प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक को शनिवार तड़के दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर स्थित धरना स्थल से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। वांगचुक नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर पिछले 20 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे और शनिवार को उनका अनशन 21वें दिन में प्रवेश कर चुका था।
पुलिस की इस कार्रवाई के बाद जंतर-मंतर पर तनावपूर्ण माहौल बन गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बल प्रयोग और मारपीट के आरोप लगाए, जबकि दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह कदम दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह के आधार पर उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उठाया गया।
सफदरजंग अस्पताल ने क्या बताया ?
सफदरजंग अस्पताल के अनुसार, लंबे समय तक भोजन न करने के कारण सोनम वांगचुक को हल्की कमजोरी और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) की शिकायत है। अस्पताल प्रशासन ने कहा कि उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है और सभी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतक (वाइटल पैरामीटर) सामान्य हैं। अस्पताल की चिकित्सक डॉ. चारु बंबा ने बताया कि वांगचुक शनिवार सुबह लगभग 7:40 बजे अस्पताल पहुंचे। प्रारंभिक जांच के बाद उन्हें पहले आपातकालीन चिकित्सा विभाग में रखा गया और फिर मेडिसिन विभाग में भर्ती किया गया।
वांगचुक की पत्नी प्रशासन से अपील
डॉक्टरों के अनुसार— मरीज पूरी तरह होश में हैं। इलेक्ट्रोलाइट स्तर में असंतुलन के संकेत मिले हैं। लगातार चिकित्सकीय निगरानी की जा रही है। पहले शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी को दूर किया जाएगा, उसके बाद दोबारा विस्तृत जांच की जाएगी। पत्नी ने अस्पताल प्रशासन से की अपील
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अस्पताल प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि उनके पति को परिवार और निजी चिकित्सकों की सहमति के बिना न तो नसों के माध्यम से कोई दवा या तरल पदार्थ दिया जाए और न ही मुँह से कुछ खिलाया-पिलाया जाए। उन्होंने लिखा कि “पिछले 20 दिनों से जिन डॉक्टरों की टीम उनकी स्वास्थ्य निगरानी कर रही है, उनसे भी परामर्श किया जाना चाहिए।”
दिल्ली पुलिस ने रखा पक्ष
नई दिल्ली के डीसीपी ने एक्स पर जारी बयान में कहा कि “दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह के अनुरूप वांगचुक को आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल के लिए अस्पताल ले जाया गया।
पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने बाधा उत्पन्न करने का प्रयास किया, जिससे थोड़ी देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बनी। हालांकि पुलिस ने संयम बरतते हुए पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित ढंग से पूरा किया और प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर को शांतिपूर्वक खाली करने की अपील की।
हाई कोर्ट का क्या था निर्देश ?
दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में सुनवाई के दौरान सरकार और प्रशासन को निर्देश दिया था कि सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए। अदालत ने कहा था कि “यदि डॉक्टरों की राय में उनकी हालत गंभीर होती है तो आवश्यक चिकित्सा उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। यह पहली बार था जब अदालत ने इस आंदोलन में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप करते हुए प्रशासन को स्वास्थ्य संबंधी निर्णय डॉक्टरों की सलाह के आधार पर लेने को कहा।”
प्रदर्शनकारियों के आरोप
धरना स्थल पर मौजूद प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शनिवार सुबह सिविल ड्रेस में पुलिसकर्मी डॉक्टरों की टीम बनकर पहुंचे और अचानक हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए सोनम वांगचुक को अपने साथ ले गए।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस दौरान कुछ स्वयंसेवकों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट भी हुई। इसी बीच आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि जब वह कुछ देर के लिए धरना स्थल से बाहर गए थे, उसी दौरान पुलिस ने वांगचुक को जबरन उठा लिया। उन्होंने स्वयं के साथ भी पुलिस द्वारा मारपीट किए जाने का आरोप लगाया।
आंदोलन जारी रखने का ऐलान
आंदोलन से जुड़े संगठन सीजेपी ने घोषणा की है कि “सोनम वांगचुक के अस्पताल ले जाए जाने के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। संगठन के अनुसार— अभिजीत दीपके अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे। 20 जुलाई को प्रस्तावित “चलो संसद” मार्च पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार निकाला जाएगा।
केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की आलोचना
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने की कार्रवाई पर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की आलोचना की है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि सरकार शांतिपूर्ण विरोध को दबाने का प्रयास कर रही है और वांगचुक की मांगों पर संवाद करने के बजाय उन्हें जबरन अस्पताल भेजा गया। वहीं समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन को इस तरह समाप्त करना संविधान की भावना के विपरीत है।
अस्पताल ले जाए जाने से पहले वांगचुक का संदेश
शुक्रवार रात जारी वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने समर्थकों से 20 जुलाई के “चलो संसद” मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि “आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत जनता की भागीदारी है।”
अपने स्वास्थ्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि “लंबे उपवास के कारण उनके शरीर का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हो चुका है। पहले शरीर की चर्बी, फिर मांसपेशियां कम हुई हैं और यदि स्थिति आगे बढ़ती है तो शरीर के अन्य अंग प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनका मानसिक संतुलन पूरी तरह सामान्य है और वह अपनी बात पूरी स्पष्टता के साथ देश के सामने रख रहे हैं।”
क्या हैं आंदोलन की प्रमुख मांगें ?
सीजेपी और सोनम वांगचुक की प्रमुख मांगें हैं— नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं की न्यायिक जांच। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। देश की परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार।परीक्षा प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना। सोनम वांगचुक 28 जून से इस आंदोलन में शामिल हुए थे और उसी दिन से उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी।
लोकतांत्रिक अधिकारों पर हस्तक्षेप !
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने की कार्रवाई ने आंदोलन को नया राजनीतिक और सामाजिक आयाम दे दिया है। एक ओर प्रशासन इसे न्यायालय के निर्देशों और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर आंदोलनकारी और विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हस्तक्षेप मान रहे हैं।
फिलहाल सफदरजंग अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में वांगचुक का उपचार जारी है। उनकी स्वास्थ्य स्थिति स्थिर बताई जा रही है, जबकि जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह आंदोलन अब संसद तक पहुंचने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में अदालत, सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली गतिविधियां इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगी।







