Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

विश्लेषण : डूसू चुनाव में एबीवीपी का दबदबा, जेन ज़ी के वोट पर क्यों छिड़ी बहस?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
September 20, 2026
in राष्ट्रीय, विशेष
A A
ABVP's dominance in DUSU elections
26
SHARES
858
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव के नतीजों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने चार में से तीन प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की है। अध्यक्ष पद पर यश डबास, सचिव पद पर रिया छावड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह विजयी हुए। वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत दर्ज की। आइये एग्जीक्यूटिव एडिटर प्रकाश मेहरा से विस्तार में समझते हैं।

इन नतीजों के बाद छात्र राजनीति के साथ-साथ जेन ज़ी के राजनीतिक रुझान, विपक्षी वोटों के बंटवारे और छात्र संगठनों की रणनीति को लेकर भी बहस तेज हो गई है।

इन्हें भी पढ़े

Rahul Gandhi's

राहुल गांधी का युवा कनेक्ट, डूसू में कांग्रेस का डि-कनेक्ट, अब रणनीति पर उठे सवाल !

September 20, 2026
Dattatreya Hosabale

श्रम साधक मजबूत होंगे तो समाज और भविष्य दोनों मजबूत होंगे : दत्तात्रेय होसबाले

September 20, 2026
next generation missile vessels

समंदर में भारत का नया ब्रह्मास्त्र, स्वदेशी हथियारों से लैस NGMV प्रोजेक्ट पर काम शुरू

September 19, 2026
Indian and US armies

भारत-अमेरिकी सेनाओं का युद्ध अभ्यास, AI-ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर पर फोकस

September 19, 2026
Load More

एबीवीपी की जीत पर बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रिया

डूसू चुनाव के नतीजों के बाद बीजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं ने एबीवीपी को बधाई दी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एबीवीपी की जीत पर कार्यकर्ताओं को बधाई दी। बीजेपी नेताओं ने इन नतीजों को युवाओं और छात्रों के बीच राष्ट्रवादी विचारधारा तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों के समर्थन से जोड़कर देखा है।

दिल्ली से बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि “चुनाव परिणामों से यह स्पष्ट होता है कि छात्रों ने एबीवीपी के पक्ष में मतदान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि चार में से तीन पदों पर जीत और एनएसयूआई का एक भी पद नहीं जीत पाना कांग्रेस के लिए गंभीर राजनीतिक संकेत है।”

हालांकि, चुनाव परिणामों की राजनीतिक व्याख्या को केवल डूसू के नतीजों तक सीमित रखना भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि विश्वविद्यालय चुनाव का परिणाम पूरे देश के युवाओं की राजनीतिक सोच का प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व करता है, ऐसा निष्कर्ष निकालने के लिए व्यापक आंकड़ों की आवश्यकता होगी।

एनएसयूआई ने उठाए मतदान और मतगणना पर सवाल

कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई को इस बार चारों प्रमुख पदों में से कोई भी पद नहीं मिला। एनएसयूआई के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार विजय शंकर मीणा ने कुछ कॉलेजों में कथित फर्जी मतदान और चुनावी अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उन्होंने स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज, रामजस कॉलेज और शिवाजी कॉलेज में कथित घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई गई है और मामले को अदालत में ले जाने की बात कही।

कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने भी मतगणना और मतदान केंद्रों को लेकर सामने आए आरोपों की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि कम अंतर से तय हुई सीटों पर अनियमितताओं का प्रभाव पड़ा है, तो इसकी जांच होनी चाहिए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही इनके आधार पर चुनाव परिणामों पर अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है।

सबसे ज्यादा चर्चा निर्दलीय दीपांशु शौकीन की जीत की

डूसू चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन की जीत ने राजनीतिक विश्लेषण को एक अलग दिशा दी है। उनकी जीत को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वे छात्र राजनीति में संगठनात्मक टिकट के बजाय स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में मैदान में थे।

दीपांशु शौकीन ने चुनाव के बाद कहा कि उनका संघर्ष दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए रहा है और आगे भी वह छात्रों के मुद्दों को उठाते रहेंगे। यहीं से एक महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है—क्या छात्र मतदाता पारंपरिक राजनीतिक संगठनों से अलग होकर भी अपनी पसंद तय कर रहे हैं?

