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ट्रंप प्रशासन के नए टैरिफ़ पर अमेरिका में बवाल, 25 राज्यों ने संघीय सरकार के खिलाफ़ दायर किया मुक़दमा

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 4, 2026
in विशेष, विश्व
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trump
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प्रकाश मेहरा
एक्जीक्यूटिव एडिटर


वॉशिंगटन: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नई व्यापार नीति को लेकर बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिका के 25 राज्यों ने संघीय सरकार के खिलाफ़ अदालत का दरवाज़ा खटखटाते हुए नए आयात शुल्क (टैरिफ़) को चुनौती दी है। राज्यों का आरोप है कि यह फैसला मनमाना, तर्कहीन और अमेरिकी कानून के विपरीत है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

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क्या है पूरा मामला ?

ट्रंप प्रशासन ने जुलाई 2026 में 60 व्यापारिक साझेदार देशों से अमेरिका आने वाले कुछ उत्पादों पर 10% से 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ़ लगाने की घोषणा की थी। इस निर्णय का असर ब्रिटेन, चीन, यूरोपीय संघ समेत कई प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों पर पड़ा है।

प्रशासन का दावा है कि इन देशों ने जबरन श्रम (Forced Labor) से तैयार उत्पादों के निर्यात पर प्रभावी रोक लगाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। इसी आधार पर अमेरिका ने आयात शुल्क बढ़ाने का निर्णय लिया।

राज्यों ने अदालत में क्या कहा ?

मुकदमा दायर करने वाले 25 राज्यों का कहना है कि संघीय सरकार ने बिना पर्याप्त कानूनी आधार और उचित प्रक्रिया अपनाए टैरिफ़ लागू कर दिए। राज्यों का आरोप है कि यह फैसला मनमाना और तर्कहीन है। अमेरिकी व्यापार कानूनों की भावना के खिलाफ़ है।उपभोक्ताओं और स्थानीय व्यवसायों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगा। अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों को नुकसान पहुंचा सकता है। राज्यों ने अदालत से इन टैरिफ़ को निरस्त करने और इनके क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग की है।

ट्रंप प्रशासन का पक्ष

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता Kush Desai ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि अमेरिका अपने कानूनी अधिकारों के तहत कार्रवाई कर रहा है। उनका कहना है कि जबरन श्रम से तैयार सामान अमेरिकी बाज़ार में पहुंचने से अमेरिकी उद्योगों और कंपनियों को नुकसान होता है, इसलिए ऐसे उत्पादों पर सख्ती आवश्यक है।

किस कानून के तहत लगाया गया टैरिफ़?

ट्रंप प्रशासन ने यह कार्रवाई 1974 के अमेरिकी ट्रेड एक्ट की धारा 301 (Section 301 of the Trade Act, 1974) के तहत की है। इस प्रावधान के अनुसार, यदि किसी देश की व्यापारिक गतिविधियाँ अमेरिकी हितों के विपरीत मानी जाती हैं या अनुचित व्यापारिक व्यवहार सामने आता है, तो अमेरिका उसके खिलाफ़ व्यापारिक प्रतिबंध या अतिरिक्त टैरिफ़ लगा सकता है।

कई देशों ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

अमेरिकी फैसले पर कई देशों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।European Union सहित प्रभावित देशों ने इस निर्णय पर चिंता जताई है। ब्राज़ील और जापान ने अमेरिकी कदम को “अनुचित” बताया है। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता Mao Ning ने इसे “राजनीतिक हेरफेर का बहाना” करार देते हुए अमेरिका के आरोपों को खारिज किया है।

वैश्विक व्यापार में नया तनाव !

अब इस मामले की सुनवाई अमेरिकी अदालत में होगी। यदि अदालत राज्यों की दलीलों को स्वीकार करती है, तो ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति को बड़ा झटका लग सकता है। वहीं, यदि सरकार का पक्ष मजबूत साबित होता है, तो ये टैरिफ़ प्रभावी बने रहेंगे और वैश्विक व्यापार में नया तनाव पैदा हो सकता है।

नज़र इस बात पर रहेगी कि अदालत इस विवाद पर क्या फैसला सुनाती है और इसका अमेरिका के साथ-साथ वैश्विक व्यापारिक संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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