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सस्ते नहीं होंगे खाद्य तेलों के दाम, इंडोनेशिया के इस फैसले से फेल हुई पूरी प्लानिंग

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
February 9, 2022
in विश्व, व्यापार
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edible oil prices
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हाल के कुछ दिनों से लग रहा था कि भारत में खाद्य तेलों के दाम और तेजी से गिरेंगे. ऐसा लग रहा था कि 5 प्रांतों के चुनाव से पहले सरकार की पूरी प्लानिंग कामयाब साबित होगी और लोगों को सरसों या रिफाइंड जैसे तेल कम दाम पर मिलेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हो सका. पहले से दाम घटे जरूर हैं, लेकिन यह कमी ऊंट के मुंब में जीरा के माफिक है. चुनावों (assembly election) से पूर्व ऐसा कभी नहीं देखा गया कि खाद्य तेलों के दाम ऐसे चढ़े-बढ़े रहे हों. हालांकि सरकार ने अपने स्तर पर कोई कोर-कसर न छोड़ा जिससे कि खाद्य तेलों के दाम जमीन पर लाए जाएं. लेकिन इंडोनेशिया के एक कदम ने सरकार की पूरी प्लानिंग को नाकाम कर दिया.

इंडोनेशिया ने भारत की कड़की से बेपरवाह होते हुए अपने तेलों के निर्यात को कम कर दिया है. यूं कहें कि इंडोनेशिया ने अपने तेलों के निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया है. इसका सबसे बुरा असर भारत पर देखा जा रहा है क्योंकि भारत ही उसका सबसे बड़ा खरीदार है. आने वाले समय में जल्द खाद्य तेलों के दाम गिरने की संभावना नहीं है.

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चुनाव पर तेल के दाम का असर
भारत के चुनाव में महंगाई हमेशा से बड़ा रोल निभाती आई है. सरकारों का बनना और बिगड़ना इस पर निर्भर करता है. इस बात को जहन में रखते हुए सरकार ने बहुत पहले से खाद्य तेलों के दाम काबू में रखने के लिए कई कदम उठाए थे. जैसे आयात टैक्स कम किया गया, कोई सेठ-साहूकार या मिलर कितना तिलहन जमा रखेगा इसकी सीमा तय की गई ताकि जमाखोरी न हो, सरकार ने तिलहन और खाद्य तेलों के वायदा कारोबार पर रोक लगा दी. सरकार के इन प्रयासों से थोड़ी कामयाबी मिली और 200 रुपये या उससे ज्यादा प्रति लीटर पर पहुंचा सरसों तेल आज 170-175 रुपये लीटर पर है. इसे बड़ी उपलब्धि नहीं तो कम से कम बड़ी राहत जरूर कह सकते हैं.

क्या किया इंडोनेशिया ने
चूंकि भारत अपनी खपत का दो-तिहाई खाद्य तेल आयात करता है, इसलिए विश्व बाजारों में ज्योंहि तेलों के दाम बढ़े, वैसे ही सरकार की सभी कोशिशें धड़ाम होती लग रही हैं. इसमें बड़ा रोल इंडोनेशिया का है जिसने अपने उत्पादकों से कहा है कि वे अपनी कुल हिस्सेदारी का 20 परसेंट तेल या तिलहन लोकल मार्केट में ही बेचें जिससे कि वहां की महंगाई को कम किया जा सके. इंडोनेशिया के इस कदम ने भारत को सकते में डाल दिया है. इंडोनेशिया से भारत 21 परसेंट जबकि चीन 14 परसेंट पाम आयल का आयात करता है. अब इंडोनेशिया ने निर्यात घटा दिया है, इसलिए भारत में पाम आयल कम आ रहे हैं. सप्लाई हो भी रही है तो वह महंगे रेट पर देखी जा रही है.

कितने बड़ गए दाम
मुंबई स्थित सॉलवेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (SEA) के एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर बीवी मेहता ‘रॉयटर्स‘ से कहते हैं, इंडोनेशिया के फैसले ने तेलों के दाम में नरमी लाने के भारत के प्रयासों पर पानी फेर दिया है. भारत में सबसे अधिक पाम आयल की खपत होती है और इसी तेल का दाम सबसे अधिक बढ़ा है. इसी साल तक पाम आयल के दाम में 12 परसेंट का उछाल आया है जो कि प्रति 10 किलो के लिए 1228 रुपये पर पहुंच गया है. मई 2021 में भी बड़ी महंगाई दिखी थी जब पाम आयल का दाम 1280 रुपये को छू गया था. पाम आयल की कमी को पूरा करने के लिए कारोबारी बाजार में सोया आयल और सनफ्लावर आयल उतार रहे हैं जिसके चलते इन दोनों तेलों के दाम भी लगातार बढ़ रहे हैं.

और बढ़ेंगे तेल के रेट
‘रॉयटर्स’ ने लिखा है, मार्च में डिलीवरी के लिए क्रूड पाम आयल का रेट 1450 डॉलर प्रति टन चल रहा है. इसमें लागत, इंश्योरेंस और ढुलाई का खर्च शामिल है. दूसरी ओर क्रूड सोया आयल का रेट 1490 डॉलर और सोयाबीन आयल का रेट 1455 डॉलर चल रहा है. एक साल पहले पाम आयल का दाम 100 डॉलर और सोया आयल-सनफ्लावर आयल 250 डॉलर पर बिक रहे थे. लेकिन साल भर में ही कीमतें आसमान छू गई हैं. दिसंबर महीने में भारत की खुदरा महंगाई दर 4.05 परसेंट थी और जानकारों का कहना है कि आने वाले महीने में स्थिति और बिगड़ सकती है. इसका असर खाद्य तेलों के दाम पर भी देखा जा रहा है और आगे भी देखा जा सकता है.

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