लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को प्रांतीय शिक्षक गौरव कार्यशाला में कहा कि भारत को जाति, क्षेत्र और संकीर्ण स्वार्थों के नाम पर बांटने वाली शक्तियों को सफल नहीं होने देना है. उन्होंने शिक्षकों से युवा पीढ़ी को सही दिशा देने के साथ उनमें राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी, कर्तव्यबोध और सामाजिक समरसता की भावना विकसित करने का आह्वान किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक समाज की चेतना और राष्ट्र के भविष्य के निर्माता हैं. यदि शिक्षक अपने दायित्वों के प्रति जागरूक होकर युवा पीढ़ी का मार्गदर्शन करें तो भारत को विश्वगुरु बनने से कोई रोक नहीं सकता.
सामाजिक एकता से मजबूत होगी राष्ट्रीय एकता
डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के डॉ. बीआर अंबेडकर सभागार में आयोजित कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को जोड़ने में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के साथ उसमें राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और कर्तव्यबोध भी पैदा करना चाहिए. अधिकारों के साथ नागरिक कर्तव्यों का बोध जरूरी है. शिक्षक नई पीढ़ी को विरासत के गौरव, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण से जोड़कर 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
तीन संस्थाओं की स्थापना का किया उल्लेख
उन्होंने कहा कि वर्ष 1923 में गोरखपुर में गीता प्रेस की स्थापना हुई, 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और 1926 में अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना हुई. तीनों संस्थाओं के कार्यक्षेत्र और रास्ते अलग रहे, लेकिन समाज में जनचेतना जगाना और लोगों को भारतीय संस्कृति व सनातन मूल्यों से जोड़ना उनका लक्ष्य रहा. उन्होंने कहा कि अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य स्वयं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे. उन्होंने आध्यात्मिक शक्ति को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का काम किया.
विचार के आधार पर संगठन लंबे समय तक प्रभावी
उन्होंने कहा कि विचार कभी मरते नहीं हैं. कोई संगठन विचार के आधार पर चलता है तो लंबे समय तक प्रभावी रहता है. अखिल विश्व गायत्री परिवार ने यज्ञ और गायत्री मंत्र के माध्यम से समाज में सकारात्मक चेतना जगाने तथा ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को आगे बढ़ाने का काम किया है. उन्होंने कहा कि अब इस विचार को वर्तमान चुनौतियों से जोड़ने की जरूरत है. सीएम योगी ने बताया कि पंडित श्रीराम शर्मा ने धर्म और विज्ञान को एक-दूसरे का विरोधी नहीं, बल्कि सहयोगी माना था.
संयुक्त परिवारों के बिखराव पर जताई चिंता
उन्होंने कहा कि पहले संयुक्त परिवार समाज की बड़ी ताकत हुआ करते थे. परिवार के सभी सदस्य एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहते थे. आज परिवार बिखर रहे हैं. ऐसे समय में समाज और परिवार को जोड़ने वाली संस्थाओं की भूमिका और बढ़ जाती है. उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार बच्चों को संस्कार देने और उन्हें गायत्री मंत्र से जोड़ने का कार्य कर रहा है.
भारत की ज्ञान परंपरा ने दुनिया को दी दिशा
चाणक्य-चंद्रगुप्त, महर्षि वशिष्ठ-श्रीराम और महर्षि सांदीपनि-श्रीकृष्ण की गुरुकुल परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा ने दुनिया को दिशा दी है. उन्होंने शिक्षकों से इस परंपरा और देश की विरासत के गौरव को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की अपील की. उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी में राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करना जरूरी है.
‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का किया जिक्र
पर्यावरण संरक्षण को भी राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि प्रकृति किसी से भेदभाव नहीं करती. प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत प्रदेश में 2017 से 2026 तक 275 करोड़ पौधारोपण किया गया है. इस वर्ष भी 35 करोड़ पौधे लगाए गए हैं. नदियों को शरीर की धमनियों के समान बताते हुए उन्होंने कहा कि नदियों का संरक्षण और पुनर्जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी है.
कार्यशाला में ये लोग रहे मौजूद
उन्होंने ने शिक्षकों से 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि अधिकारों के साथ नागरिक कर्तव्यों का बोध जरूरी है. शिक्षक नई पीढ़ी को विरासत के गौरव, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण से जोड़कर भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. कार्यशाला में अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ. चिन्मय पंड्या, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह समेत गायत्री परिवार से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए.







