नई दिल्ली : ईरान के साथ चल रहे युद्ध में अमेरिका अब अपनी रणनीति पूरी तरह मोड़ रहा है. पेंटागन LUCAS(Low-Cost Uncrewed Combat Attack System) कामिकाजे ड्रोन की बड़े पैमाने पर उत्पादन की योजना बना रहा है. यह ठीक उसी तरह का सस्ता, एकतरफा हमला करने वाला ड्रोन है जैसा ईरान सालों से इस्तेमाल कर रहा है. एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने बताया कि लुकास ड्रोन ईरान पर हालिया हमलों में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर चुका है और अब इसे बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए और बेहतर बनाया जा रहा है. ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका के पारंपरिक हथियारों के बजाय इन हल्के-फुल्के ड्रोन्स ने बेहतरीन प्रदर्शन किए हैं.
अभी तक दर्जनों ड्रोन बनाए जा चुके हैं, लेकिन सैन्य अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि युद्ध में कितने इस्तेमाल किए गए. यह बदलाव अमेरिकी रणनीति में बड़ा टर्निंग पॉइंट है. सालों तक महंगी मिसाइलों और हवाई हमलों पर निर्भर रहने वाला अमेरिका अब ईरान की सस्ते और भारी मात्रा में ड्रोन वाली रणनीति को अपनाने लगा है. ईरान के शाहेद- 136 ड्रोन और उसके रूसी वर्जन गेहन का कहर हाल के युद्धों में देखा जा चुका है. खासतौर पर इजरायल के खिलाफ 12 दिन के युद्ध में इस ड्रोन ने एयर डिफेंस सिस्टम को खूब थकाया था. यही नीति उसने अमेरिका के खिलाफ युद्ध में भी अपनाई और अमेरिकी महंगे डिफेंस सिस्टम को थका डाला.
ईरान की नकल कर रहा अमेरिका
अमेरिका का LUCAS ड्रोन दरअसल ईरान के शाहेद-136 ड्रोन की ही नकल है. इसे एरिजोना की कंपनी स्पेक्ट्रवर्क्स ने रिवर्स इंजीनियरिंग करके बनाया है. अमेरिकी सेना ने ईरानी ड्रोन को कैप्चर किया, उसके अंदरूनी पार्ट्स निकाले और अमेरिका में इसका मेड इन अमेरिका वर्जन तैयार कर लिया. CENTCOM कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने इसे बेहद जरूरी बताया और खुद कहा – हमने इसे पकड़ा, उसके अंदरूनी हिस्से निकाले, अमेरिका भेजा, थोड़ा ‘मेड इन अमेरिका’ टैग लगाया और फिर ईरानियों पर ही दाग दिया.
LUCAS ड्रोन एयर डिफेंस को कैसे मात देता है?
- यह लगभग 10 फीट लंबा, 8 फीट विंगस्पैन वाला सस्ता ड्रोन है, जिसकी कीमत करीब 35,000 डॉलर है.
- ये झुंड में हमला करता है, जिससे दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम ओवरलोड हो जाते हैं. ईरान को हर एक लुकास ड्रोन रोकने के लिए महंगे SAM मिसाइल खर्च करनी पड़ती है, जैसे अमेरिका अपने पैट्रियट सिस्टम को लगाता है.
- ईरान की ये स्ट्रैटजी थी कि वो शाहेद-136 जैसे सस्ते ड्रोन का इस्तेमाल अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम को थकाने के लिए करता था. अब अमेरिका वही 35 हजार डॉलर के लुकास के जरिये कर रहा है.
- लुकास लो-अल्टीट्यूड पर उड़ता है, स्टारलिंक और वियासैट सैटेलाइट से कनेक्ट रहता है, जिससे रडार से बचना आसान हो जाता है. सेल्फ कोऑर्डिनेशन और विजन-बेस्ड टारगेटिंग की वजह से यह बिना पायलट के सटीक हमला करता है.
- पेंटागन का कहना है कि इससे उनकी मैगजीन डेप्थ बची रहती है, यानि महंगे टॉमहॉक या अन्य मिसाइलों का स्टॉक जल्दी खत्म नहीं होता. अब पेंटागन इसे और तेजी से और ज्यादा संख्या में बनाने की तैयारी में है.
ईरान की तरह ड्रोन की फौज तैयार कर रहा अमेरिका
अंडरसेक्रेटरी ऑफ डिफेंस फॉर रिसर्च एंड इंजीनियरिंग एमिल माइकल ने कहा कि कुछ सालों में ही यह ड्रोन मास प्रोडक्शन के लिए तैयार है और युद्ध में इसका प्रदर्शन शानदार रहा है. ट्रंप प्रशासन के ईरान युद्ध में लुकास ड्रोन 28 फरवरी को पहली बार इस्तेमाल हुआ. टास्क फोर्स स्कॉर्पियन स्ट्राइक ने इसे ग्राउंड से लॉन्च किया और ईरानी कमांड सेंटर, एयर डिफेंस साइट और मिसाइल लॉन्चरों को निशाना बनाया. यह बदलाव सिर्फ तकनीकी नहीं, रणनीतिक भी है.
ईरान ने यूक्रेन और मध्य पूर्व में सैकड़ों सस्ते शाहेद ड्रोन से दुश्मनों को परेशान किया. अब अमेरिका उसी हथियार से ईरान को जवाब दे रहा है और आगे और भारी मात्रा में. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर युद्ध लंबा चला तो लुकास ड्रोन की मास प्रोडक्शन अमेरिका को फायदा देगी. सस्ते, स्वायत्त और भारी संख्या में, अमेरिकी ड्रोन वॉर की शुरुआत है, जहां ईरान की अपनी रणनीति अब उसके खिलाफ घूम रही है.







