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Home राष्ट्रीय

सितंबर तक मजूबत हो जाएगा El Nino, मानसून से लेकर इकॉनमी सबपर होगा असर!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
June 16, 2026
in राष्ट्रीय, विश्व
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el niño
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नई दिल्ली। प्रशांत महासागर में इस महीने की शुरुआत में एक्टिव हुआ अल नीनो मौसमीय प्रभाव सितंबर के अंत तक और मजबूत हो सकता है। हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कहा है कि इससे घबराने की जरूरत नहीं है। मौसम विभाग के मुताबिक, सरकार और संबंधित एजेंसियां पहले से ही जरूरी तैयारियां कर रही हैं।

IMD के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा (Dr. Mrutyunjay Mohapatra)  ने बताया कि जुलाई, अगस्त और सितंबर की शुरुआत तक मध्यम स्तर का अल नीनो रहने की आशंका है। जबकि सितंबर के अंत तक इसके मजबूत होने के संकेत हैं। यह स्थिति मानसून के बाद भी जारी रह सकती है।

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अल नीनो इफेक्ट

अल नीनो के कारण वैश्विक तापमान में वृद्धि होती है। साथ ही बारिश के पैटर्न में बदलाव आता है। भारत में इसका असर मानसून पर पड़ सकता है। इससे कृषि क्षेत्र प्रभावित होने की आशंका रहती है। हालांकि, डॉ. महापात्रा ने कहा कि समय रहते चेतावनी और तैयारी से इसके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

केंद्र सरकार ने भी एल नीनो के संभावित असर से निपटने के लिए राज्यों को विशेष निगरानी और त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कम बारिश वाले क्षेत्रों में बीज, जल संरक्षण, नमी प्रबंधन और वैकल्पिक फसल योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

घबराने की जरूरत नहीं!

मौसम विभाग के अलावा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कहा है कि घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि देश के जलाशयों में इस समय सामान्य से बेहतर जल भंडारण है, जिससे खरीफ फसलों को लाभ मिलेगा।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि एल नीनो का असर कृषि उत्पादन, खाद्य महंगाई और आर्थिक विकास दर पर पड़ सकता है। विशेष रूप से तिलहन, दालें, खाद्य तेल और कपास जैसी कम सिंचित फसलें अधिक प्रभावित हो सकती हैं।

इस राज्यों में कम बारिश की आशंका

IMD के अनुसार गुजरात, राजस्थान, मध्य भारत, ओडिशा, उत्तर आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। इन क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाएं अपेक्षाकृत कम होने के कारण बारिश की कमी का असर अधिक महसूस किया जा सकता है।

मौसम विभाग ने यह भी बताया कि नई टेक्नोलॉजी और आधुनिक पूर्वानुमान सिस्टम के कारण मौसम की भविष्यवाणी पहले की तुलना में काफी सटीक हुई है। 2021 से 2025 के दौरान दीर्घकालिक पूर्वानुमान की त्रुटि घटकर केवल 2.2 प्रतिशत रह गई है, जो पहले 7.5 प्रतिशत थी। IMD का कहना है कि सतर्कता और समय पर तैयारी के साथ अल नीनो की चुनौती का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।

वर्तमान स्थित

भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में फिलहाल अल नीनो की स्थितियां बनी हुई हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान इनके और मजबूत होने की संभावना है। मौसम विभाग ने कहा कि समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि पर वायुमंडल ने प्रतिक्रिया दी है। महासागर-वायुमंडल की जॉइंट सिस्टम अब अल नीनो स्थितियों के अनुरूप विशेषताएं दिखा रही है।

IMD ने कहा, “मानसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम’ (एमएमसीएफएस) के पूर्वानुमानों से संकेत मिलता है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान अल नीनो की स्थितियां और मजबूत होंगी।” इससे पहले अल नीनो की स्थितियां 2023 में विकसित हुई थीं।

ये स्थितियां 2000 के बाद 2002, 2009 और 2015 में भी बनी थीं। अल नीनो भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के असामान्य रूप से गर्म होने की स्थिति है, जिसका असर दुनिया के मौसम और भारत के मानसून पर पड़ सकता है।

अल नीनो क्या है?

अल नीनो एक जलवायु (Climate) घटना है। इसमें मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का सतही पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। यह ENSO (El Niño Southern Oscillation) चक्र का गर्म चरण है। आमतौर पर हर 2 से 7 साल के बीच अल नीनो विकसित हो सकता है। इसका प्रभाव लगभग 9–12 महीनों तक रह सकता है। इससे प्रशांत महासागर की व्यापारिक (Trade) हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे गर्म पानी पूर्वी प्रशांत की ओर फैल जाता है और समुद्र का तापमान बढ़ जाता है।

भारत पर प्रभाव से नुकसान

  • मानसून कमजोर पड़ सकता है।
  • वर्षा सामान्य से कम हो सकती है।
  • सूखे का खतरा बढ़ सकता है।
  • कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

दुनिया पर प्रभाव

  • वैश्विक तापमान बढ़ता है।
  • कहीं सूखा तो कहीं अत्यधिक वर्षा हो सकती है।
  • हीटवेव, जंगल की आग और मौसम की चरम घटनाएँ बढ़ सकती हैं।

ला नीना से ये कितना है अलग?

  • अल नीनो के दौरान समुद्र का पानी सामान्य से गर्म होता है।
  • ला नीना के दौरान समुद्र का पानी सामान्य से ठंडा रहता है।
  • ला नीना अक्सर भारत में बेहतर मानसून से जुड़ी होती है।

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