नई दिल्ली। ईरान में जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बीच दुनिया के की देशों में ईंधन को लेकर किल्लत जारी है। संकट की इस घड़ी में भारत ना सिर्फ अपने देश की जनता की जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि पड़ोसी देश श्रीलंका और बांग्लादेश का भी ख्याल रख रहा है। यही वजह है कि भारत से 38,000 मीट्रिक टन डीजल और पेट्रोल की संयुक्त खेप शनिवार को श्रीलंका पहुंची। भारतीय उच्चायोग ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। भारत के इस कदम की तारीफ ना सिर्फ वहां की सरकार कर रही है, बल्कि श्रीलंका के विपक्षी दल भी इस बात के मुरीद हो गए हैं।
श्रीलंका में नेता प्रतिपक्ष और समागी जन बलवेगया के नेता सजित प्रेमदासा ने भारत की सराहना करते हुए धन्यवाद दिया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, ”हम आपातकालीन ईंधन सहायता के लिए भारत का आभार व्यक्त करते हैं। यह इस बात की याद दिलाता है कि रिश्तों की असली परीक्षा संकट के समय होती है, सुख-सुविधाओं में नहीं। हमें उन लोगों को नहीं भूलना चाहिए, जो सबसे अहम समय में हमारे साथ खड़े रहे।”
आपको बता दें कि श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच 24 मार्च को टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद ईंधन भेजने का फैसला हुआ। इस 38,000 मीट्रिक टन की खेप में 20,000 मीट्रिक टन डीजल और 18,000 मीट्रिक टन पेट्रोल शामिल है। खेप इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) के स्थानीय परिचालन, लंका आईओसी (एलआईओसी) के माध्यम से आपात सहायता के रूप में यहां पहुंची है।
पश्चिम एशिया में अस्थिर स्थिति को देखते हुए ऊर्जा स्थिरता के लिए सहायता के संबंध में श्रीलंका ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत की थी। अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी से ईरान के खिलाफ संयुक्त हमले शुरू किए जिसने बदले में जवाबी कार्रवाई की। इससे युद्ध पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैल गया। होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित हुआ जो विश्व की ऊर्जा आपूर्ति के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बिंदु है।
4 लीटर पेट्रोल जमा करने के आरोपी को 21 दिन की जेल
श्रीलंका में पेट्रोल-डीजल की भारी कमी है। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के एक कस्बे में चार लीटर पेट्रोल जमा करने के आरोप में एक व्यक्ति को 21 दिन की जेल की सजा सुनाई गई है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमला करने के बाद श्रीलंका ने ईंधन की जमाखोरी पर प्रतिबंध लगा दिया है।
48 वर्षीय लसांथा कुमारा बलासूरिया ने गुरुवार को अदालत में अपना अपराध स्वीकार कर लिया। वह नॉर्थ वेस्टर्न प्रांत के निकावेरेटिया कस्बे के निवासी हैं। लसांथा ने अदालत में कहा कि उन्होंने जो ईंधन जमा किया था, वह उनके दिवंगत माता-पिता के वार्षिक धार्मिक समारोह के लिए आसपास की गई सफाई में इस्तेमाल करने के उद्देश्य से था। मजिस्ट्रेट ने बलासूरिया को चार लीटर पेट्रोल की जमाखोरी के लिए 21 दिन की कैद की सजा सुनाई और साथ ही उन पर 1500 श्रीलंकाई रुपये का जुर्माना भी लगाया।
श्रीलंका सरकार ने 15 मार्च को क्यूआर कोड आधारित ईंधन राशनिंग प्रणाली लागू की थी। ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार इस व्यवस्था के तहत कारों को प्रति सप्ताह 15 लीटर और बसों को 60 लीटर ईंधन की अनुमति है।







