प्रकाश मेहरा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई20) कार्यक्रम को लेकर प्रकाशित कुछ मीडिया रिपोर्टों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि यह योजना किसी भी प्रकार का “प्रयोग” (Experiment) नहीं है। सरकार ने कहा कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उसकी ओर से ऐसा कोई बयान या दलील प्रस्तुत नहीं की गई थी, जैसा कुछ समाचार माध्यमों में दावा किया गया।
भारत के अटॉर्नी जनरल कार्यालय द्वारा जारी लिखित बयान में कहा गया है कि “30 जून को कुछ मीडिया संस्थानों में ऐसी खबरें प्रकाशित हुईं, जिनमें यह दावा किया गया कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि ई20 कार्यक्रम अभी भी एक प्रयोग के चरण में है और इसके प्रभाव अगले वर्ष तक अधिक स्पष्ट हो पाएंगे।
अटॉर्नी जनरल कार्यालय ने इन खबरों को पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन बताते हुए कहा कि अदालत के समक्ष सरकार की ओर से ऐसी कोई दलील नहीं दी गई। बयान में स्पष्ट किया गया कि मीडिया रिपोर्टों में प्रस्तुत जानकारी वास्तविक न्यायालयीन कार्यवाही और सरकार के पक्ष से मेल नहीं खाती।
ई-20 कार्यक्रम पर सरकार का रुख
केंद्र सरकार ने दोहराया कि “ई20 कार्यक्रम एक सुविचारित राष्ट्रीय नीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल का मिश्रण सुनिश्चित करना है। यह कार्यक्रम लंबे समय से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है और इसके पीछे व्यापक तकनीकी अध्ययन, वाहन निर्माताओं के साथ समन्वय तथा आवश्यक परीक्षण किए जा चुके हैं।
सरकार का कहना है कि “इसे किसी परीक्षण या अस्थायी प्रयोग के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यों के विपरीत है। ई20 ईंधन कार्यक्रम ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने, पर्यावरण संरक्षण तथा किसानों की आय बढ़ाने जैसे राष्ट्रीय उद्देश्यों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
मीडिया से जिम्मेदार रिपोर्टिंग की अपेक्षा
अटॉर्नी जनरल कार्यालय ने कहा कि “न्यायालय में प्रस्तुत दलीलों को लेकर भ्रामक या अपूर्ण जानकारी प्रकाशित करना उचित नहीं है। इससे आम जनता के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। सरकार ने संकेत दिया कि न्यायिक कार्यवाही से जुड़ी खबरों के प्रकाशन में तथ्यात्मक शुद्धता और जिम्मेदारी का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।”
क्या है ई-20 ईंधन ?
ई20 ऐसा पेट्रोल है जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत सामान्य पेट्रोल का मिश्रण होता है। केंद्र सरकार इस कार्यक्रम के माध्यम से जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और गन्ना सहित अन्य कृषि उत्पादों से बनने वाले इथेनॉल के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रही है।
सरकार ने अपने ताज़ा स्पष्टीकरण में स्पष्ट कर दिया है कि ई20 कार्यक्रम पूरी तरह नीति आधारित राष्ट्रीय पहल है और इसे “प्रयोग” बताने वाली खबरें तथ्यात्मक रूप से गलत एवं भ्रामक हैं।







