नई दिल्ली: दिल्ली में इस मई का मिजाज कुछ अजीब रहा. भयानक गर्मी रही. दुनियाभर में चर्चा हुई. फिर लोग लू के थपेड़ों से बेहाल हुए. फिर दो दिन से हल्की बूंदाबांदी ने मौसम का रुख कुछ बदल दिया. बहुत भारी बारिश तो नहीं हुई मगर हल्की फुहार ने ही दिल्ली की दमघोंटू हवा को थोड़ा सा चमका दिया. हवा में इस सुधार के चलते शुक्रवार शाम को ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान GRAP वन के सभी प्रतिबंधों को हटाने का आदेश जारी कर दिया. मगर सवाल ये है कि इतनी कम बारिश में कैसे हवा साफ हो गई है. असली कारण क्या है.
पॉल्यूशन के आंकड़ों पर नजर डालिए
असल में 19 मई को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग CAQM को ग्रैप 1 लागू करना पड़ा था. अब पॉल्यूशन के आंकड़ों पर नजर डालिए. कुछ दिनों पहले तक दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक AQI 300 से 350 के बीच यानी ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच गया था. मगर इस मामूली बारिश और तेज हवाओं के चलते AQI का स्तर घटकर 100 से 150 के बीच यानी ‘मध्यम’ श्रेणी में आ गया. साइंस के नजरिए से देखें तो तेज गर्मी के कारण हवा में जो धूल के मोटे कण तैर रहे थे. उन्हें बारिश की बूंदों ने जमीन पर ला दिया.
पछुआ हवाओं का भी बड़ा हाथ
इतना ही नहीं इस दौरान पछुआ हवाओं का भी बड़ा हाथ है. मई में राजस्थान और पश्चिमी इलाकों से गर्म हवाएं धूल उड़ाकर दिल्ली ले आती हैं मगर जब इन हवाओं की दिशा बदलती है तो यही हवाएं प्रदूषण के कणों को शहर से बाहर धकेल देती हैं. इस बार ठीक यही हुआ और थोड़ी बारिश ने बाकी काम कर दिया. पिछले सालों से तुलना करें तो तस्वीर और साफ होती है. मई 2017 में दिल्ली का औसत AQI 266 था और कई बार 300 के पार भी गया. 2024 में यह 224 रहा था. इस लिहाज से 2026 का 156 का औसत AQI बेहतर है.
एक्सपर्ट्स का ये भी कहना है कि ग्रैप हटना राहत की शुरुआत है मगर अंत नहीं हैं. अगर हवाएं थमीं और मौसम फिर पलटा तो पाबंदियां वापस आ सकती हैं. यह सुधार अस्थाई भी हो सकता है. फिलहाल समीक्षा बैठक में जब अधिकारियों ने देखा कि प्रदूषण का स्तर लगातार सुरक्षित दायरे में बना हुआ है तो ग्रैप को हटाने का फैसला लिया गया.







