प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पढ़ाई कर रहे त्रिपुरा के 24 वर्षीय छात्र एंजेल चकमा की हत्या का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर उत्तर भारत में पूर्वोत्तर राज्यों से आने वाले छात्रों की सुरक्षा और भेदभाव का मुद्दा चर्चा में आ गया है। घटना के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है और छात्रों व स्थानीय लोगों ने कैंडल मार्च निकालकर न्याय की मांग की।
पूर्वोत्तर के छात्रों में भय और असुरक्षा की भावना
जानकारी के अनुसार, एंजेल चकमा त्रिपुरा के रहने वाले थे और देहरादून में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे थे। हाल ही में उनकी हत्या कर दी गई, जिससे न सिर्फ उनके परिवार बल्कि देशभर में पढ़ाई कर रहे पूर्वोत्तर के छात्रों में भय और असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, घटना के पीछे के कारणों और आरोपियों को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
विरोध और आक्रोश
घटना के बाद देहरादून में छात्रों और सामाजिक संगठनों ने कैंडल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि “पूर्वोत्तर के छात्र अक्सर नस्लीय टिप्पणियों, अपमानजनक व्यवहार और भेदभाव का सामना करते हैं, लेकिन प्रशासन समय रहते ठोस कदम नहीं उठाता।
सरकार ने क्या दी प्रतिक्रिया ?
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने एंजेल चकमा के परिजनों से बातचीत कर कहा कि “निष्पक्ष और त्वरित जांच का आश्वासन दिया। पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की बात कही। सरकार का कहना है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
विवादित बयान से बढ़ा मामला
इस बीच, मामले से जुड़ा एक बीजेपी नेता का बयान भी सामने आया है, जिसमें कहा गया— “हम भारतीय हैं, चाइनीज नहीं… मोमोज़ नहीं हैं।”
यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इसकी तीखी आलोचना हो रही है। गौरतलब है कि “इससे पहले एंजेल चकमा ने भी पहचान और सम्मान को लेकर इसी तरह की बात कही थी, जो अब इस मामले को और संवेदनशील बना रही है।”
पुराने सवाल फिर ज़िंदा
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पहले भी देश के अलग-अलग हिस्सों में पूर्वोत्तर के छात्रों के साथ:नस्लीय टिप्पणियों, मारपीट, भेदभावपूर्ण व्यवहार के मामले सामने आते रहे हैं। एंजेल चकमा की हत्या ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि “क्या पूर्वोत्तर के छात्र देश के अन्य राज्यों में वास्तव में सुरक्षित हैं ?
छात्रों की सुरक्षा के लिए ठोस नीति
फिलहाल पुलिस जांच जारी है। छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि “दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। पूर्वोत्तर के छात्रों की सुरक्षा के लिए ठोस नीति बनाई जाए। भेदभाव और नस्लीय टिप्पणियों पर जीरो टॉलरेंस अपनाई जाए।
एंजेल चकमा की हत्या केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि देश में समानता, सुरक्षा और सामाजिक सोच पर एक गंभीर सवाल है। अब देखना यह होगा कि सरकार और प्रशासन इस मामले में आश्वासनों से आगे बढ़कर कितनी ठोस कार्रवाई करते हैं।






