नई दिल्ली। दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। एक ओर कांग्रेस समेत INDIA गठबंधन की पार्टियां कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर 1 नवंबर को रामलीला मैदान में बड़ी रैली करने की तैयारी में हैं, तो दूसरी ओर BJP ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए सड़क पर उतरने का फैसला किया है। इसी कड़ी में बुधवार को चांदनी चौक में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ के नारे के साथ पैदल मार्च निकाला जाएगा। BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन इस मार्च का नेतृत्व करेंगे। पार्टी की इस कवायद को विपक्ष के अभियान के बीच अपना पक्ष मजबूती से रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
चांदनी चौक में जुटेंगे BJP के नेता और कार्यकर्ता
BJP के प्रस्तावित मार्च में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली BJP अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, सांसदों और पार्टी के अन्य नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। मार्च बुधवार शाम करीब चार बजे शुरू हो सकता है। इसमें 15 हजार से अधिक लोगों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। पार्टी ने इस कार्यक्रम के जरिए SIR को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों का जवाब देने और अपने अभियान को व्यापक स्तर पर पहुंचाने की तैयारी की है। हालांकि, मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है।
SIR पर आमने-सामने BJP और विपक्ष
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस और INDIA गठबंधन की दूसरी पार्टियां चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगा रही हैं। विपक्ष का दावा है कि मतदाता सूची में अनियमितताओं के जरिए ‘वोट चोरी’ को बढ़ावा दिया जा रहा है। विपक्ष ने इस मामले में चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। दूसरी तरफ, BJP का कहना है कि विपक्ष SIR प्रक्रिया को लेकर लोगों को गुमराह कर रहा है। इसी दावे के साथ पार्टी ने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ के नारे के तहत राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है। दिल्ली में होने वाला पैदल मार्च भी इसी अभियान का हिस्सा है।
1 नवंबर को INDIA गठबंधन की मेगा रैली
BJP के मार्च के कुछ दिन बाद ही दिल्ली में विपक्ष का बड़ा राजनीतिक जमावड़ा होने वाला है। INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में मेगा रैली करने की तैयारी की है। कांग्रेस इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों को जुटाने के लिए अपने नेताओं और सहयोगी संगठनों को सक्रिय कर रही है। रैली के जरिए विपक्ष कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों को उठाने के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी करेगा।
यह रैली विपक्ष के ‘दिल्ली चलो मार्च’ का समापन होगी। कांग्रेस नेताओं ने इसे चुनावी गड़बड़ियों और SIR प्रक्रिया के खिलाफ विपक्ष की एकजुटता दिखाने का अहम मौका बताया है। चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर राजनीतिक विवाद बना हुआ है। ऐसे में दिल्ली में लगातार होने वाले इन कार्यक्रमों से मतदाता सूची के पुनरीक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान
कांग्रेस ने इसी महीने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ नाम से राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की थी। इसके तहत 10 से 20 अक्टूबर के बीच विभिन्न स्थानों पर मार्च निकालने की योजना बनाई गई थी। पार्टी का उद्देश्य SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर अपने आरोपों के बारे में लोगों को जागरूक करना था। अब 1 नवंबर की रैली को इसी व्यापक अभियान की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं, जबकि BJP विपक्ष के आरोपों को भ्रामक बता रही है।
रैली से कारोबार प्रभावित होने की आशंका
राजनीतिक टकराव के बीच INDIA गठबंधन की प्रस्तावित रैली को लेकर दिल्ली के व्यापारी भी सामने आ गए हैं। व्यापारियों को आशंका है कि रैली के कारण यातायात पर पाबंदियां लगने, सड़कों के बंद होने और सुरक्षा व्यवस्था के चलते प्रमुख बाजारों तक पहुंच प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि दिवाली के आसपास का समय कारोबार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है और इस दौरान आवाजाही में बाधा आने से बिक्री पर असर पड़ सकता है।
इसी चिंता को लेकर सोमवार को व्यापारियों ने कश्मीरी गेट पर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कांग्रेस से 1 नवंबर की रैली को दिवाली के बाद आयोजित करने की अपील की है। व्यापारियों का कहना है कि चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली और कश्मीरी गेट जैसे प्रमुख व्यावसायिक इलाकों में ग्राहकों की आवाजाही बाधित होने से कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बृजेश गोयल बोले- INDIA गठबंधन के सभी दलों को लिखेंगे पत्र
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा है कि उनका संगठन INDIA गठबंधन में शामिल सभी राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर रैली की तारीख बदलने का आग्रह करेगा। व्यापारियों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भी संपर्क किया है। उनकी मांग है कि त्योहारी खरीदारी के महत्वपूर्ण दौर को देखते हुए रैली की तारीख आगे बढ़ाई जाए, ताकि बाजारों में सामान्य कारोबार और लोगों की आवाजाही पर असर न पड़े।
व्यापारियों की चिंता केवल यातायात तक सीमित नहीं है। दिल्ली के प्रमुख बाजारों में दिवाली से पहले ग्राहकों की बढ़ती आवाजाही के बीच किसी भी तरह की बाधा से दुकानदारों के कारोबार पर असर पड़ने की आशंका है। इसी आधार पर व्यापारी संगठन रैली के समय और तारीख पर पुनर्विचार करने की मांग कर रहे हैं।
‘वोट चोरी पर सवाल उठाएं व्यापारी’
रैली को लेकर व्यापारियों के विरोध पर राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि व्यापारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग करें, तो उनका प्रदर्शन ‘30 सेकंड में रुक जाएगा।’ राहुल गांधी के इस बयान ने राजनीतिक विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। जहां व्यापारी त्योहारी सीजन में कारोबार और बाजारों तक पहुंच को लेकर चिंतित हैं, वहीं राहुल गांधी ने इस मुद्दे को चुनावी प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग से जोड़कर जवाब दिया है।
दिल्ली में राजनीतिक मुकाबले के साथ बाजारों पर भी नजर
दिल्ली में 28 अक्टूबर का BJP मार्च और 1 नवंबर की INDIA गठबंधन की रैली ऐसे समय हो रही है, जब SIR और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं। BJP अपने अभियान के जरिए विरोधी दल के आरोपों का जवाब देने की तैयारी में है, जबकि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल रामलीला मैदान की रैली के माध्यम से अपनी मांगों को मजबूती से उठाना चाहते हैं। इस राजनीतिक खींचतान के बीच व्यापारियों ने भी अपनी चिंताएं सामने रख दी हैं। अब इस पूरे घटनाक्रम में राजनीतिक दलों के शक्ति प्रदर्शन के साथ यह सवाल भी अहम है कि प्रस्तावित रैली के दौरान दिल्ली के प्रमुख बाजारों और यातायात व्यवस्था पर किस तरह का असर पड़ता है।







