प्रकाश मेहरा
एक्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली: दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण और स्मॉग की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। निगम की ओर से सड़कों से धूल हटाने, सफाई व्यवस्था को मजबूत करने, निर्माण एवं विध्वंस मलबे के वैज्ञानिक निस्तारण और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर कार्रवाई के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।
एमसीडी की स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए निगम के पास फिलहाल 66 मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें, 167 वाटर स्प्रिंकलर और 28 एंटी-स्मॉग गन कार्यशील हैं। इन उपकरणों के प्रभावी इस्तेमाल के लिए सभी जोन में स्थान भी चिह्नित किए गए हैं।
1,202 किलोमीटर सड़कों के सुधार का लक्ष्य
सत्या शर्मा के मुताबिक, सड़क की धूल को नियंत्रित करने के लिए वर्ष 2026 में 1,202 किलोमीटर सड़कों के पुनर्वास और सुधार का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत जनवरी से सितंबर तक 745 किलोमीटर सड़कों का काम पूरा किया जा चुका है।
वहीं, अप्रैल से सितंबर के बीच 8,141 गड्ढों की मरम्मत कर 17,132 वर्ग मीटर सड़क क्षेत्र को दुरुस्त किया गया है। इसके अतिरिक्त, विशेष अभियान के तहत 3,750 मीट्रिक टन सिल्ट हटाई गई है। निगम का उद्देश्य सड़कों की बेहतर स्थिति सुनिश्चित करने के साथ धूल के कारण होने वाले प्रदूषण को कम करना है।
सफाई व्यवस्था मजबूत करने के लिए नई मशीनें होंगी तैनात
एमसीडी सफाई व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक मशीनों और वाहनों की तैनाती की दिशा में भी काम कर रही है। सत्या शर्मा ने बताया कि चार घन मीटर क्षमता वाले 15 सीएनजी और दो घन मीटर क्षमता वाले 55 इलेक्ट्रिक एमआरएसएम वाहनों की खरीद के लिए वर्क ऑर्डर जारी किया गया है। इन वाहनों को नवंबर तक चरणबद्ध तरीके से तैनात किए जाने की संभावना है।
इसके अलावा, 31 दिसंबर 2026 तक 700 हॉपर पिकर्स तैनात करने का लक्ष्य रखा गया है। हाल ही में खरीदे गए 12 वाटर स्प्रिंकलर और एंटी-स्मॉग गन को भी जल्द ही उपयोग में लाया जाएगा। निगम को उम्मीद है कि इन संसाधनों की मदद से सड़कों की सफाई, धूल नियंत्रण और प्रदूषण कम करने के प्रयासों को गति मिलेगी।
निर्माण मलबे के निस्तारण के लिए ‘शहरी मल्बा’ ऐप
निर्माण एवं विध्वंस से निकलने वाले मलबे का उचित निस्तारण भी प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सत्या शर्मा ने बताया कि इस उद्देश्य से एमसीडी ने ‘शहरी मल्बा’ ऐप शुरू किया है, जिसके माध्यम से निर्माण मलबे के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 5,000 से 6,000 मीट्रिक टन निर्माण मलबा निकलता है। यदि इसका उचित तरीके से निस्तारण नहीं किया जाए, तो यह शहर की स्वच्छता और पर्यावरण के लिए चुनौती बन सकता है।
छह महीने में लगाए गए 4 लाख से अधिक पौधे और झाड़ियां
पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के तहत एमसीडी क्षेत्र में अप्रैल से सितंबर के बीच 1,34,029 पेड़ और 2,74,465 झाड़ियां लगाई गई हैं। निगम की ओर से किए गए इस पौधरोपण को हरित क्षेत्र बढ़ाने और पर्यावरण को बेहतर बनाने के प्रयासों का हिस्सा बताया गया है।
प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण निगम की प्राथमिकता
सत्या शर्मा ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए धूल और कचरे के स्रोतों पर नियंत्रण, नियमित सफाई तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है। निगम का प्रयास है कि उपलब्ध मशीनों और संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए प्रदूषण नियंत्रण अभियान को अधिक मजबूत बनाया जाए।
अब देखना होगा कि नई मशीनों और हॉपर पिकर्स की तैनाती के साथ दिल्ली नगर निगम की ये तैयारियां राजधानी में धूल और प्रदूषण कम करने में कितनी प्रभावी साबित होती हैं।







