नई दिल्ली। 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के दिन आंशिक चंद्र ग्रहण लग रहा है। भारतीय समय के अनुसार, यह सुबह 6 बजकर 53 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक के नियम लागू नहीं होंगे। फिर भी जहां ग्रहण दिखता है, वहां मोक्ष के बाद शुद्धि की परंपरा बहुत महत्वपूर्ण है। गंगाजल का छिड़काव उसी शुद्धि का आसान पवित्र तरीका माना जाता है।
ग्रहण मोक्ष के बाद शुद्धि क्यों जरूरी?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण काल में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है। जहां ग्रहण दिखाई देता है, वहां सूतक माना जाता है। इस दौरान पूजा, भोजन और मंदिर के कपाट बंद रखने की परंपरा है। ग्रहण समाप्त होते ही स्नान, सफाई और जल छिड़काव से नकारात्मक प्रभाव को दूर करने की कोशिश की जाती है। यह काम भय से नहीं, बल्कि स्थान और मन को फिर से शुद्ध करने के भाव से किया जाता है। भारत में इस बार ग्रहण नहीं दिखने के कारण यह अनिवार्य नहीं है।
घर में गंगाजल छिड़कने की आसान विधि
ग्रहण मोक्ष के बाद पहले स्नान करें। इसके बाद साफ जल में थोड़ा गंगाजल मिला लें। उसके बाद घर की साफ-सफाई करें और धूल हटाएं। इसके बाद पूर्वाभिमुख खड़े होकर घर के मुख्य द्वार, कमरे, पूजा स्थान और रसोई में धीरे-धीरे गंगाजल मिले पानी का छिड़काव करें। जल के छिड़काव के दौरान मन में शुद्धि और शांति का भाव रखें। छिड़काव के बाद ही पूजा या भोजन शुरू करना शुभ माना जाता है।
मंदिर में गंगाजल और अभिषेक का क्रम
जहां ग्रहण दिखाई देता है, वहां सूतक समाप्त होने पर मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। पहले प्रांगण और गर्भगृह की सफाई होती है। फिर पवित्र जल या गंगाजल से मूर्तियों का अभिषेक किया जाता है। अभिषेक के बाद ही नियमित पूजा, आरती और दर्शन शुरू होते हैं। मूर्तियों पर ग्रहणकालीन प्रभाव ना रहे इसी भाव से यह काम किया जाता है। भारत में इस बार मंदिर सामान्य रूप से खुले रहेंगे, क्योंकि ग्रहण यहां दृश्यमान नहीं है।
भोजन और तुलसी से जुड़ी सावधानी
परंपरा में कहा गया है कि सूतक के दौरान बने भोजन में यदि तुलसी दल नहीं डाला गया हो, तो उसे ग्रहण बाद सेवन के योग्य नहीं माना जाता है। जहां सूतक लागू हो, वहां भोजन पहले से बनाकर तुलसी डालकर रखा जाता है या फिर मोक्ष के बाद नया भोजन बनाया जाता है। गंगाजल छिड़काव के बाद रसोई को भी शुद्ध माना जाता है।
ग्रहण मोक्ष के बाद गंगाजल छिड़कना शुद्धि और नए आरंभ का प्रतीक है। यह वहीं आवश्यक माना जाता है, जहां ग्रहण दिखाई दे। भारत में 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण दृश्यमान नहीं है, इसलिए सामान्य पूजा और राखी में बाधा नहीं है। फिर भी पवित्र जल से घर की शुद्धता बनाए रखना शुभ माना जाता है।







