देहरादून : उत्तराखंड पर्यटन विभाग में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए देहरादून के जिला पर्यटन विकास अधिकारी बृजेन्द्र पांडे को भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. उन पर राज्य की महत्वाकांक्षी दीनदयाल उपाध्याय होमस्टे योजना में वित्तीय अनियमितता बरतने का आरोप है.
क्या है पूरा मामला?
जिला पर्यटन विकास अधिकारी बृजेन्द्र पांडे पर आरोप है कि उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय होमस्टे योजना के तहत आवेदकों को मिलने वाली अनुदान की धनराशि जारी करने में नियमों को ताक पर रखा. विभाग को शिकायतें मिली थीं कि अनुदान स्वीकृत करने और धनराशि को अवमुक्त करने की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार किया गया और आवेदकों से अनुचित लाभ लेने की कोशिश की गई. इन गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद शासन और विभाग ने मामले को संज्ञान में लिया.
मुख्य कार्यकारी अधिकारी करेंगे जांच
प्रशासन ने मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के आदेश जारी कर दिए हैं. इस पूरे प्रकरण की जांच की जिम्मेदारी उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नरेंद्र सिंह भंडारी को सौंपी गई है. जांच के दौरान भ्रष्टाचार से जुड़े सभी पहलुओं और दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इस अनियमितता में और कौन-कौन शामिल है.
निलंबन के बाद क्या होगी स्थिति?
निलंबन की अवधि के दौरान, नियम के अनुसार, बृजेन्द्र पांडे को जीवन निर्वहन भत्ता और अर्ध औसत वेतन देय होगा। साथ ही, उन्हें उनके मूल पद से हटाकर पर्यटन विकास मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है. निलंबन की पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें मुख्यालय की अनुमति के बिना अपना कार्यस्थल छोड़ने की अनुमति नहीं होगी.
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस
इस कार्रवाई ने पर्यटन विभाग के भीतर हड़कंप मचा दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक बिना किसी परेशानी के पहुंचे, यह सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने यह सख्त कदम उठाया है. दीनदयाल उपाध्याय होमस्टे योजना का उद्देश्य स्थानीय लोगों को स्वरोजगार से जोड़ना है, और इस तरह के भ्रष्टाचार से सरकारी योजनाओं की साख पर बुरा असर पड़ता है.







