नई दिल्ली। भारतीय नौसेना की ताकत अब और भी बढ़ गई है. शनिवार (11 जुलाई) को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापट्टनम डॉकयार्ड में आयोजित एक समारोह में स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए स्टील्थ फ्रिगेट INS महेंद्रगिरि को आधिकारिक तौर पर नौसेना के बेड़े में कमीशन कर दिया.नौसेना के साथ ही भारत के लिए भी ये बड़ी उपलब्धि है.
यह प्रोजेक्ट 17ए के तहत बना छठा स्वदेशी युद्धपोत है और इसे नौसेना के ईस्टर्न फ्लीट में शामिल किया गया है. बंदरगाह शहर स्थित नौसैनिक डॉकयार्ड में आयोजित समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ ही वरिष्ठ नौसेना अधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे.इस मौके पर रक्षा मंत्री ने खुशी जाहिर की. यह भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी युद्धपोत निर्माण की यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है.
हर खतरे से निपटने में सक्षम
इस मौके पर राजनाथ सिंह ने कहा कि आंध्र प्रदेश अब देश के रक्षा और एयरोस्पेस निर्माण क्षेत्र में एक नई ताकत बनकर उभरा है. उन्होंने कहा कि INS महेंद्रगिरि हवा से आने वाले खतरों, समुद्र की सतह पर मौजूद दुश्मन के जहाजों और समुद्र के भीतर पनडुब्बियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकता है. उन्होंने कहा कि ब्लू-वॉटर युद्धपोत के रूप में यह न सिर्फ तट के पास, बल्कि दूर और गहरे समुद्री क्षेत्रों में भी लगातार कई सप्ताह तक तैनात रहकर भारत के समुद्री हितों की रक्षा कर सकता है.
आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि
उन्होंने इसे भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी युद्धपोत निर्माण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया. मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL), भारतीय नौसेना, INS महेंद्रगिरि के चालक दल और देशवासियों को बधाई देते हुए रक्षा मंत्रीने कहा कि यह युद्धपोत भारत की बढ़ती रक्षा विनिर्माण क्षमता और आत्मनिर्भर भारत के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
समुद्र में कई अभियानों को अंजाम देने में सक्षम
INS महेंद्रगिरि करीब 6,670 टन के कुल वजन और 28 नॉट (करीब 52 किलोमीटर प्रति घंटे) की अधिकतम गति वाला एक बहुउद्देशीय स्टील्थ युद्धपोत है, जो समुद्र में कई अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है. इसमें उन्नत स्टील्थ विशेषताएं, हमलों को झेलने और युद्ध में टिके रहने की बेहतर क्षमता, रडार पर कम दिखाई देने की विशेषता तथा उच्च स्तर की स्वचालित प्रणालियां शामिल हैं.
75 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी सामग्री
खास बात ये है कि इस युद्धपोत में 75 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी सामग्री और उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है. जो भारत की डिजाइन क्षमता, विनिर्माण उत्कृष्टता और देश के मजबूत होते रक्षा परिवेश को दर्शाता है.INS महेंद्रगिरि को सतह से सतह पर मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल से लैस किया जा सकता है, जो दुनिया की सबसे तेज और घातक क्रूज मिसाइलों में शामिल है.
यह युद्धपोत बहुउद्देशीय रडार, लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर, टॉरपीडो लॉन्चर, एकीकृत पनडुब्बी रोधी रक्षा प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और नजदीकी खतरों से रक्षा करने वाली हथियार प्रणाली से भी लैस है.
राजनाथ सिंह ने बताई खासियत
राजनाथ सिंह ने बताया कि यह युद्धपोत हवाई, सतही और पनडुब्बी रोधी अभियानों को प्रभावी ढंग से अंजाम दे सकता है. इसके अलावा, यह समुद्री सुरक्षा मिशन, खोज एवं बचाव अभियान, मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियान तथा हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे लंबे समय तक तैनाती जैसे मिशन भी पूरा करने में सक्षम है.
INS महेंद्रगिरि को बताया ब्लू-वॉटर युद्धपोत
INS महेंद्रगिरि को ब्लू-वॉटर युद्धपोत बताते हुए सिंह ने कहा कि INS महेंद्रगिरि हवा से आने वाले खतरों, समुद्र की सतह पर मौजूद दुश्मन के जहाजों और समुद्र के भीतर पनडुब्बियों का मुकाबला कर सकता है. साथ ही यह भारत के समुद्री हितों की रक्षा के लिए न सिर्फ तटीय क्षेत्रों के पास, बल्कि दूर और गहरे समुद्र में भी कई सप्ताह तक लगातार तैनात रह सकता है.
INS महेंद्रगिरि का नाम
INS महेंद्रगिरि का नाम पूर्वी घाट की महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया. यह महेंद्रगिरि नाम वाला भारतीय नौसेना का पहला पोत है. युद्धपोत के प्रतीक चिह्न का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि इसमें महेंद्रगिरि पर्वत के शिखर पर बैठे एक शिकरे (गोशॉक पक्षी) को दर्शाया गया है. यह पैनी दृष्टि, असाधारण धैर्य और निर्णायक कार्रवाई करने की क्षमता का प्रतीक है, ऐसे गुण जिनकी अग्रिम पंक्ति के नौसैनिक युद्धपोत से अपेक्षा की जाती है.
रक्षा मंत्री ने कहा कि INS महेंद्रगिरि के नौसेना में शामिल होने से भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमता और मजबूत हुई है. उन्होंने कहा कि यह स्वदेशी युद्धपोत निर्माण में भारत के एक अग्रणी देश के रूप में उभरने को भी रेखांकित करता है. इसके साथ ही, इससे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सुरक्षा और भी मजबूत हुई है.







