नई दिल्ली। देशभर में ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर विपक्ष और CJP का विरोध तेज हो गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच सड़कों पर संग्राम छिड़ा है। इस पूरे घटनाक्रम पर पत्रकार-लेखक प्रकाश मेहरा ने चिंता जताते हुए युवाओं के भविष्य और लोकतंत्र के सामने खड़े सवालों को प्रमुखता से रखा।
पत्रकार एवं लेखक मेहरा ने देश के युवाओं और नागरिकों से अपील की है कि वे ‘वोट चोरी’ के आरोपों, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और CJP के आंदोलन जैसे संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों और प्रमाणों की पड़ताल करें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल उठाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उन सवालों के जवाब प्रमाणों और निष्पक्ष जांच के आधार पर तलाशना।
मेहरा के संदेश के मुताबिक, राजनीतिक नारों, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और जनदबाव से प्रभावित होकर राय बनाने के बजाय नागरिकों को संबंधित मुद्दों के तथ्यों, उद्देश्यों और उपलब्ध प्रमाणों को समझना चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए निष्पक्षता तथा जिम्मेदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
‘वोट चोरी’ का आरोप गंभीर, जवाबदेही भी जरूरी
प्रकाश मेहरा ने कहा कि ‘वोट चोरी’ का आरोप केवल राजनीतिक बयानबाजी का विषय नहीं है, बल्कि यह करोड़ों नागरिकों के लोकतांत्रिक विश्वास और मतदान के अधिकार से जुड़ा गंभीर मामला है। ऐसे आरोपों को न तो बिना जांचे सच मानना चाहिए और न ही आरोप लगाने वालों के सवालों को नजरअंदाज करना चाहिए।
उनके अनुसार, आरोप लगाने वालों को अपने दावों के समर्थन में ठोस प्रमाण प्रस्तुत करने चाहिए। वहीं, चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह उठाए गए सवालों और उपलब्ध कराए गए प्रमाणों पर स्पष्ट, पारदर्शी और तथ्यात्मक जवाब दे। यदि किसी मामले में संदेह या विवाद बना रहता है, तो उसका समाधान निष्पक्ष जांच और निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए। इससे न केवल चुनावी व्यवस्था में जनता का भरोसा मजबूत होगा, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता भी बनी रहेगी।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर तथ्यों पर विचार
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर मेहरा ने कहा कि “किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की जवाबदेही तय करने से पहले संबंधित आरोपों, उपलब्ध प्रमाणों और उसकी जिम्मेदारियों का निष्पक्ष आकलन किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि “संवैधानिक पद की गरिमा का अर्थ यह नहीं है कि उस पद पर आसीन व्यक्ति से सवाल नहीं पूछे जा सकते। लोकतंत्र में किसी भी संस्था या पदाधिकारी को जवाबदेही से ऊपर नहीं माना जा सकता। हालांकि, केवल विरोध प्रदर्शन, जनदबाव या राजनीतिक मांग किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं बन सकती।
लेखक के मुताबिक, इस्तीफे की मांग हो या किसी अधिकारी के कामकाज पर सवाल, हर मामले में तथ्यों और प्रमाणों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यही लोकतांत्रिक परिपक्वता और जिम्मेदार नागरिकता की पहचान है।
CJP सहित सभी संगठनों की भूमिका
CJP सहित चुनावी पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों के मुद्दों पर सक्रिय संगठनों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए प्रकाश मेहरा ने कहा कि किसी संगठन की विश्वसनीयता उसके नाम, नारों या आंदोलन की तीव्रता से नहीं, बल्कि उसके निष्पक्ष, निरंतर और तथ्यपरक आचरण से तय होनी चाहिए।