प्रकाश मेहरा का विश्लेषण: बंटे हुए वोटों की भूमिका

पत्रकार और लेखक प्रकाश मेहरा के मुताबिक डूसू के नतीजों को केवल एबीवीपी की जीत और एनएसयूआई की हार के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि “जब एनएसयूआई से जुड़े एक बागी उम्मीदवार ने निर्दलीय के रूप में उपाध्यक्ष पद पर बड़ी जीत दर्ज की है, तो यह कांग्रेस और उसके छात्र संगठन की चुनावी रणनीति पर विचार करने का विषय जरूर है।”

उनके अनुसार, एबीवीपी संगठन और संसाधनों के स्तर पर चुनाव के लिए बेहतर तरीके से तैयार दिखाई दी और चार में से तीन पदों पर जीत इसका परिणाम है। इसके साथ ही विपक्षी या गैर-एबीवीपी वोटों के बंटवारे ने भी परिणामों को प्रभावित किया हो सकता है।

प्रकाश मेहरा का कहना है कि “जेन ज़ी का वोट किसी एक राजनीतिक संगठन के साथ स्थायी रूप से जुड़ा हुआ मानना सही नहीं होगा। युवा मतदाताओं के मुद्दे और राजनीतिक प्राथमिकताएं अलग-अलग हो सकती हैं और विभिन्न संगठनों के बीच उनका समर्थन बंट सकता है।”

जेन ज़ी के वोट को लेकर क्यों बढ़ी बहस ?

डूसू परिणामों के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या जेन ज़ी का बड़ा हिस्सा मौजूदा राजनीतिक विकल्पों से दूरी बनाए हुए है या फिर वह अलग-अलग मुद्दों और उम्मीदवारों के आधार पर मतदान कर रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास ने डूसू चुनाव के नतीजों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि विपक्षी वोटों के बंटने से एबीवीपी को फायदा मिला।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि एक छात्र संघ चुनाव को पूरे देश की युवा पीढ़ी के राजनीतिक मूड का पैमाना मानना उचित नहीं है। उन्होंने गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में एबीवीपी की हार का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि अलग-अलग विश्वविद्यालयों के परिणामों को एक ही राजनीतिक निष्कर्ष से कैसे जोड़ा जा सकता है। सौरव दास ने विपक्षी दलों और संगठनों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

डूसू का परिणाम क्या संकेत देता है ?

डूसू चुनाव का परिणाम तीन अलग-अलग तस्वीरें सामने रखता है। पहली, एबीवीपी ने संगठनात्मक स्तर पर मजबूत प्रदर्शन करते हुए चार में से तीन प्रमुख पद हासिल किए हैं।

दूसरी, एनएसयूआई कोई प्रमुख पद हासिल नहीं कर सकी, जबकि उसके एक बागी उम्मीदवार का निर्दलीय के तौर पर जीतना संगठन और उम्मीदवार चयन की रणनीति पर सवाल खड़े करता है।

तीसरी, जेन ज़ी के राजनीतिक व्यवहार को केवल किसी एक चुनाव के परिणाम से समझना मुश्किल है। अलग-अलग विश्वविद्यालयों और चुनावों में अलग-अलग परिणाम सामने आ सकते हैं। इसलिए डूसू चुनाव को युवाओं की पूरी पीढ़ी की राजनीतिक पसंद का अंतिम प्रमाण मानने के बजाय इसे छात्र राजनीति के एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखना अधिक उचित होगा।

चुनावी अनियमितताओं को लेकर आरोप

डूसू चुनाव में एबीवीपी की तीन पदों पर जीत निश्चित रूप से संगठन की चुनावी ताकत को दिखाती है। लेकिन इसके साथ ही निर्दलीय उम्मीदवार की जीत, एनएसयूआई की हार, विपक्षी वोटों का बंटवारा और चुनावी अनियमितताओं को लेकर लगाए गए आरोप—ये सभी ऐसे पहलू हैं जिन पर आगे भी चर्चा होती रहेगी।

प्रकाश मेहरा के विश्लेषण के अनुसार, इस चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण सवाल केवल यह नहीं है कि कौन जीता और कौन हारा, बल्कि यह भी है कि “बदलती हुई युवा राजनीति को राजनीतिक संगठन किस तरह समझते हैं और जेन ज़ी के बिखरे हुए राजनीतिक समर्थन को वे किस तरह संबोधित करते हैं।”

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल

भारतीय लोकतंत्र के दो दीमक

August 17, 2022
Preeti

वेकोलि की प्रीती ने साइकिल से पूर्ण की 700 KM की यात्रा

June 28, 2025
NDA and opposition

NDA और विपक्ष में शक्ति प्रदर्शन, कौन किसके खेमे में, जानिए

July 17, 2023
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • घर बैठे ऐसे करें अपने फेफड़ों को डिटॉक्स, रोज पिएं ये ड्रिंक
  • IMDb पर 9+ रेटिंग वाले 4 क्राइम थ्रिलर शोज, हर एपिसोड में ऐसा ट्विस्ट कि कांप जाएगी रूह
  • राहुल गांधी का युवा कनेक्ट, डूसू में कांग्रेस का डि-कनेक्ट, अब रणनीति पर उठे सवाल !

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.