नई दिल्ली। छठी पीढ़ी लड़ाकू विमान बनाने के लिए फ्रांस और जर्मनी के बीच चल रही बातचीत टूट गई है। 8 जून को ‘फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम’ (FCAS) नेक्स्ट-जेनरेशन फाइटर प्रोग्राम के फेल होने की पुष्टि हो गई है। इस प्रोग्राम के तहत छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान बनाया जाना था। फ्रांस और जर्मनी के साथ इस प्रोग्राम में स्पेन भी था। जर्मनी के साथ बातचीत नाकाम होने के बाद अब फ्रांस ने अकेले ही राफेल के उत्तराधिकारी छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान को बनाने का फैसला किया है।
इसका एक अहम संकेत राफेल बनाने वाली फ्रांसीसी कंपनी ‘डसॉ एविएशन’ के CEO एरिक ट्रैपियर के बयानों से मिला है। उन्होंने कहा कि फ्रांस को मल्टीनेशनल यूरोपियन प्रोग्राम पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय भविष्य की पीढ़ी के कॉम्बैट एयरक्राफ्ट को खुद डिजाइन और प्रोड्यूस करने की क्षमता बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने बार-बार कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो फ्रांस के पास अकेले ही अगली पीढ़ी का फाइटर डेवलप करने की काबिलियत है।
फ्रांस अकेले बनाएगा छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान
एरिक ट्रैपियर ने मिराज सीरीज से लेकर अपने सबसे नए फाइटर राफेल तक एयरक्राफ्ट डिजाइन करने के देश के लगातार इतिहास का हवाला दिया। ट्रैपियर ने कहा कि फ्रांस ‘एक और पीढ़ी को स्वतंत्र रूप से डेवलप करने’ के विकल्पों पर विचार कर रहा है ताकि मौजूदा राफेल और यहां तक कि मुश्किलों में फंसे FCAS प्रोग्राम से आगे बढ़कर एक स्वतंत्र तकनीकी रास्ता अपनाया जा सके। आपको बता दें कि राफेल लड़ाकू विमान को भी फ्रांस ने अकेले ही बनाया है। वो पहले ब्रिटेन के साथ यूरोफाइटर प्रोजेक्ट में जुड़ा था लेकिन कई मुद्दों पर असहमति के बाद उसने अकेले ही राफेल बनाने का फैसला किया।
फ्रांस ने एयरफ्रेम और स्टील्थ डिजाइन, कॉम्बैट एवियोनिक्स और मिशन सिस्टम, अपने एयरबोर्न डेटरेंट (हवा से हमला करने की क्षमता) के लिए न्यूक्लियर स्ट्राइक सर्टिफिकेशन, फ्रेंच नेवी के भविष्य के एयरक्राफ्ट कैरियर से ऑपरेशन के लिए कम्पैटिबिलिटी और स्वदेशी हथियारों के साथ साथ लॉयल-विंगमैन ड्रोन के इंटीग्रेशन जैसे मामलों में काफी हद तक आजादी बनाए रखी है। दूसरे यूरोपीय देशों के उलट फ्रांस ने लंबे समय से एक ऐसा घरेलू एयरोस्पेस इंडस्ट्रियल बेस बनाए रखने की कोशिश की है जो विदेशी निर्भरता के बिना एडवांस्ड कॉम्बैट एयरक्राफ्ट डिज़ाइन और मैन्युफैक्चर कर सके।
यूरोफाइटर से पहले बना लिया राफेल
फ्रांस पहले यूरोफाइटर प्रोजेक्ट में था लेकिन इस प्रोजेक्ट से बाहर होने के बाद उसने पांच साल पहले ही राफेल बना लिया। ये फ्रांस की क्षमता को दिखाता है। यूरोफाइटर के मुकाबले भी राफेल को काफी बेहतर माना जाता है। यूरोफाइटर को यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी और इटली ने मिलकर बनाया था। राफेल की रेंज ज्यादा है, ऑपरेशनल लागत कम है और इसमें कहीं ज्यादा एडवांस्ड रडार लगा है। राफेल में फ्रांस ने 2001 में ही यानि यूरोफाइटर से 20 वर्ष पहले ही फेज़्ड ऐरे रडार इंटीग्रेट कर दिया था और 2013 में डवांस्ड ‘एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे रडार’ इंटीग्रेट कर लिया गया। जबकि उस समय यूरोफाइटर पुराने सेंसर सुइट के साथ ही बन रहा था।







