नई दिल्ली। संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है. चर्चा है कि सरकार इस सत्र में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को फिर से ला सकती है, जिसके तहत 2029 में ही इसे लागू करने की तैयारी है. इसके अलावा वन नेशन वन इलेक्शन के प्रावधान वाले विधेयक और समान नागरिक संहिता से जुड़ा विधेयक भी पेश किया जा सकता है.
इन विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार को दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत की जरूरत है. राज्यसभा में एनडीए सरकार की स्थिति 150 सांसदों के समर्थन के साथ मजबूत है, जहां 161 की ही जरूरत है. बचे हुए 11 सांसदों का समर्थन आसानी से मिल सकता है, लेकिन बड़ी चुनौती लोकसभा में होगी.
वजह यह है कि 543 सदस्यों वाली लोकसभा में दो तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों की जरूरत होगी. यहां एनडीए के पास 318 सांसद ही हैं, इनमें 240 भाजपा के हैं. इसके अलावा जेडीयू, टीडीपी और एकनाथ शिंदे के भी सांसद हैं. फिर टीएमसी से टूटकर नई पार्टी बनाने वाले 20 सांसद भी हैं तो उद्धव गुट के बागी 6 सांसद भी इनमें शामिल हैं.
इस तरह आंकड़ा 318 का हो जाता है, जो जरूरी दो तिहाई बहुमत से 42 कम है. यहां चिंता की बात यह है कि INDIA अलायंस से बाहर के दलों के पास 38 सांसद ही बचते हैं. इस तरह यदि इनका पूरा समर्थन भी मिल जाए तो भी आंकड़ा पूरा नहीं होता. एनडीए को INDIA अलायंस के ही 4 और सांसदों के समर्थन की जरूरत रहेगी.
अब जिन 38 सांसदों की बात हो रही है, वे डीएमके, वाईएसआर, बीजेडी, बीआरएस, बीएसपी जैसे दलों के हैं. सवाल यह भी है कि क्या इन सभी का समर्थन एनडीए को वोटिंग के दौरान मिल पाएगा. फिर एनडीए को पूरी कोशिश यह भी करनी होगी कि अब तक उसके साथ दिख रहे सांसदों में से वोटिंग के दौरान कोई भी टूटे नहीं. ऐसी स्थिति में तीन तरीकों से एनडीए के पास समर्थन जुटाने की क्षमता बनती है. यदि शरद पवार गुट के 8 सांसद साथ दे दें तो 42 सांसदों की कमी घटकर 34 तक आ जाएगी. फिर गैर-एनडीए दलों के 38 सांसदों को साथ लेकर कोई भी बिल पारित कराया जा सकता है.
डीएमके वोटिंग से दूर हो जाए तो NDA को कितना फायदा
दूसरा विकल्प यह है कि डीएमके वोटिंग से ही दूर हो जाए. यदि ऐसा हुआ तो लोकसभा में सदस्य संख्या ही 518 रह जाएगी. दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा तब 346 होगा. एनसीपी-शरद पवार के साथ 326 तक पहुंचे एनडीए को फिर 20 ही और सांसदों की जरूरत रहेगी. तीसरी स्थिति यह है कि डीएमके के अलावा 30 और सांसद गैर-हाजिर रहें. तब सदस्य संख्या 488 होगी और दो-तिहाई आंकड़ा 326 ही रहेगा, जो एनडीए के पास उपलब्ध ही होगा.
राज्यसभा में सिर्फ 11 सांसद चाहिए, गैर INDIA दलों से समर्थन की उम्मीद
ऐसी स्थिति एनडीए के लिए सबसे ज्यादा मुफीद रहेगी. वहीं राज्यसभा में एनडीए की बात करें तो वहां उसे 11 ही और सांसद चाहिए होंगे. किसी भी गठबंधन में शामिल न होने वाले दलों के सांसद राज्यसभा में 24 हैं. इनमें से यदि आधे भी साथ आ गए तो एनडीए को उच्च सदन में आसानी से बढ़त मिल जाएगी.







