Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home दिल्ली

जज के ‘पॉलिटिकल कनेक्शन’ पर सवाल- अधिकार, अवमानना या रणनीति ?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
April 30, 2026
in दिल्ली, राजनीति
A A
court
25
SHARES
847
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

प्रकाश मेहरा
विशेष डेस्क


नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच के सामने पेश होने से इनकार कर एक बड़ा संवैधानिक और कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है। उनके इस कदम ने यह बहस तेज कर दी है कि क्या जजों के कथित ‘पॉलिटिकल कनेक्शन’ पर सवाल उठाना नागरिक अधिकार है या अदालत की अवमानना।

इन्हें भी पढ़े

ED

ED का बड़ा ऐक्शन, जालंधर से दिल्ली तक ताबड़तोड़ पढ़े छापे

September 22, 2026
rekha gupta

दिल्ली के इस 160 साल पुरानी इमारत का होगा कायाकल्प, दिखेगा विरासत और संस्कृति का मेल

September 22, 2026
CM Rekha Gupta

सीएम रेखा गुप्ता का ऐलान, साउथ रिज में 1000 एकड़ से बढ़ेगा ग्रीनरी का दायरा!

September 20, 2026
CM Dhami

बदरीनाथ में सीएम धामी, देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव में शामिल, चांचणी पर थिरके

September 20, 2026
Load More

क्या है पूरा मामला ?

27 अप्रैल को केजरीवाल ने साफ कहा— “मैं हाई कोर्ट में न खुद पेश होऊंगा और न ही कोई मेरी तरफ से दलील रखेगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि जस्टिस शर्मा के बच्चों का नाम केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में होने के कारण उन्हें निष्पक्ष न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने अपने इस फैसले को महात्मा गांधी के सत्याग्रह से प्रेरित बताया।

क्या अदालत के खिलाफ सत्याग्रह संभव है ?

इतिहास में महात्मा गांधी और बाल गंगाधर तिलक ने औपनिवेशिक शासन के खिलाफ अदालतों का विरोध किया था। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, कोई भी नागरिक अदालत के खिलाफ विरोध स्वरूप जेल जाने का विकल्प चुन सकता है, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालना और न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान पहुंचाना अनुचित माना जाता है।

पेश न होने का कितना जोखिम ?

27 फरवरी 2026 को CBI की विशेष अदालत से केजरीवाल सहित अन्य आरोपी बरी हो चुके हैं। अब हाई कोर्ट में अपील लंबित है, जहां उनकी गैरमौजूदगी में भी सुनवाई जारी रह सकती है। अदालत एमीकस क्यूरी (स्वतंत्र वकील) नियुक्त कर सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि “जानबूझकर पेश न होने की स्थिति में उन्हें “प्राकृतिक न्याय” के आधार पर ऊपरी अदालत से राहत मिलना मुश्किल हो सकता है।

क्या यह अवमानना है ?

जस्टिस शर्मा के पूर्व आदेश के अनुसार, केजरीवाल के बयान अदालत की अवमानना के दायरे में आ सकते हैं। उनका मानना है कि “आरोप केवल एक जज नहीं बल्कि पूरी न्यायिक संस्था की छवि को प्रभावित करते हैं। जज की योग्यता का आकलन राजनीतिक आधार पर नहीं किया जा सकता। हालांकि, ऐसे मामलों में अक्सर अदालतें नेताओं के खिलाफ अवमानना कार्रवाई से बचती भी रही हैं—जैसे हाल में निशिकांत दुबे के बयान पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

जजों के रिक्यूजल (स्वयं को अलग करना) के नियम

स्पष्ट लिखित कानून नहीं, लेकिन परंपरा और नैतिकता पर आधारित व्यवस्था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है—“न्याय सिर्फ होना ही नहीं, दिखना भी चाहिए” हितों के टकराव की स्थिति में जज खुद को अलग कर सकते हैं। कई मामलों में जजों ने स्वेच्छा से खुद को सुनवाई से अलग किया है।

क्या पहले भी उठे हैं ऐसे सवाल ?

न्यायपालिका और राजनीति के संबंधों पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। कई जज राजनीति से आए या रिटायरमेंट के बाद राजनीति में गए। 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने NJAC कानून रद्द कर कॉलेजियम प्रणाली बरकरार रखी। इसके बावजूद नियुक्तियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर बहस जारी है।

नैतिकता बनाम अधिकार

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है “जजों के परिवारजनों का वकील होना अधिकार के दायरे में है। लेकिन उसी सिस्टम में उनकी नियुक्ति “हितों का टकराव” पैदा कर सकती है। ऐसे मामलों में नैतिकता के उच्च मानदंड अपनाना न्यायपालिका की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक माना जाता है।

अगली सुनवाई 4 मई को

मामले की अगली सुनवाई 4 मई को निर्धारित है। कोर्ट केजरीवाल को नोटिस या समन जारी कर सकती है। रोस्टर बदलने के बाद मामला किसी अन्य बेंच में भी जा सकता है। केजरीवाल का यह कदम कानूनी से ज्यादा राजनीतिक और नैतिक बहस का विषय बन गया है। एक तरफ यह नागरिक अधिकार और निष्पक्ष ट्रायल की मांग के रूप में देखा जा रहा है, तो दूसरी ओर न्यायपालिका की गरिमा और प्रक्रिया को चुनौती के रूप में। अब सबकी नजर अदालत के अगले कदम और इस संवेदनशील मुद्दे पर न्यायिक रुख पर टिकी है।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
WCL

कोल इंडिया स्थापना दिवस पर वेकोलि को दस पुरस्कारों से नवाजा गया

November 4, 2024
israel-iran war

वर्तमान वैश्विक नेतृत्व में विश्व कल्याण के भाव का अभाव है!

August 8, 2025
cm yogi

एआई और डेटा एनालिटिक्स का बढ़ाएं उपयोग, कर संग्रह व्यवस्था को मिलेगी मजबूती : सीएम योगी

May 3, 2025
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • ED का बड़ा ऐक्शन, जालंधर से दिल्ली तक ताबड़तोड़ पढ़े छापे
  • भारत पर ऐक्शन से पहले सोच लेना’, रूस से तेल खरीदारी पर US को किसने दिखाया आईना
  • दिल्ली के इस 160 साल पुरानी इमारत का होगा कायाकल्प, दिखेगा विरासत और संस्कृति का मेल

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.