विकाश शुक्ला
उमरिया, मध्य प्रदेश। जिले की चंदिया तहसील अंतर्गत नरवार-25 क्षेत्र में मछडार पुल से लगी नदी में लंबे समय से रेत निकाले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार क्षेत्र में रेत का उत्खनन और परिवहन लगातार जारी है। आसपास के क्षेत्रों में रेत की सप्लाई भी धड़ल्ले से होने की बात कही जा रही है।

हैरानी की बात यह है कि क्षेत्र की सड़कों के किनारे रेत के ढेर लगे होने की जानकारी के बावजूद कथित अवैध उत्खनन और परिवहन पर प्रभावी कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रेत का उत्खनन करने के बाद वाहन जंगल विभाग के रास्ते से धड़ल्ले से निकल रहे हैं। वहीं जंगल चौकी होने के बाद भी कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं दिखाई दे रही। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर चौकी और संबंधित विभाग की निगरानी व्यवस्था कितनी सक्रिय है ? जिले में खनिज विभाग की लापरवाही और गहरी नींद में जंगल विभाग की कारस्तानी से नदी का अस्तित्व खतरे में है।

ठेका वैध रेत निकासी अवैध –
जिले में रेत खनन का ठेका बाबा महाकाल मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड के पास है। वहीं ठेका कंपनी के कामकाज और क्षेत्र में हो रहे कथित अवैध उत्खनन को लेकर भी चर्चाएं हैं। यदि क्षेत्र में नियमानुसार रेत का उत्खनन हो रहा है, तो संबंधित विभाग को अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर कार्यवाही करनी चाहिए। लेकिन बिना अनुमति धड़ल्ले से प्रतिबंधित क्षेत्रों से रेत निकाली जा रही है। सूत्रों की माने तो कंपनी द्वारा दबाव बनाकर कार्यवाही कराई जाती है, बाद में उन्हें सेटिंग करके टीपी या टोकन बेचकर रेत कहीं से भी निकलवाने का बड़ा खेल किया जाता है।
प्रभावी कार्यवाही की जरूरत
मछडार पुल के पास नदी से रेत निकालने की अनुमति नहीं है। लेकिन सड़क किनारे जमा रेत के ढेर किसके हैं यह बड़ा सवाल है। सूत्रों के द्वारा बताया गया कि रेत का अवैध उत्खनन कर सड़क किनारे ढेर लगाया जाता है।जबकि जंगल चौकी के जिम्मेदार आंख बंद किये हैं।वहीं बाबा महाकाल मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड के ठेका क्षेत्र में खनन की निगरानी जिस अधिकारी की जिम्मेदारी है, वह कार्यालय में कुर्सी तोड़ते हैं। प्रशासन को मछडार पुल से लेकर गांव नरवार-25 के पूरे क्षेत्र का औचक निरीक्षण कर नदी में हुए उत्खनन, रेत के भंडारण और परिवहन की निष्पक्ष जांच करने से ही चाहिए यह रेत के ढेर का खुलासा हो सकेगा।