उन्होंने जोर दिया कि चुनावी पारदर्शिता, नागरिक अधिकारों और प्रशासनिक निष्पक्षता से जुड़े सवाल भाजपा शासित राज्यों में भी उतनी ही गंभीरता से उठाए जाने चाहिए, जितनी गैर-भाजपा शासित राज्यों में। जवाबदेही की कसौटी किसी राजनीतिक दल के प्रति समर्थन या विरोध के आधार पर नहीं बदलनी चाहिए। उनका कहना है कि “किसी भी संगठन के आंदोलन का मूल्यांकन उसकी घोषित मांगों, उपलब्ध प्रमाणों, कार्यप्रणाली और प्रस्तावित समाधान के आधार पर होना चाहिए। नागरिकों को यह भी देखना चाहिए कि संबंधित संगठन सभी पक्षों के मामलों में समान मानदंड अपनाता है या नहीं।”
प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार, लेकिन समर्थन सोच-समझकर
प्रकाश मेहरा ने कहा कि “शांतिपूर्ण प्रदर्शन, असहमति व्यक्त करना और सरकार या संवैधानिक संस्थाओं से जवाब मांगना लोकतंत्र के महत्वपूर्ण अधिकार हैं। इन अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। हालांकि, किसी आंदोलन में शामिल होने या उसका समर्थन करने से पहले उसके उद्देश्यों, तथ्यों और मांगों को समझना भी जरूरी है। केवल भावनात्मक अपील, राजनीतिक नारों या सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री के आधार पर निर्णय लेना नागरिकों को भ्रमित कर सकता है।
उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि वे अपुष्ट सूचनाओं को बिना जांचे साझा न करें, वायरल वीडियो को अंतिम प्रमाण न मानें और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी प्राप्त करें।
सशस्त्र बलों के सम्मान और राष्ट्रीय हित को भी दें प्राथमिकता
अपने संदेश में मेहरा ने देश के सशस्त्र बलों और सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान बनाए रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक और सामाजिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन इन मतभेदों के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा और सुरक्षा बलों के सम्मान से जुड़े विषयों पर जिम्मेदार भाषा का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
उनके अनुसार, आंतरिक विवादों का समाधान संवैधानिक, लोकतांत्रिक और कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से तलाशना चाहिए। देश के नागरिकों और राजनीतिक संगठनों को ऐसे आचरण से बचना चाहिए, जिससे गलत सूचनाओं को बढ़ावा मिले या भारत के आंतरिक मामलों में बाहरी ताकतों को अनुचित हस्तक्षेप का अवसर मिले।
‘बेहतर भारत’ के लिए जागरूक और जिम्मेदार नागरिक जरूरी
प्रकाश मेहरा ने कहा कि “बेहतर भारत का निर्माण ऐसी लोकतांत्रिक व्यवस्था से संभव है, जहां प्रत्येक नागरिक के वोट की सुरक्षा हो, उसकी आवाज सुनी जाए और सत्ता में बैठे हर व्यक्ति तथा संस्था की जवाबदेही सुनिश्चित हो। इसके लिए नागरिकों को चुनावी पारदर्शिता की मांग करनी चाहिए, संवैधानिक संस्थाओं से सवाल पूछने चाहिए और किसी भी अनियमितता की निष्पक्ष जांच पर जोर देना चाहिए। साथ ही, बिना पर्याप्त प्रमाण किसी आरोप को अंतिम सत्य मानने या राजनीतिक पूर्वाग्रह के आधार पर किसी पक्ष का समर्थन अथवा विरोध करने से बचना चाहिए।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे देश के लोकतांत्रिक भविष्य को मजबूत बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। जागरूक नागरिक वही है, जो सवाल पूछता है, उपलब्ध जवाबों को सुनता है, प्रमाणों की जांच करता है और फिर स्वतंत्र विवेक से निर्णय लेता है।
पत्रकार-लेखक प्रकाश मेहरा का संदेश
उन्होंने कहा की अपील का मूल भाव है कि “लोकतंत्र में न तो सवाल पूछने वालों की आवाज दबनी चाहिए और न ही बिना प्रमाण लगाए गए आरोपों को सच मान लिया जाना चाहिए। चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता, संस्थागत जवाबदेही और नागरिकों के मतदान अधिकार की रक्षा के लिए तथ्यों पर आधारित सार्वजनिक बहस जरूरी है।
“पढ़िए, सवाल पूछिए, प्रमाण देखिए और फिर अपने विवेक से निर्णय लीजिए। लोकतंत्र की असली ताकत केवल नारों और आंदोलनों में नहीं, बल्कि सच, निष्पक्षता, पारदर्शिता और जिम्मेदार नागरिकता में निहित है।”
ये लेखक के अपने विचार हैं







