प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली: शनिवार, 12 जुलाई को सुबह करीब 7:00 बजे, उत्तर-पूर्वी दिल्ली के वेलकम थाना क्षेत्र में स्थित जनता मजदूर कॉलोनी, सीलमपुर की गली नंबर 5 में एक चार मंजिला रिहायशी इमारत अचानक ढह गई। इस हादसे ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। इमारत के मलबे में करीब 12 लोगों के फंसे होने की आशंका जताई गई है। यह इमारत लगभग 30-35 गज के क्षेत्र में बनी थी और इसमें एक परिवार के 10 लोग रहते थे, जिसमें तीन महिलाएं और तीन बच्चे शामिल थे।
दमकल विभाग की सात गाड़ियां मौजूद
हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर डिपार्टमेंट, दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। दमकल विभाग की सात गाड़ियां और भारी मशीनरी की मदद से बचाव कार्य शुरू किया गया। स्थानीय लोगों ने भी राहत कार्यों में सक्रिय योगदान दिया, और कुछ लोगों ने दमकल विभाग के पहुंचने से पहले ही मलबे से लोगों को निकालने की कोशिश शुरू कर दी थी।
अब तक 6 से 8 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकालकर नजदीकी अस्पतालों (जेपीसी और जीटीबी अस्पताल) में भर्ती कराया गया है। हालांकि, दुखद खबर यह है कि मलबे से निकाले गए एक पुरुष और एक महिला की मौत हो चुकी है। मृतकों के शव जीटीबी अस्पताल भेजे गए हैं। एक साल के बच्चे सहित 8 लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है। अभी भी 3 से 6 लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है, और बचाव कार्य तेजी से जारी है।
पुलिस के अनुसार, यह इमारत मतलूब नाम के व्यक्ति की थी, जो अपने परिवार के साथ इसमें रहता था। हादसे के समय परवेज (32), उनकी पत्नी सिज़ा (21), उनका 14 महीने का बेटा अहमद और भाई नावेद (19) इमारत में मौजूद थे, जिन्हें सुरक्षित निकाल लिया गया है। सामने वाली इमारत को भी इस हादसे में नुकसान पहुंचा है।
क्या है हादसे का कारण
इमारत के ढहने का सटीक कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है। हालांकि, प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह इमारत काफी पुरानी और जर्जर हालत में थी। हाल के दिनों में हुई बारिश ने इसकी नींव को और कमजोर किया हो सकता है। कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पहले ही इमारत में कुछ गड़बड़ियों का अंदाजा लगाया था। इसके अलावा, दिल्ली भूकंपीय जोन IV में आती है, जहां हल्के भूकंप के झटके पुरानी इमारतों को और कमजोर कर सकते हैं।
जनता मजदूर कॉलोनी घनी आबादी वाला इलाका है, और संकरी गलियों के कारण बचाव कार्य में काफी मुश्किलें आ रही हैं। भारी मशीनों को मलबे तक पहुंचाने में कठिनाई हो रही है, जिससे राहत कार्य धीमा पड़ रहा है। फिर भी, टीमें और स्थानीय लोग मिलकर हर संभव कोशिश कर रहे हैं।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
यह दिल्ली में इमारत ढहने की पहली घटना नहीं है। अप्रैल 2025 में मुस्तफाबाद (दयालपुर) में एक चार मंजिला इमारत ढहने से 11 लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें एक ही परिवार के 8 सदस्य शामिल थे। उस हादसे का कारण ग्राउंड फ्लोर पर चल रहा निर्माण कार्य बताया गया था। जनवरी से अप्रैल 2025 तक दिल्ली फायर सर्विस को इमारत ढहने की 27 शिकायतें मिली थीं, जो पिछले साल की तुलना में 55.5% अधिक थीं। ये आंकड़े दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों और पुरानी इमारतों की खराब स्थिति को दर्शाते हैं।
स्थानीय निवासियों ने क्या बताया
एक स्थानीय निवासी अस्मा ने बताया कि “सुबह करीब 7:00 बजे तेज आवाज सुनाई दी और चारों तरफ धूल छा गई। जब वह बाहर निकलीं, तो पड़ोसी का घर ढह चुका था। एक अन्य निवासी ने बताया कि सुबह 6:45 बजे बिजली गुल होने के बाद इमारत ढह गई। स्थानीय लोग मलबे को हटाने में फायर विभाग की मदद कर रहे हैं।
तलाशी और बचाव कार्य जारी
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के एडिशनल डीसीपी संदीप लांबा ने बताया कि “सुबह 7:15 बजे के आसपास सूचना मिली थी, और बचाव कार्य में पुलिस, NDRF, सिविल डिफेंस, और स्थानीय लोग शामिल हैं। दिल्ली अग्निशमन सेवा के प्रमुख अतुल गर्ग ने कहा कि सात दमकल गाड़ियां मौके पर हैं, और तलाशी अभियान जारी है।
#WATCH उत्तर पूर्वी दिल्ली अतिरिक्त डीसीपी संदीप लांबा ने कहा, "सुबह 7:15 बजे हमें सूचना मिली…7 लोगों को बचा लिया गया है शेष के लिए बचाव अभियान जारी है। अभी करीब 3-4 लोगों की फंसे होने की आशंका है। हम जल्द ही इन्हें बचा लेंगे। करीब 10-15 साल पुराना घर होगा।" https://t.co/RDbCHTCWaR pic.twitter.com/MAAFhDQJoZ
— ANI_HindiNews (@AHindinews) July 12, 2025
बचाव कार्य अभी भी जारी है, और राहत की बात यह है कि अभी तक जनहानि की संख्या सीमित है। हालांकि, मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए टीमें दिन-रात काम कर रही हैं। प्रशासन और स्थानीय लोग मिलकर इस आपदा से निपटने की कोशिश कर रहे हैं।
यह हादसा दिल्ली में पुरानी और जर्जर इमारतों की स्थिति और अनधिकृत निर्माणों की समस्या को फिर से उजागर करता है। प्रशासन को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों से बचा जा सके।







