नई दिल्ली। महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों के एक समूह की भूख हड़ताल जारी है। इसी बीच प्रदर्शनकारियों को समझाने गए मंत्री विवादों में घिर गए हैं। खबर है कि उन्होंने छात्रों को चुपके से भोजन करने की सलाह दे दी है। अब इसपर विपक्षी दलों ने जमकर आपत्ति उठाई है। कॉलेजों के आदिवासी छात्रों का एक समूह छात्रावास सुविधाओं, प्रवेश नियमों और अन्य मुद्दों से जुड़ी मांगों को लेकर पिछले 15 दिनों से एक छात्रावास में प्रदर्शन कर रहा है।
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री अशोक उइके और नरहरि जिरवाल प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने पहुंचे थे। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जिरवाल ने छात्रों से कुछ खा लेने और विरोध जारी रखने की अपील की है उन्होंने कहा कि अपने समय में वह भी प्रदर्शन के दौरान चुपके से कुछ खा लेते थे।
विपक्ष भड़का
कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टिवार ने कहा, ‘यह बयान दिखाता है कि मंत्री लोकतांत्रिक तरीके से किए जा रहे आंदोलन को कितना महत्व देते हैं। यह सरकार के असंवेदनशील रवैये को भी दर्शाता है।‘
शिवसेना यूबीटी अंबादास दानवे ने कहा, ‘उन्होंने पिछले दो हफ़्तों से भूख हड़ताल पर बैठे प्रदर्शनकारियों की भावनाओं का अनादर किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और जिरवाल की पार्टी की अध्यक्ष सुनेत्रा पवार को उनके बयान पर गौर करना चाहिए और ऐसी असंवेदनशील बातें कहने के लिए उन्हें डांटना चाहिए।‘
मंत्रियों और छात्रों की बात
उइके ने गुरुवार को पुणे में प्रदर्शन कर रहे आदिवासी विद्यार्थियों से अपना आंदोलन समाप्त करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार विद्यार्थियों की चिंताओं का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बाद में कहा कि विद्यार्थियों की ज्यादातर मांगें स्वीकार कर ली जाएंगी। मंत्री ने विद्यार्थियों से विपक्षी दलों के ‘जाल‘ में नहीं फंसने की अपील की।
उन्होंने गुरुवार को मुंबई में कहा, ‘हमने आदिवासी छात्रावासों में प्रवेश के लिए 30 वर्ष की आयु सीमा संबंधी राज्य सरकार का पिछला आदेश रद्द कर दिया है।‘ उइके ने कहा कि सरकार ने छात्रों को यह भी आश्वासन दिया है कि विभिन्न शहरों से आने वाले आदिवासी विद्यार्थियों के लिए उचित आवास की उनकी मांग को पूरा करने के लिए सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (एसपीपीयू) परिसर में छात्रावास बनवाया जाएगा।
मंत्री ने जाति वैधता प्रमाणपत्र के मुद्दे पर जोर देकर कहा कि जब तक छात्र जाति वैधता प्रमाणपत्र जमा नहीं करते, तब तक कॉलेज और विश्वविद्यालय उन्हें स्नातक या पाठ्यक्रम पूरा करने का प्रमाणपत्र जारी न करें। उन्होंने कहा कि जाति वैधता प्रमाणपत्र के बिना विद्यार्थियों को स्थानांतरण प्रमाणपत्र भी जारी नहीं किया जाएगा।
उइके ने बताया कि इस संबंध में सभी संबंधित विभागों को लिखित आदेश जारी कर दिए गए हैं। कॉलेजों के आदिवासी छात्रों का एक समूह छात्रावास सुविधाओं, प्रवेश नियमों और अन्य मुद्दों से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर पिछले 15 दिनों से एक छात्रावास में प्रदर्शन कर रहा है। इनमें से कुछ छात्र भूख हड़ताल पर हैं। बुधवार को कई राजनेताओं ने प्रदर्शन स्थल का दौरा कर आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रति समर्थन जताया।







