नई दिल्ली। ईरान इस समय गंभीर आर्थिक और सैन्य दबाव का सामना कर रहा है. हॉर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी के आसपास अमेरिका की नौसैनिक घेराबंदी के कारण उसके तेल निर्यात पर बड़ा असर पड़ा है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्रवाई से ईरान को करीब 4.8 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है. इस बाधा ने पहले से कमजोर ईरानी अर्थव्यवस्था पर और दबाव बढ़ा दिया है और यह भी दिखाया है कि प्रतिबंधों से बचने के लिए गुप्त शिपमेंट और क्षेत्रीय समुद्री रणनीति पर उसकी निर्भरता अब कमजोर पड़ रही है.
13 अप्रैल से लागू घेराबंदी, कूटनीतिक कोशिशें नाकाम
रिपोर्ट्स के अनुसार, 13 अप्रैल को कूटनीतिक बातचीत विफल होने के बाद अमेरिका ने यह घेराबंदी लागू की. इसके चलते दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक से ईरान का तेल परिवहन काफी हद तक रुक गया है.
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस ऑपरेशन का मकसद आर्थिक दबाव बनाए रखना और ईरान की क्षेत्रीय गतिविधियों को फंड करने की क्षमता को कमजोर करना है. पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने प्रेस सचिव जोएल वाल्डेज के हवाले से कहा कि यह घेराबंदी “पूरी ताकत से लागू” है और ईरान के वित्तीय नेटवर्क पर “निर्णायक असर” डाल रही है.
ईरान के अंदर मतभेद बढ़े, बातचीत बनाम टकराव की बहस
इस आर्थिक दबाव का असर ईरान की आंतरिक राजनीति पर भी दिख रहा है. विश्लेषकों का कहना है कि सत्ता के भीतर कुछ गुट अमेरिका के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने के पक्ष में हैं, जबकि कुछ गुट तनाव कम करने के लिए फिर से बातचीत शुरू करना चाहते हैं.
घरेलू हालात बिगड़े, जरूरी सामानों की कमी
देश के अंदर भी हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं. रिपोर्ट्स में बताया गया है कि विदेशी मुद्रा की कमी हो रही है और जरूरी सामानों की राशनिंग तक करनी पड़ रही है, जिससे आम लोगों पर सीधा असर पड़ रहा है.
अमेरिका का सख्त रुख, ‘पूरा नियंत्रण’ का दावा
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने सख्त बयान देते हुए कहा कि अमेरिका का जलडमरूमध्य पर “पूरा नियंत्रण” है और यह घेराबंदी तब तक जारी रहेगी जब तक समुद्री रास्तों पर “सामान्य आवागमन” बहाल नहीं हो जाता. उनके इस बयान पर ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई, जिससे दोनों देशों के बीच बयानबाजी और ज्यादा आक्रामक हो गई है.
ईरान में हादसा, 14 रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की मौत
इसी बीच ईरान को एक बड़ा अंदरूनी झटका भी लगा है. उत्तर-पश्चिमी प्रांत जंजान में पुराने हमलों के दौरान बचे विस्फोटकों को निष्क्रिय करते समय इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के 14 सदस्य मारे गए. यह घटना दिखाती है कि संघर्ष का खतरा सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य इलाकों में भी जानलेवा स्थिति बनी हुई है.
क्षेत्रीय हालात तनावपूर्ण, बातचीत के संकेत भी
पूरे क्षेत्र में हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ सीधी लड़ाई फिलहाल खत्म हो गई है, लेकिन अमेरिका लगातार प्रतिबंध कड़े कर रहा है और सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है. वहीं, ईरान ने बातचीत के लिए तैयार होने का संकेत दिया है, लेकिन साफ कर दिया है कि वह किसी भी दबाव में आकर शर्तें स्वीकार नहीं करेगा.







