नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट से गुरुवार को कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा को बड़ा झटका लगा। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को हाई कोर्ट को बताया कि कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा ने अपने खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले का संज्ञान लेने वाले ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली अपनी याचिका में झूठे और गलत बयान दिए हैं। यह मामला गुरुग्राम में कुछ जमीन सौदों से जुड़ा है। ट्रायल कोर्ट ने 16 अप्रैल को इस मामले का संज्ञान लेते हुए वाड्रा को समन जारी किया था।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, ईडी की ओर से अधिवक्ता जोहेब हुसैन अदालत में पेश हुए और वाड्रा की उस दलील का विरोध किया, जिसमें कहा गया था कि जिन अपराधों का उन पर मूल मामले में आरोप लगाया गया है, उन्हें 2008 और 2012 के बीच कथित अपराध के घटित होने के बाद धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की अनुसूची में जोड़ा गया था। ईडी ने अदालत से कहा कि वाड्रा की यह दलील तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक है।
हुसैन ने कहा कि वाड्रा की इस याचिका पर हर्जाना भी लगना चाहिए। मैंने सभी तथ्यों को निकालकर जांच की है। पूरी तरह से झूठे दावे किए गए हैं। धारा 467 आईपीसी अपने मूल रूप में पीएमएलए अनुसूची में मौजूद थी। प्रथम दृष्टया, झूठे और गलत बयान दिए गए हैं। पूरी तरह से झूठे बयान।
इससे पहले, वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी वाड्रा की ओर से पेश हुए और कहा कि कथित अपराध होने के बाद इस मामले में आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कुछ अपराधों को पीएमएलए अनुसूची में जोड़ा गया था। उन्होंने कहा कि अधिकार क्षेत्र और पूर्वव्यापी प्रभाव से संबंधित ये मुद्दे निचली अदालत के समक्ष उठाए गए थे, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
ईडी की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस मनोज जैन ने मामले को 18 मई तक के लिए स्थगित कर दिया। हाई कोर्ट ने सिंघवी से कहा कि कृपया सोमवार (18 मई) को इस पहलू पर पूरी तैयारी के साथ आएं, क्योंकि यही आपका मुख्य मुद्दा है। हम सोमवार को आपकी बात सुनेंगे।
क्या है मामला?
यह मामला गुरुग्राम में 2008 में हुए एक भूमि लेनदेन से संबंधित है। जहां वाड्रा से जुड़ी एक कंपनी ने कथित तौर पर पंजीकरण के समय घोषित भुगतान किए बिना एक फर्जी बिक्री विलेख के माध्यम से 7.5 करोड़ रुपये में 3.5 एकड़ जमीन हासिल कर ली थी।
आरोप है कि यह जमीन रिश्वत के तौर पर दी गई थी ताकि वाड्रा तत्कालीन हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके उसी गांव में आवास लाइसेंस प्राप्त कर सके। लाइसेंस जारी होने के चार साल बाद, जमीन को डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। गुरुग्राम के वज़ीराबाद में लगभग 350 एकड़ जमीन भी कथित तौर पर गलत तरीके से डीएलएफ को आवंटित की गई थी, जिससे उसे लगभग 5,000 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ।







