नई दिल्ली। जापान के आइची-नागोया में आयोजित 20वें एशियन गेम्स के मेडल्स का डिजाइन अपनी कलात्मकता, सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक सोच के चलते दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है. इन मेडल्स को एक नेशनल डिजाइन कॉम्पिटिशन के जरिए चुना गया, जिसे जाने-माने जापानी डिजाइनर डाइसुके शीबा ने तैयार किया है. शीबा का यह कॉन्सेप्ट खेलों के आधिकारिक नारे ‘इमेजिन वन एशिया’ और ‘विविधता में एकता’ की थीम पर आधारित है.
किसने बनाया और क्या है इसके पीछे का कॉन्सेप्ट?
डिजाइनर डाइसुके शीबा ने इस मेडल को बनाने के लिए एक अनोखा प्रोसेस अपनाया है. मेडल का फाइनल रूप तय करने के दौरान उन्होंने जानबूझकर कई सेरामिक डिस्क्स को तोड़ा और उनके टुकड़ों के जुड़ाव का अध्ययन किया. शीबा का मानना है कि एक एथलीट का सफर असफलताओं, चोटों, संघर्ष और कड़ी मेहनत के बिखरे हुए पलों से बनता है. जब ये सभी टुकड़े एक साथ जुड़ते हैं, तो वह मेडल के रूप में एथलीट की सफलता का प्रतीक बन जाते हैं. यह डिजाइन एशिया की अलग-अलग संस्कृतियों और भाषाओं के खेलों के मंच पर एक साथ आने को भी रिप्रेजेंट करता है.
एशियन गेम्स 2026 मेडल की 5 सबसे बड़ी खासियत
रिसाइकिल्ड ई-कचरे का इस्तेमाल- पर्यावरण संरक्षण और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए जापान के नगर निगमों की ओर से जमा किए गए पुराने और छोटे इलेक्ट्रॉनिक कचरे से धातु निकालकर इन मेडल्स को बनाया गया है.
काकित्सुबाता फूल से इंस्पायर रिबन- मेडल के रिबन पर आइची प्रांत के आधिकारिक फूल ‘काकित्सुबाता’ का खूबसूरत सिल्हूट उकेरा गया है. इसके घुमावदार पैटर्न एथलीटों के लचीलेपन और शक्ति को दर्शाते हैं.
हिनोकी लकड़ी का बॉक्स- मेडल को रखने के लिए तैयार किया गया बॉक्स आइची की प्रसिद्ध ‘हिनोकी’ लकड़ी से बना है, जो जापानी पारंपरिक चाय संस्कृति से प्रेरित है.
मेडल्स की लंबाई-चौड़ाई- सभी मेडल 8 सेंटीमीटर डायमीटर और 5 मिलीमीटर मोटाई के गोलाकार फॉर्मेट में बनाए गए हैं.
मेडल्स का वजन- गोल्ड मेडल लगभग 265 ग्राम का है, जिसमें शुद्ध चांदी पर कम से कम 1 ग्राम सोने की परत चढ़ाई गई है. वहीं, सिल्वर मेडल लगभग 264 ग्राम का है, जो प्योर सिल्वर का बना है. इनके अलावा ब्रॉन्ज मेडल लगभग 222 ग्राम का है, जो 95% तांबा और 5% जिंक से तैयार किया गया है.







