प्रकाश मेहरा
स्पेशल डेस्क
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को लोकसभा में ‘पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के बीच उस समय जोरदार हंगामा खड़ा हो गया, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राहुल गांधी द्वारा प्रयुक्त ‘इडियट’ और ‘अंधभक्त’ जैसे शब्दों को असंसदीय बताते हुए विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद सदन का माहौल कुछ देर के लिए गर्म हो गया।
इससे पहले मंगलवार को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के बयान को लेकर भी सदन में तीखी नोकझोंक देखने को मिली थी। बुधवार को चर्चा का केंद्र राहुल गांधी का भाषण बन गया।
युवाओं और छात्रों से बातचीत का दिया उदाहरण
पेपर लीक के मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए राहुल गांधी ने कहा कि हाल के दिनों में देशभर में छात्रों और युवाओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन केवल गुस्से की अभिव्यक्ति नहीं थे, बल्कि देश की आने वाली पीढ़ी की गंभीर चिंता और भावनाओं का प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को युवाओं की इस भावना का सम्मान करना चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा कि यदि भाजपा के नेता अपने बच्चों और परिवार के युवाओं से इस मुद्दे पर बात करेंगे तो उन्हें भी यही महसूस होगा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं के खिलाफ उठ रही आवाज़ जायज़ है।
छात्रा से बातचीत का किया जिक्र
अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने एक छात्रा से हुई बातचीत का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने छात्रा से पूछा कि “स्टूडेंट होने का क्या मतलब है?” छात्रा ने जवाब दिया कि छात्र वह होता है जो खुले मन से सीखने के लिए तैयार रहता है, यह स्वीकार करता है कि उसे सब कुछ नहीं पता और ज्ञान निरंतर विकसित होता रहता है।
राहुल गांधी के अनुसार, छात्रा ने आगे कहा कि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो मानते हैं कि उन्हें सब कुछ पता है, वे दूसरों की बात नहीं सुनते, स्वयं को सर्वज्ञ समझते हैं और दूसरे के विचारों का सम्मान नहीं करते। इसी संदर्भ में राहुल गांधी ने उन शब्दों का उल्लेख किया, जिन पर सत्ता पक्ष ने तत्काल आपत्ति जताई।
भाजपा ने जताई कड़ी आपत्ति
राहुल गांधी के बयान पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू तुरंत खड़े हो गए और उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। रिजिजू ने कहा कि संसद की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है और ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए जिन्हें सदन में असंसदीय माना जाता है।
उन्होंने कहा, “हम आपके भाषण में व्यवधान नहीं डालना चाहते, लेकिन जिन शब्दों का आपने इस्तेमाल किया है, उनका प्रयोग न करें। यही हमारा अनुरोध है।”
अध्यक्ष ओम बिरला ने भी दी नसीहत
विवाद बढ़ने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी से आग्रह किया कि वे अपनी बात नियमों के अनुरूप रखें और सदन की मर्यादा बनाए रखें। हालांकि राहुल गांधी ने अपनी सीट से कहा कि पहले सदन में व्यवस्था बहाल कराई जाए, क्योंकि जैसे ही उन्होंने बोलना शुरू किया, सत्ता पक्ष के सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया।
हंगामे के बीच राहुल गांधी का जवाब
हंगामे के बीच राहुल गांधी दोबारा खड़े हुए और कहा कि उन्होंने किसी सांसद को व्यक्तिगत रूप से संबोधित करके कोई असंसदीय शब्द नहीं कहा है। उनका कहना था कि यदि वही शब्द किसी सांसद के लिए प्रयोग किया जाता, तब उसे असंसदीय माना जा सकता था। उन्होंने कहा, “जैसे ही मैंने बोलना शुरू किया, पूरा सत्ता पक्ष हंगामा करने लगा। यह शब्द तब असंसदीय होता जब मैंने किसी सांसद के खिलाफ उसका इस्तेमाल किया होता।”
सदन में जारी रही बहस
राहुल गांधी और सत्ता पक्ष के बीच हुई इस तीखी नोकझोंक के बाद कुछ समय तक सदन में शोर-शराबा चलता रहा। हालांकि बाद में अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद कार्यवाही आगे बढ़ी और पेपर लीक से जुड़े संशोधन विधेयक पर चर्चा जारी रही।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया ‘पब्लिक एग्ज़ामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ देशभर में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के मामलों को रोकने के उद्देश्य से लाया गया है। इसी विधेयक पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी के बयान ने राजनीतिक बहस को नया मोड़ दे दिया है।







