंध पूरी तरह समाप्त नहीं होते। केंद्रीय सिविल सेवा नियम, 1972 (CCS Rules) में 2021 के बाद हुए संशोधनों के तहत संवेदनशील या सुरक्षा संबंधी जानकारी के प्रकाशन पर रोक है। पूर्व अधिकारियों को संबंधित मंत्रालय या संगठन से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम (Official Secrets Act) भी लागू हो सकता है।

नरवणे की किताब का विवाद

जनरल एम.एम. नरवणे 2019 से 2022 तक भारतीय सेना प्रमुख रहे। उनकी आत्मकथा “Four Stars of Destiny” में उनके सैन्य करियर के साथ-साथ 2020 के भारत-चीन लद्दाख सीमा विवाद, गलवान घाटी की घटनाएं, अग्निपथ योजना और रणनीतिक निर्णयों का जिक्र बताया गया है।

किताब 2024 में प्रकाशित होने वाली थी और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर प्री-ऑर्डर भी शुरू हो गए थे। लेकिन रक्षा मंत्रालय से मंजूरी न मिलने के कारण इसका प्रकाशन रोक दिया गया। प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने स्पष्ट किया है कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है और उसकी कोई प्रिंट या डिजिटल कॉपी आधिकारिक रूप से वितरित नहीं की गई।

सूत्रों के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच रक्षा मंत्रालय ने 35 पुस्तकों को मंजूरी दी। नरवणे की पुस्तक फिलहाल लंबित मामलों में शामिल बताई जा रही है।

संसद में उठा मामला

2026 में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद में इस किताब की एक हार्डकवर कॉपी दिखाते हुए कथित अंश पढ़े। उन्होंने दावा किया कि “अग्निवीर योजना की घोषणा से सेना आश्चर्यचकित थी और यह एक राजनीतिक निर्णय था। सरकार ने इस पर आपत्ति जताई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि “किताब प्रकाशित नहीं हुई है,” इसलिए उसे उद्धृत नहीं किया जा सकता।

एफआईआर और जांच

दिल्ली पुलिस ने कथित अनधिकृत प्रसार (सर्कुलेशन) को लेकर एफआईआर दर्ज की है। प्रकाशक ने भी कॉपीराइट उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई की बात कही है। स्वयं जनरल नरवणे ने भी कहा है कि पुस्तक अभी प्रकाशित नहीं हुई है।

यह पूरा प्रकरण सैन्य पारदर्शिता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संसदीय मर्यादा और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन के सवाल को सामने लाता है। किताब फिलहाल प्रकाशन की प्रतीक्षा में है और मामला जांच के अधीन है।

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