नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी पर तीखा कटाक्ष किया और अनजाने में इंडिया गठबंधन की मेगा रैली को बढ़ावा देने के लिए धन्यवाद कहा. रैली 1 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली है. उनकी टिप्पणी ने आयोजन स्थल पर लोगों का ध्यान खींचा है.
जलजमाव वाली जगह से सार्वजनिक मैदान तक
1930 से पहले वह क्षेत्र जो अब रामलीला मैदान बन चुका है एक बड़ा तालाब या फिर गड्ढा हुआ करता था जहां पानी जमा होता था. 1930 के दशक की शुरुआत में निचले स्थान को मिट्टी से भर दिया गया और एक बड़े खुले मैदान में बदल दिया गया. इस वजह से एक विकसित मैदान के रूप में इसका अस्तित्व लगभग 96 साल पुराना है.
आयोजन स्थल के भौतिक इतिहास को वहां आयोजित होने वाली रामलीला की काफी पुरानी परंपरा से अलग किया जाना चाहिए. भगवान श्री राम की कहानी का भव्य सालाना मंचन रामलीला का इतिहास सदियों पुराना है. यह मूल रूप से लाल किले के पीछे, यमुना के रेतीले नदी तट पर आयोजित किया गया था.
इसके बाद मंचन को बाद में 1930 के दशक के दौरान वर्तमान स्थान पर ले जाया गया. यह बदलाव अपनी राजधानी को नई दिल्ली में बदलने के ब्रिटिश फैसले के बाद हुआ. जैसे-जैसे शहर का प्रशासनिक और शहरी परिदृश्य बदला रामलीला परंपरा को उस मैदान में एक नई जगह मिली जिसे रामलीला मैदान के नाम से जाना जाने लगा.
सरकारी स्वामित्व और कानूनी जिम्मेदारी
रामलीला मैदान का स्वामित्व किसी निजी व्यक्ति, संगठन या ट्रस्ट के पास नहीं है. राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक पूरी संपत्ति सरकार की सार्वजनिक जमीन है. कानूनी स्वामित्व भूमि और विकास कार्यालय या फिर एल एंड डीओ के पास है, जो केंद्र सरकार के अधीन काम करता है.
रखरखाव, प्रबंधन और कार्यक्रम आवंटन
केंद्र सरकार के पास कानूनी स्वामित्व तो है लेकिन मैदान का दैनिक रखरखाव और संचालन दिल्ली नगर निगम के बागवानी विभाग द्वारा किया जाता है. एमसीडी को केंद्र सरकार के अधीन संचालित बताया गया है और यह रोजमर्रा के रखरखाव, संचालन और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है.
जगह देने की प्रशासनिक प्रक्रिया में एमसीडी और दिल्ली विकास प्राधिकरण के बीच कोऑर्डिनेशन शामिल है. यह ये निकाय राजनीतिक रैली, रामलीला समारोह और विरोध प्रदर्शन सहित धार्मिक त्योहारों के लिए मैदान देते हैं. आयोजन स्थल पर आयोजित कार्यक्रम से किराए की इनकम पैदा होती है. इन आयोजनों से इकट्ठा की गई राशि किसी आयोजक या फिर मालिक की निजी इनकम के रूप में ना मानकर एमसीडी के जरिए से सरकारी खजाने में जमा की जाती है.
सार्वजनिक स्थिति वाला एक ऐतिहासिक स्थल
रामलीला मैदान सार्वजनिक, राजनीतिक और धार्मिक आयोजनों के लिए एक सभा स्थल के रूप में काम करता है. स्वामित्व और प्रबंधन व्यवस्था से यह पता चलता है कि मैदान की सार्वजनिक स्थिति है, भले ही अलग-अलग संस्थाओं की अलग-अलग जिम्मेदारी हो. एल एंड डीओ के पास केंद्र सरकार की तरफ से कानूनी स्वामित्व है जबकि एमसीडी का बागवानी विभाग दैनिक कार्यों का प्रबंधन करता है. एमसीडी और डीडीए आवंटन प्रक्रिया को को-ऑर्डिनेट करते हैं और घटना से संबंधित किराए की रसीद एमसीडी के जरिए से सरकारी खजाने में जाती है.
उम्र के सवाल का जवाब इस बात पर निर्भर होता है कि क्या मापा जा रहा है. एक खुले मैदान के रूप में रामलीला मैदान 1930 के दशक की शुरुआत का है और लगभग 96 साल पुराना है. आयोजन स्थल से जुड़ी शाही रामलीला परंपरा काफी पुरानी है. यह इस स्थान पर आने से पहले लाल किले के पीछे यमुना के रेतीले तटों पर शुरू हुई थी. इसकी मालिक केंद्र सरकार है जिसका कानूनी स्वामित्व एल एंड डीओ के पास है.







