रुद्रप्रयाग: हिमालय में समुद्रतल से सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट शुक्रवार 6 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे. इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चारण, विधि-विधान और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के बीच शुभ मुहूर्त में कपाट बंद करने की प्रक्रिया संपन्न होगी. कपाट बंद होने को लेकर मंदिर समिति ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं. इसके साथ ही इस वर्ष की तुंगनाथ धाम यात्रा का भी समापन हो जाएगा.
कपाट बंद होने के बाद भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ के लिए प्रस्थान करेगी. डोली शुक्रवार को प्रथम रात्रि प्रवास के लिए चोपता पहुंचेगी. यहां रात्रि विश्राम के बाद अगले दिन 7 नवंबर को भनकुण्ड पहुंचेगी, जहां डोली का अंतिम रात्रि प्रवास होगा. मंदिर समिति के तुंगनाथ प्रबंधक प्रकाश पुरोहित ने बताया कपाट बंद करने को लेकर मंदिर समिति की ओर से सभी व्यवस्थाएं पूर्ण कर ली गई हैं. शुक्रवार को निर्धारित शुभ लग्न में वैदिक मंत्रोच्चारण एवं धार्मिक परंपराओं के अनुसार कपाट बंद किए जाएंगे. इसके बाद भगवान की उत्सव डोली पारंपरिक यात्रा पड़ावों से होते हुए 8 नवंबर को शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ पहुंचेगी.
केदारनाथ पहुंच रहे बंपर श्रद्धालु:केदारनाथ की यात्रा भी अब अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रही है. आगामी 11 नवंबर को शीतकाल के लिए धाम के कपाट बंद होंगे. उससे पहले केदारनाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है. देश के विभिन्न राज्यों से पहुंच रहे श्रद्धालुओं की आवाजाही से इन दिनों पूरा धाम भक्तिमय बना हुआ है. मंदिर परिसर बाबा के जयकारों से गुंजायमान है. केदारनाथ यात्रा में अब तक 19 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन कर चुके हैं. श्रद्धालुओं की यह संख्या भगवान केदारनाथ के प्रति देशभर में व्याप्त अटूट आस्था और विश्वास को दर्शाती है.
रुद्रप्रयाग जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा धाम में लगातार गिरते तापमान और संभावित बर्फबारी को देखते हुए श्रद्धालुओं से विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है. यात्रियों को पर्याप्त गर्म कपड़े, आवश्यक दवाइयां और जरूरी सामग्री साथ रखने की सलाह दी गई है. धाम के लिए रवाना होने से पहले मौसम की जानकारी अवश्य प्राप्त करें.







